दिल्ली के जनजातीय सांस्कृतिक समागम से लौटे लोगों का गोड़ धोनी से स्वागत

अंबिकापुर। जनजाति सुरक्षा मंच, सरगुजा ने देश की राजधानी दिल्ली के लाल किला मैदान में आयोजित जनजातीय सांस्कृतिक समागम में सहभागिता की, यहां से लौटने के बाद प्रतिनिधियों का उरांव सामाजिक भवन, पटेलपारा में स्वागत एवं पारंपरिक गोड़ धोनी कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान बिरसा मुंडा एवं बाबा कार्तिक उरांव के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित करके किया गया।

जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेशराम भगत ने अपने उद्बोधन में जनजातीय समाज की गौरवशाली पैर धोने की परंपरा को सम्मान, सेवा और सामाजिक समरसता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि, डीलिस्टिंग कानून पारित होने तक जनजातीय समाज का आंदोलन निरंतर जारी रहेगा। 29 अक्टूबर को बाबा कार्तिक की जयंती पर अंबिकापुर में डीलिस्टिंग गर्जना महारैली आयोजित किया जाएगा। उन्होंने सभी से भगवान बिरसा मुण्डा, बाबा कार्तिक उरांव, संत गहिरा गुरु के बताये मार्ग पर चलने एवं जनजातीय समाज के अधिकारों और संस्कृति की रक्षा के लिए जनजागरण का आव्हान किया। उन्होंने कहा कि धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों को जनजातीय आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए, समाज को इस विषय पर जागरूक रहने की आवश्यकता है। उन्होंने डीलिस्टिंग आंदोलन के प्रति दृढ़ संकल्प व्यक्त करते हुए कहा, जब तक मैं जीवित हूं, जनजाति हितों के विरुद्ध कोई निर्णय नहीं होने दूंगा और समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करता रहूंगा।

प्रांत सह संयोजक इन्दर भगत ने कहा कि दिल्ली के लाल किला मैदान में आयोजित ऐतिहासिक कार्यक्रम जनजातीय एकता, संस्कृति, अस्मिता और अधिकारों के संरक्षण का एक सशक्त मंच बना। इसमें देशभर के 550 से अधिक जनजाति समाज के 3 लाख से अधिक जनजातियों ने शिरकत की। सरगुजा से भी हजारों जनजातियों ने सहभागिता कर सरगुजा की वनांचल संस्कृति और समाज का गौरव बढ़ाया है। सम्मान में आयोजित यह पारंपरिक गोड़ धोनी कार्यक्रम हमारी संस्कृति और सम्मान की परंपरा का प्रतीक है। कार्यक्रम में मंच संचालन जिला संयोजक बिहारीलाल उरांव एवं आभार प्रदर्शन जिला सह संयोजक रज्जू राम ने किया। कार्यक्रम में प्रांत संरक्षक डॉ. आजाद भगत, प्रांत संयोजक रोशन प्रताप सिंह, प्रांत सह संयोजक लालदेव भगत, मानेश्वर भगत, राईज बैगा मानकेश्वर भगत, जगरनाथ बैगा, दिलीप एक्का, देवनारायण भगत, श्रीराम भगत, सालिम केरकेट्टा, खेमराज सिंह, ठाकुर दयाल पैंकरा, बालमुनि प्रधान, सिलो भगत, पावन पूर्णाहुति भगत, सिमारो तिग्गा, अल्बिना मिंज, पूनमचंद गुप्ता, सोनिया मुंडा, मंजू उरांव, सागर एक्का, सचिन भगत, संदीप भगत, ममता भगत, बलजेंद्र भगत, अजीत मिंज, आरती मुंडा, दुर्गावती नागवंशी, अनूप, अजय, सत्यम, कांति भगत, मानसून भगत, लक्ष्मी भगत, सुमित्रा कुजूर, सबीना भगत, लक्ष्मी भगत, वीरेन्द्र तिग्गा, बिल्यंती एक्का, गीता प्रसाद, आरती भगत, घनश्याम भगत, कौशल्या भगत, ओम प्रकाश नगेशिया सहित बड़ी संख्या में जनजाति सुरक्षा मंच के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

 

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