गांव में विवाद की स्थिति बनने के बाद काफी संख्या में ग्रामीण पहुंचे कोतवाली थाना

भू-स्वामियों के पक्ष में 11 साल बाद हुआ फैसला, कोतवाल ने मौके पर आने आश्वस्त किया

अंबिकापुर। कोतवाली थाना क्षेत्र के ग्राम परसा में जमीन विवाद का 11 साल के अंतराल में न्यायालय नायब तहसीलदार के यहां से आदेश होने के बाद पुलिस के द्वारा कब्जा की प्रक्रिया पूरी कराने में की गई हीलाहवाली से पुन: विवाद की स्थिति निर्मित हो गई। न्यायालय के द्वारा जारी आदेश के बाद संबंधित भूमि का कब्जा दिलाना था। इसकी सूचना स्वयं ग्रामीणों ने कोतवाली थाना आकर दी थी, और थाने से सील-मोहर मारकर दी गई पावती को न्यायालय नायब तहसीलदार के यहां देने के बाद सभी भूमि का कब्जा दिलाने के लिये की जाने वाली अग्रिम कार्रवाई का इंतजार कर रहे थे। जब अधिकारी नहीं पहुंचे तो आदेशित भूमि को जेसीबी लगाकर वे खेती के लिये तैयार कर रहे थे। इस दौरान उभय पक्ष ने विवाद की स्थिति निर्मित कर दी, और एक महिला के कलाई को दांत से काट दिया, इसकी रिपोर्ट 26 जून को ही थाने में दर्ज कराई गई है।

ग्राम परसा निवासी भूमि स्वामी निरंजन, रामनाथ, शिवचरण, धरमसाय, जगदीश, गरीबा, फूलन, बालीचरण, शिवचरण, मोटू, सुशीला, वीरसाय, भोखा, रामअवतार, रमेश राय सहित अन्य ने बताया कि 32 लोगों के करीब 24-25 एकड़ जमीन पर दूसरे पक्ष के द्वारा जबरन हक जताते हुये कब्जा करने की नीयत रखी गई थी। इसके विरूद्ध वे वर्ष 2026 से न्यायालयीन लड़ाई लड़ रहे थे। चालू माह में 15 जून को न्यायालय नायब तहसीलदार के द्वारा उनके पक्ष में आदेश पारित किया गया था। इसके बाद राजस्व अमले को पुलिस के मौजूदगी में कब्जा दिलाने की प्रक्रिया पूरी की जानी थी, लेकिन 10 दिन से अधिक हो गये, कब्जा नहीं दिलाया गया है। पुलिस का कहना है कि उन्हें न्यायालय की ओर से कब्जा दिलाने संबंधित कोई नोटिस नहीं मिला है, जबकि उन्होंने यहां स्वयं नोटिस लाकर दिया था और उसकी पावती न्यायालय नायब तहसीलदार कार्यालय में ले जाकर दी थी, जिसे वे अपने पास रख लिये थे। इन सबके बीच वे खेती-किसानी के लिये अपनी जमीन को जेसीबी वाहन लगाकर समतल करा रहे थे, इधर उभय पक्ष जिनका न्यायालय के आदेश के बाद उक्त जमीन से कोई लेना-देना नहीं है, उनके द्वारा विवाद की स्थिति निर्मित कर दी गई। शनिवार को जब वे थाना पहुंचे, तो थानेदार द्वारा दोनों पक्षों के विरूद्ध 151 की कार्रवाई करने के लिये क्यों कहा गया, इसे लेकर भी वे पशोपेश में रहे। ग्रामीणों का कहना था कि, उनके दस्तावेजों को सरसरी निगाह से देखने के बाद पुलिस उल्टे उन्हीं ही जिले में जमीन विवाद को लेकर होने वाले घटनाक्रमों का हवाला देकर आवेशित होकर विवाद और मारपीट नहीं करने की नसीहत देती है। अगर उन्हें झगड़ा-फसाद करके ही जमीन हासिल करना होता, तो वे 11 साल तक न्यायालय में चले कार्रवाई का क्यों इंतजार करते।

डीओ की कुर्सी पर बैठे मोहर्रिर को पता नहीं, क्यों आये ग्रामीण
बता दें कि, कोतवाली थाना में रोजाना ड्यूटी अफसर की ड्यूटी लगती है, इनका काम थाने में आने-जाने वाले लोग किस काम से, आ रहे हैं, किस फरियादी को किससे मिलना है, इससे अवगत कराते हुये आवश्यक सहयोग प्रदान करना है। शनिवार को दोपहर में कोतवाली थाना में प्रधान आरक्षक सुरजीत कोरी ड्यूटी अफसर की कुर्सी में बैठे थे। इनके करीब ही जमीन पर काफी संख्या में फरियादी महिला-पुरूष बैठे थे, लेकिन इन्हें यह पता नहीं था कि इतने फरियादी थाना में किस मकसद से आये हैं। ग्रामीणों की भीड़ के बारे में पूछने पर इनके द्वारा गैर जिम्मेदाराना तरीके से पता नहीं क्यों आये हैं, मैं नहीं जानता, जैसा जवाब दे दिया गया। वहीं वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के द्वारा हर बैठक में थाना में आने वाले आगंतुकों से अच्छा व्यवहार करने, संवेदनशीलता के साथ उनकी फरियाद सुनने के लिये कहा जाता है।

कलाई को दांत से काटा, 4 के विरूद्ध केस दर्ज
ग्राम परसा महादेवपारा निवासी सोनम महंत ने कोतवाली थाना में रिपोर्ट दर्ज कराया है कि, ग्राम परसा में उनके पति बन्नु दास के पूर्वजों का जमीन है, जिसमें वे अभी तक खेती करते आ रहे हैं। 26 जून को सोनम अपने पति बन्नु दास, ससुर सुखदेव, सास मालती बाई और देवर सुनील दास के साथ ग्राम परसा स्थित भूमि पर मकई की खेती कराने आये थे। दोपहर करीब 2 बजे ग्राम परसा के विनोद, किलम साय, नागेश्वर, जुगेश्वर के द्वारा जोताई-बुआई कराने की बात को लेकर गाली-गलौज करते हुये जान से मारने की धमकी दी गई। इस दौरान विनोद उसके बायें हाथ के कलाई में दांत से काट लिया, जिसका निशान उभर गया, और महिला दर्द से छटपटाने लगी। इस दौरान मौके पर मौजूद पति सहित परिवार के सदस्यों ने बीच-बचाव किया। सोनम महंत की रिपोर्ट पर पुलिस ने बीएनएस की धारा 115(2), 296, 3(5), 351(3) का मामला दर्ज किया है।

 

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