मामला बाउंड्रीवॉल निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार का, जांच टीम ने भी कर दी लीपापोती
अंबिकापुर। सुअर फार्म सकालो में बाउंड्रीवॉल निर्माण कार्य में अनियमितता बरतते हुए गुणवत्ताहीन निर्माण कराते हुए कार्य से अधिक रकम का भुगतान कंस्ट्रक्शन कम्पनी के प्रोपराइटर को किया गया था। इस संबंध में दायर किए गए परिवाद पर न्यायालय मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी ने पुलिस को कंस्ट्रक्शन कम्पनी के संचालक, तत्कालीन सहायक अभियंता सहित 10 लोगों के विरूद्ध केस दर्ज करने निर्देशित किया था। न्यायालय के आदेश के बाद भी रिपोर्ट दर्ज करने में हीलाहवाली व न्यायालय के आदेश की अवहेलना का मामला सुर्खियों में आने के बाद हरकत में आई पुलिस ने परिवादी के कथन व प्रस्तुत दस्तावेज तथा मौका निरीक्षण के बाद आरोपियों के विरूद्ध भादवि की धारा 420, 409, 467, 468, 471, 120बी के तहत गांधीनगर थाना मे अपराध दर्ज कर लिया है।
गोधनपुर निवासी रोहित सिंह ने न्यायालय में परिवाद दायर करके अवगत कराया था कि कार्यालय कार्यपालन अभियंता ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग अंबिकापुर के द्वारा वर्ष 2022-23 में सुअर फार्म सकालो में बाउंड्रीवॉल निर्माण कार्य के लिए तकनीकी स्वीकृति 29.07.2019 को प्रदान की गई थी। उक्त कार्य का अनुबंध मेसर्स आशीर्वाद कंस्ट्रक्शन के प्रोपराइटर दीपांशु राज से ऑनलाइन टेंडर में 30.35 प्रतिशत कम दर पर हुआ था। इसके बाद 16.75 लाख का कार्यपालन अभियंता ग्रामीण यांत्रिकी सेवा अंबिकापुर द्वारा अनुबंध कराकर कार्य प्रारंभ किया गया, जिसके अंतर्गत 450 मीटर बाउंड्रीवॉल का निर्माण करना था। संबंधित ठेकेदार तथा अधिकारियों की सांठ-गांठ से यह कार्य भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। बाउंड्रीवॉल निर्माण कार्य में प्लिंथ बीम के नीचे कॉलम में 12 एमएम का छड़ मानक के अनुसार लगाना था, परंतु ठेकेदार आशीर्वाद कंस्ट्रक्शन के द्वारा प्लिंथ बीम के नीचे कॉलम में 10 एमएम का छड़ लगाया गया है। संबंधित अधिकारी के द्वारा इसे माप पुस्तिका में 12 एमएम का दर्शा दिया गया।
आयुक्त सरगुजा संभाग तथा कार्यपालन अभियंता के समक्ष शिकायत करने के बाद विभाग के अधिकारियों ने इसकी जांच की, जिसमें अनियमितता और भ्रष्टाचार की पुष्टि हुई। संबंधित अधिकारियों से उक्त राशि का वसूली की अनुशंसा भी की गई है। बाउंड्री निर्माण कार्य में 131 कॉलम बना था, सभी में 12 एमएम के छड़ के दर पर राशि का आहरण किया गया है, जांच दल ने मात्र 50 कॉलम को ही दर्शाया है। आरोप है कि निविदा प्राक्कलन में कॉइल तार का कार्य नहीं था पर ठेकेदार को लाभ पहुंचाने व अधिकारियों के कमीशनखोरी के लिए प्राक्कलन में बदलाव करके 60 हजार रुपये को 7 लाख 17 हजार रुपये करके शासकीय राशि का गबन कर लिया गया। तत्संबंध में की गई शिकायत पर जांच में सामने आया कि संबंधित अधिकारी के द्वारा 4 लाख 52 हजार 25 रुपये का अधिक भुगतान ठेकेदार को नियम विरुद्ध किया गया है। इसकी वसूली संबंधित अधिकारी से की जानी चाहिए। उक्त निर्माण कार्य में डीपीसी 8 इंच मूल्यांकन किया गया है, जबकि यह कार्य ठेकेदार के द्वारा नहीं किया गया। 7 फिट ऊंचाई के निर्माण कार्य में तकनीकी रूप से 8 इंच की आरसीसी, डीपीसी की आवश्यकता नहीं है, परंतु सक्षम अधिकारियों ने गलत मूल्यांकन किया। वास्तविकता यह है कि कार्यस्थल पर काम नहीं कराया गया है। जांच में पाया गया है कि माप पुस्तिका में अतिरिक्त राशि 64.949 रुपये दर्शाया गया है, जिसकी वसूली संबंधित अधिकारियों से होने योग्य है। प्लास्टर का कार्य भी प्राक्कलन के अनुसार नहीं कराया गया है, जिसे दोनों जांच टीमों ने देखा पर इसके बारे में स्पष्ट जांच प्रतिवेदन में नहीं लिखकर गुणवत्ताहीन कार्य को छिपाने का प्रयास किया गया है। निर्माण कार्य में पोताई का कार्य भी नहीं हुआ है, जिसे देखने के बाद भी जांच टीमों ने नहीं लिखा। दूसरी बार जब जांच टीम आई तो उन्होंने पंचनामा दो पन्नों का बनाया था पर आयुक्त और परिवादी को मात्र एक पन्ना ही दिया। इसके अलावा अन्य निर्माण कार्यों में अनियमितता बरतते हुए भ्रष्टाचार करने की जानकारी दी गई है, जिसमें अतिरिक्त भुगतान करके भ्रष्टाचार करना बताया गया है।
वीडियो बनाकर लाओ हम देख लेंगे
अधीक्षण अभियंता जी.एन. सिंह ने जांच करते समय उपस्थित लोगों एवं जांच टीम के सामने उन्हें लेबर लेकर आने कहा था। तीन दिन लेबर लेकर जाने के बाद भी कोई नहीं आया। इसकी जानकारी फोन करके देने पर तीसरे दिन वीडियो बनाकर ले आओ हम देख लेंगे और जांच प्रतिवेदन में लिख देंगे, कहकर टालमटोल कर दिया गया। अधीक्षण अभियंता जी.एन. सिंह, मानस गुप्ता और फरहत खान को वीडियो भेजने के बाद भी इसे पंचनामा व जांच प्रतिवेदन में नहीं लिखकर गुणवत्ताहीन काम को छिपाने का प्रयास मिलीभगत करके किया गया है।
पुलिस ने इनके विरूद्ध किया केस पंजीबद्ध
न्यायालय मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी के आदेश पर पुलिस ने मेसर्स आशीर्वाद कंस्ट्रक्शन प्रो. दीपांशु राज निवासी गोधनपुर पानी टंकी के पास, उपेंद्र सिंह सेंगर तत्कालीन सहायक अभियंता, विवेक प्रताप सिंह राठौर उप अभियंता ग्रामीण यांत्रिकी सेवा उप संभाग अंबिकापुर, आर.पी. कुटार कार्यपालन अभियंता ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग अंबिकापुर, डी.के. मिंज अनुविभागीय अधिकारी ग्रामीण यांत्रिकी सेवा उप संभाग लखनपुर, शैलेंद्र भारती अनुविभागीय अधिकारी ग्रामीण यांत्रिकी सेवा उप संभाग उदयपुर, अविनाश राज सिन्हा उप अभियंता जनपद पंचायत लखनपुर, जी.एम. सिंह अधीक्षण अभियंता ग्रामीण यांत्रिकी सेवा सरगुजा मंडल अंबिकापुर, मानस गुप्ता अनुविभागीय अधिकारी ग्रामीण यांत्रिकी सेवा सरगुजा मंडल अंबिकापुर, फरहत खान उप अभियंता ग्रामीण यांत्रिकी सेवा सरगुजा मंडल अंबिकापुर के विरूद्ध प्रथम सूचना पत्र दर्ज किया है।

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