• रेत से तेल निकालने के खेल में  एनजीटी के नियमो की उड़ रही धज्जियां

0 जिले की पहचान बनी जीवनदायिनी के अस्तित्व पर  मंडराने लगा खतरा

 चंचलेश श्रीवास्तव

सूरजपुर। क्या आईटी की रडार में जिला खनिज अधिकारी भी शामिल है*…?यह सवाल पिछले तीन दिनों से जिले में तैर रहा है। सूत्रों के मुताबिक जिला खनिज अधिकारी संदीप नायक आईटी की रडार में है और उन्हें नोटिस देकर अम्बिकापुर तलब किया गया था, जहाँ उनसे लंबी पूछताछ की गई। यह तब हुआ है जब अम्बिकापुर के खनिज अधिकारी के घर आईटी का छापा पड़ा था।सूरजपुर खनिज अधिकारी आईटी की रडार में क्यों है..?बताते है रेत से तेल निकालने के खेल में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

जिले में रेत से तेल निकालने के खेल में न केवल एनजीटी के नियमो की धज्जियां उड़ रही है बल्कि प्राकृतिक संसाधनों का ऐसा दोहन किया जा रहा कि जिले की पहचान बनी जीवनदायिनी के अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगा है। जिले में पदस्थ अफसर, नेताओ के गठजोड़ ओर उनकी चुप्पी ऐसी है कि जिले का भविष्य ही जैसे दांव पर है। आम नागरिक लगभग असहाय की स्थिति में है। उनकी आवाज नक्कारखाने में तूती बन कर रह जा रही है। अधिकारी और रेत माफिया मालामाल तो रहवासी कंगाल होने के कगार पर है। पर सब को पैसा चाहिए इसलिए खामोशी बेहतर है। जिले में हाल यह है कि रेत माफिया बेधड़क बड़े पैमाने पर जिले के रेतो को उत्तरप्रदेश भेज रहे है। मगर जिले में शायद कोई ऐसा जिम्मेदार अधिकारी नहीं है जो इन रेत माफियाओ की मनमानी व अवैध रूप से किये जा रहे कारोबार पर रोक लगा सके। जिससे रेत माफियाओ के हौसले आसमानी उड़ान पर है। और हो भी क्यो ना इन रेत माफियाओ के गुर्गों की माने तो हर जिम्मेदार का अपना अपना हिस्सा तय है। शायद यही कारण है कि जिम्मेदार अपनी आंखें बंद किये हुए है और जिले की जीवनदायिनी का अस्तित्व मिटाने का खेल बेख़ौफ़ चल रहा है।  अगर गांव के लोग इनका विरोध करने की हिम्मत जुटाते है तो उन्हें धमकी चमकी कर बेलगाम हो चुके रेत माफिया चुप करा देते है। जिससे गांव में इनके खिलाफ बड़ी तेजी से आक्रोश पनप रहा है।

0ऐसे होता है खेल

जिले में 29 रेत खदाने  संचालित है। इनके अलावे इन रेत माफियाओं के द्वारा कई आवर रेत खदाने अवैध रूप से संचालित की जा रहीं है। जिस खसरा नम्बर का ठेका दिया गया है उसके अतिरिक्त कई स्थानों पर नदियों से अवैध रेत खनन किया जा रहा है। यही स्थिति भंडारण को लेकर भी है। जिले के प्रतापपुर भैयाथान, ओड़गी व सुरजपुर क्ष्रेत्र की खदानों में बगैर सुरक्षा इंतजाम के रेत का भंडारण किया गया है। कायदे से जहां रेत का भंडारण किया जाना है वहां चारो ओर घेराव होना चाहिए मगर जिले के किसी भी भंडारण में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं कि गई है। जिले के बंशीपुर, भैसामुंडा, सतिपारा, केवरा, सेमरकला, घोंघा, बैकोना, पम्पापुर, खड़गवां, कसकेला, करकोटी, रजबहर सहित अन्य कई जगहों पर भंडारण किया गया है। घाट व भंडारण से बड़े पैमाने पर ओवर लोड वाहने रेत लेकर बेधड़क जा रही है। सूत्रों की माने तो इन घाटों व भंडारण से 40 से 70 टन लोड कर वाहने सड़को पर फर्राटे भर रही है। सूरजपुर  जिले की रेत लोड वाहने बलरामपुर जिले के पिट पास से भेजी जा रही है। वहीं एक पिट पास पर कई बड़ी वाहने सेटिंग में निकल रही है।  ओवर लोड वाहनों की बड़ी पैमाने पर आवाजाही से जिले की सड़कें चलने लायक नहीं रह जा रही है जो भी चिंता का विषय है।

0प्रतिबंध के बावजूद चल रहा खेल

15 अक्टूबर तक नदियों से खनन पर प्रतिबंध है बावजूद इसके कई घाट ऐसे है जहां से मशीन लगाकर रेत उत्खनन किया जा रहा है। कुछ थानों में गाहे बगाहे ओव्हर लोडिंग वाहनों पर कार्रवाई तो की जाती है। मगर इसके लिए जिम्मेदार विभाग के अधिकारी कान में तेल डालकर बैठे है। जिले से प्रतिदिन आज की स्थिति में सैकड़ो की संख्या में ओव्हर लोड वाहने यूपी भेजी जा रही है। जिनमे कई फर्जी पिट पास से जा रही है। परंतु विभाग के जिम्मेदार इस ताक में बैठे रहते है कि मामला अखबारों तक न पहुंचे मगर जब रेत का परिवहन अखबारों की सुर्खियां बनता है तब ओपचारिकता पूरी करने एकाध वाहनों पर कार्रवाई कर अपनी पीठ खुद थपथपा लेते है।

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