वर्तमान में दो पिलर पोस्ट हाइडेंट के भरोसे अग्निशमन विभाग
फायर सेफ्टी को लेकर कलेक्टर की उपस्थिति में नगर सेना व व्यापारिक संगठनों की बैठक

अंबिकापुर। कहीं आग लगने की स्थिति में नगर सेना के अग्निशमन विभाग के दस्ते की भूमिका अहम होती है। पूर्व में निगम क्षेत्र में सात फायर पॉइंट (पिलर पोस्ट हाइडेंट) बनाए गए थे, इनमें से वर्तमान में दो चालू हैं। ऐसे में फायर टीम को वॉटर रिफिलिंग में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यह कमी अग्निशमन विभाग के द्वारा नगर सेना मुख्यालय से प्राप्त निर्देशानुसार आहूत की गई बैठक में सामने लाई गई। बताया गया कि निगम क्षेत्र में अग्निशामक वाहनों में वॉटर रिफिलिंग के दृष्टिकोण से बनाए गए पॉइंट में फायर स्टेशन स्टेडियम कांपलेक्स, गुरूनानक चौक व थाना के पास स्थित टंकी ही चालू हालत में हैं। गांधीनगर बाबरा प्लांट, मणिपुर पानी टंकी, धोबी घाट फॉरेस्ट ऑफिस के पास, चोपड़ापारा में ब्रम्हाकुमारी विद्यालय के पास, केदारपुर में सिन्हाजी के घर के पास स्थित पॉइंट बंद है। अग्नि दुर्घटना के दौरान फायर टेंडर्स को वॉटर रिफिलिंग के लिए इन्हीं दो पॉइंट में दौड़ लगानी पड़ती है। ऐसे में बंद पड़े पांच प्वाइंटस को पुन: चालू कराने का आग्रह किया गया है, ताकि सहूलियत के अनुरूप बंद पॉइंट से वॉटर रिफिलिंग का काम किया जा सके। बैठक में कलेक्टर सरगुजा, निगम आयुक्त सहित अन्य अधिकारियों व व्यापारी संगठनों की भी उपस्थिति रही।

बता दें कि शहर में बड़ेे व्यवसायिक प्रतिष्ठान, अस्पताल के अलावा होटल, लॉज सहित कई संस्थान संचालित हो रहे हैं, लेकिन अग्नि सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम नहीं होने से आगजनी को रोकने के प्रारंभिक प्रयास नहीं हो पाते हैं, जिससे बड़ी अग्नि दुर्घटना की स्थिति बनती है। कई ऐसे प्रतिष्ठान शहर की संकरी गलियों के बीच भी संचालित हो रहे हैं। आग लगने जैसी घटना होने पर नगर सेना का फॉयर दस्ता तो बिना समय गंवाए मौके पर पहुंच जाता है, लेकिन आग बुझाने के पहले तमाम अवरोधों को दूर करने में समय लगने के कारण आग वीभत्स रूप ले लेती है। अगर अग्निरोधी संसाधन पहले से इन संंस्थानों में उपलब्ध हों और संस्थान संचालक व कर्मचारी आग बुझाने का प्रशिक्षण लें तो प्रारंभिक प्रयास कर आग को बढऩे से रोका जा सकता है। अग्निशमन विभाग भले ही प्रशिक्षण देने को तैयार हो लेकिन बड़े प्रतिष्ठानों की रूचि अभी तक इस ओर देखने को नहीं मिली है। ऐसे में अग्निशमन विभाग अब कठोर कदम उठाने के मूड में है। इसे लेकर नगर सेना मुख्यालय के निर्देशानुसार आहूत की गई बैठक में सरगुजा कलेक्टर कुंदन कुमार, नगर निगम आयुक्त प्रतिष्ठा ममगई व पुलिस व प्रशासन के अन्य अधिकारियों का ध्यानाकर्षण कराया गया है, ताकि अपने संस्थानों, शासकीय-अशासकीय कार्यालयों, स्कूल की सुरक्षा के प्रति लोगों में जागरूकता आए। अक्सर देखने को मिलता है कि वाहनों में अग्नि दुर्घटनाएं हो रही हैं। ऐसे में बस, ट्रक, ऑटो, कार में 250 ग्राम या एक किलोग्राम का फायर एक्स्टींग्यूशर लगाना चाहिए, जिससे इसका उपयोग कर दुर्घटना को प्रारंभिक स्थिति में रोका जा सके। वाहन मालिकों से अपने वाहनों में अग्निशामक यंत्रों की व्यवस्था अपडेट रखें हैं या नहीं इसके लिए क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी से कार्रवाई की अपेक्षा व्यक्त की गई। शहर के रहवासी क्षेत्र, भू-तल में गोदाम अथवा दुकान तथा प्रथम द्वितीय तल पर भंडार अथवा निवास भी खतरे से खाली नहीं है। मनीष बैग हाउस पुराना बस स्टैंड ऐसे स्थलों में एक है, जिसका चिन्हांकन कर अंतिम नोटिस देते हुए पुलिस विभाग के साथ संयुक्त कार्रवाई के मूड में अग्निशमन विभाग है। जिले में शासकीय-अशासकीय अस्पतालों तथा क्लीनिक में प्राय: अग्निशमन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। यहां अग्निशामक उपकरण स्थापित हैं किंतु संचालन की जानकारी नहीं है। ऐसे में अग्निशमन विभाग प्रशिक्षण पर जोर दे रहा है। कई शासकीय भवनों, कार्यालयों में भी अग्निशमन यंत्रों का नहीं होना एवं उपयोग की जानकारी नहीं होना सामने आया है, जिस कारण अति महत्वपूर्ण दस्तावेज कंप्यूटर, एसी, फ्रीज नष्ट हो जाते हैं। अग्निशमन उपकरणों की व्यवस्था हो तो इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सकता है। कलेक्टर कुंदन कुमार से सभी शासकीय कार्यालयों में अग्निशामक यंत्रों की स्थापना व प्रशिक्षण हेतु आदेश जारी करने का आग्रह किया गया है। बैठक में अपर कलेक्टर अमृत लाल ध्रुव, संभागीय सेनानी राजेश पांडेय, सीएसपी स्मृतिक राजानाला, एसडीएम शिवानी जायसवाल, डीएसपी यातायात कामता प्रसाद दीवान, जिला अग्निशमन अधिकारी शिव कठुतिया, आरआइ जयराम चेरमाको, फायर स्टेशन इंचार्ज अंजनी तिवारी के अतिरिक्त व्यापारी संगठनों से प्रतिनिधि शामिल हुए।

शहर के 50 से अधिक मोहल्ले पहुंचविहीन
शहर में लगभग 53-54 मोहल्ले ऐसे हैं जहां अग्निशामक वाहन अग्नि दुर्घटना होने पर नहीं पहुंच पाती। घटना होने पर वैकल्पिक व्यवस्था करना पड़ता है, जिसमेें कठिनाइयां होती हैं। आयुक्त नगर पालिक निगम से आग्रह किया गया भविष्य में भवन अनुज्ञा प्रदाय करते समय अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र अनिवार्य करें। शहर में स्थिति कुछ हॉटल, लॉज भी संकरी गलियों में हंै। कुछ हॉटलों व लॉजों में फायर एक्जिट भी नहीं है। एकमात्र रास्ता होने से दुर्घटना होने पर भगदड़ मेें जख्मी होने या अनहोनी की स्थिति बनती है। अग्निशमन विभाग ऐसे संस्थानों का निरीक्षण कर नोटिस भी दिया है। अंतिम नोटिस के बाद भी अमल नहीं करने पर अब पुलिस प्रशासन के साथ संयुक्त कार्रवाई करेगा।

विद्युत खंभों, तारों का अवरोध कम नहीं  
शहर व गांवों में दुर्घटना जनित क्षेत्र में अग्नि दुर्घटना की दशा में फायर टेंडर्स को ले जाते समय बिजली के तारों के अवरोध का सामना करना पड़ता है। तार काफी नीचे होने के कारण बांस के सहारे दो फायर मैन बिजली तार को उठाते हैं, जिससे आगजनी स्थल पर पहुंचने में विलंब होता है और अग्नि दुर्घटना स्थल पर काफी नुकसान की स्थिति बनती है। विद्युत विभाग से अपेक्षा व्यक्त की गई है कि विद्युत तारों व खंभों की ऊंचाई 20 फीट से ऊपर रखें।

शहर की सड़कों में ये भी रोड़े
शहर के मार्गों में भवन निर्माण कार्य से संबंधित सामग्री सड़कों पर रखा जाता है, जिससे दुर्घटना स्थल पर वाहन पहुंचने में दिक्कत होती है। इसके अलावा घर के बाहर सड़क पर दोपहिया, चार पहिया वाहन खड़ा होने से सड़क जाम की स्थिति बनती है, जिससे फायर या एंबुलेंस को पहुंचने में परेशानी होती हैं। इस पर यातायात पुलिस से ध्यान देने व कार्रवाई की अपेक्षा व्यक्त की गई है।

जोखिम के बाद भी प्रशिक्षण में रूचि नहीं
अग्निशमन विभाग के उच्चाधिकारियों द्वारा दिए गए आदेशों के पालन में अग्निशमन कर्मचारियों के द्वारा फायर ऑडिट एवं समझाइस के बाद भी जागरूकता का अभाव है। अग्निशमन विभाग के महानिदेशक ने जोखिम वाले संस्था में कार्यरत कर्मचारियों को फायर स्टेशन में प्रशिक्षण देने का आदेश दिया है किंतु आज तक किसी ने आवेदन नहीं किया। उक्त संस्थानों को अंतिम बार नोटिस जारी करते हुए पुलिस प्रशासन के सहयोग से कार्रवाई की बात कही गई है। रहवासी क्षेत्र में गैस गोदामों के संचालन को रोकने और बड़ी संभावित दुर्घटनाओं को टालने निगम प्रशासन से कार्रवाई की अपेक्षा व्यक्त की गई है।

यहां भी अग्निशमन व्यवस्था, प्रशिक्षण करें अनिवार्य
बैठक में शहरी अथवा ग्रामीण क्षेत्र में संचालित स्कूलों में भी अग्निशमन यंत्रों की स्थापना को अनिवार्य करने व विद्यालय प्रबंधन, छात्र-छात्राओं को आग रोकने एवं बचाव के तरीके के संबंध में जानकारी हेतु जिला फायर अधिकारी कार्यालय में आवेदन कर प्रशिक्षण देने हेतु जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से संपर्क करने का सुझाव दिया गया। कचरा संग्रहण केंद्र, एसएलआरएफ सेंटर का शहर के 16 वार्डों में संचालन किया जा रहा है, शहर के बाहर भी डंपिंग यार्ड का निर्माण किया गया है, जहां नियमित रूप से आगजनी की घटना होती है। ऐसे में यहां के कर्मचारियों को आग रोकने के तरीके से अवगत कराने और कचरों को व्यवस्थित करके दुर्घटनाएं रोकने की बात कही गई और निगम आयुक्त द्वारा समस्त एसएलआरएम सेंटर्स प्रभारी को सेंटर के सभी स्वच्छता दाई को अग्नि दुर्घटना से बचाव का प्रशिक्षण लेने के संबंध में आदेश प्रसारित करने का आग्रह किया गया।
कलेक्टर ने कहा-किया जाएगा फायर सेफ्टी ऑडिट

कलेक्टर कुंदन कुमार ने बैठक में चर्चा करते हुए रहवासी क्षेत्र में संचालित गैस गोदाम को एक महीने के अंदर स्थानांतरित करने संबंधितों को निर्देशित किया। उन्होंने कहा सभी प्रकार के भवनों में फायर सेफ्टी ऑडिट किया जाएगा। उन्होंने सर्व संबंधितों को एक सप्ताह के अंदर अग्निशमन मानदंडों को अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। नगर निकाय अंतर्गत व्यवसायिक भवन, अस्पताल, विद्यालय, फैक्ट्री, आवासीय भवन, होटल इत्यादि का फायर सेफ्टी ऑडिट करना सुनिश्चित करने कहा। शासकीय भवनों में भी लगे अग्नि सुरक्षा उपकरण, बेसमेंट, फायर एक्जिट आदि निरीक्षण करते हुए व्यवस्थित करने साथ ही सभी संस्थानों के संचालक और मैनेजर को अग्निशमन हेतु प्रशिक्षित करने निर्देशित किया। कलेक्टर ने इस प्रक्रिया को फायर सेफ्टी सप्ताह के रूप में चलाने के निर्देश दिए।

आग लगने पर इन नंबरों में दें सूचना
आग लगने की स्थिति में अग्निशमन कार्यालय के दूरभाष नंबर 07774-220100, मोबाइल नंबर 81201 91269, 101 या अंबिकापुर एवं रायपुर से संचालित डॉयल 112 में सूचना दी जा सकती है।

Categorized in: