काउंसलिंग के बाद तलाकशुदा युगल जोड़ों को पुलिस ने बनाया जीवनसाथी
महिला थाना प्रभारी और काउंसलर की पहल पर एक दूजे के हुए सुनीता-धर्मेन्द्र

अंबिकापुर। कहते हैं रिश्ते की डोर एक बार टूट जाए तो दूरियां बन जाती हैं, इस डोर को जोड़ पाना मुश्किल होता है। इसके बाद घुटन भरी जिंदगी जीने के अलावा कोई रास्ता शेष नहीं रह जाता है। बात विवाहित दंपत्ति की करें तो एक बार तलाक होने के बाद इनके जीवन का सफर आसान नहीं रहता। यहां हम एक ऐसे दंपती के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका साथ सिर्फ एक माह में छूट गया। इसके बाद न सिर्फ दो साल तक दूरी बनी रह बल्कि तलाक भी हो गया। इसके बाद भी नवदंपत्ति के बीच किसी प्रकार के मनभेद की स्थिति नहीं बनी। नवविवाहिता सही वक्त का इंतजार करते पढ़ाई में रमी रह गई। दो वर्ष बाद परिवार, समाज उन्हें अंगीकार करेगा या नहीं, इसकी परवाह किए बगैर लड़की ने अपने पति के साथ रहने की ठानी, लेकिन बात नहीं बनी। कहा जाए तो तलाक के बाद वर पक्ष भी एक तरह से इस रिश्ते को स्वीकार नहीं कर रहा था। बाद में स्वयं लड़की ने महिला थाना तक पहुंच कर रिश्तों की टूटती डोर से थाना प्रभारी को अवगत कराया। इसके बाद महिला थाना की प्रभारी सुनीता भारद्वाज और परिवार परामर्श केन्द्र की काउंसलर डॉ. मीरा शुक्ला ने अनवरत काउंसलिंग करके टूटे रिश्तों की डोर को मजबूती प्रदान की।

परिवार परामर्श केन्द्र ने निकाला पुनर्विवाह का रास्ता
शहर के महिला थाना में संचालित परिवार परामर्श केंद्र में पति-पत्नी के बीच विवाद सहित अन्य पारिवारिक मामले आए दिन सामने आते हैं। परिवार के बीच सामान्य अनबन की स्थिति को लोग थाना, मुकदमा का मसला न बनाएं, इसके लिए यहां काउंसलिंग की व्यवस्था की गई है। पुलिस दोनों पक्षों की काउंसलिंग करके कई परिवार का घर उजड़ने से बचाती है, इसके पीछे कारण एक बार अपराध दर्ज होने के बाद मन में खटास का बने रहना भी होता है। इन सबके बीच पहली बार काउंसलिंग के बाद एक ऐसे दंपत्ती का घर पुलिस व काउंसलर ने बसाया, जिनका साथ विवाह के एक माह बाद ही छूट गया था, लड़की अपने मायके चली गई थी। दोनों ने तलाक ले लिया था, लेकिन मन से दोनों ही एक-दूसरे को नहीं निकाल पाए थे। दो साल तक एक-दूसरे से बनी दूरी व तलाक के बाद भी लड़की अपने पति का साथ नहीं छोड़ना चाहती थी। इधर परिवार व समाज के लोग विवाह के एक माह बाद ही ससुराल त्यागी बहु को स्वीकार करने से कतरा रहे थे। इनका घर बसाने महिला थाना के परिवार परामर्श केन्द्र में काउंसलिंग हुई और महिला थाना प्रभारी सुनीता भारद्वाज व एमएसएसव्हीपी की डायरेक्टर डॉक्टर मीरा शुक्ला ने वर-वधु पक्ष की बातों को सुनने के बाद इनके पुनर्विवाह का रास्ता निकाला और शनिवार, 13 जुलाई को पूर्व से विवाहित दंपती, पुनर्विवाह के बाद एक-दूसरे का दामन थाम लिए।

पति का साथ छोड़ ली पैरामेडिकल व बीएड की शिक्षा
परिवार परामर्श केन्द्र में की गई काउंसलिंग के बीच एक तथ्य यह भी सामने आया कि सीतापुर थाना क्षेत्र निवासी सुनीता खाखा व धर्मेंद्र के वैवाहिक जीवन से दूरी बनने व तलाकनामा का एक बड़ा कारण शिक्षा की धारा से जुड़े रहना भी रहा। पति-पत्नी का रिश्ता त्यागकर सुनीता जहां स्वयं पैरामेडिकल व बीएड की शिक्षा ली, वहीं पति को एक दोस्त की तरह शिक्षा लेने के लिए प्रेरित करते रही, जिससे वह भी घर-परिवार की जिम्मेदारी से दूर आज भी शिक्षा की धारा से जुड़ा है। वर्तमान में वह घर में ही रहकर आगे की शिक्षा ले रहा है। युवती की बीच-बीच में पति धर्मेंद्र से बातचीत होती थी, जिससे इनकी एक-दूसरे के प्रति चाहत बरकरार रही। सुनीता जब अपने पति के साथ रहने की सोच बनाई, लेकिन दो साल पूर्व विवाह के बाद बनी स्थिति के बाद, फिर इनका एक होना स्वजनों को रास नहीं आ रहा था। कहा जाए तो सामाजिक अपयश के चलते वे इस रिश्ते को स्वीकार करने में हिचकिचाहट महसूस कर रहे थे।

अब जीवन संगिनी का दायित्व निभाने पहुंची ससुराल
सुनीता एक बार मांग में सिंदूर भर चुके अपने पति को त्यागना नहीं चाहती थी, बल्कि उसे शिक्षा लेने के लिए प्रेरित करते हुए इस संताप से निकालना चाहती थी कि वह उसकी जीवन संगिनी है और रहेगी। इधर परिवार व समाज के ख्यालात कुछ अलग ही नजर आने पर वह पति का साथ पाने महिला थाना पहुंची। उसने विवाह के बाद बनी स्थिति से अवगत कराया। परिवार की डोर न टूटे और दोनों एक दूजे के हो जाएं, इसके लिए महिला थाना प्रभारी सुनीता भारद्वाज व परिवार परामर्श केन्द्र की काउंसलर डॉक्टर मीरा शुक्ला ने आपसी चर्चा के बाद दोनों परिवार को अलग-अलग काउंसलिंग के लिए बुलाया। दो काउंसलिंग में किसी न किसी की अनुपस्थित रहने से बात नहीं बनी, तीसरी काउंसलिंग में दोनों परिवार के सदस्य के अलावा रिश्तेदार भी पहुंचे और इन्होंने दोनों के पुनर्विवाह को स्वीकार करते हुए मंदिर में विवाह की औपचारिकता पूरी की। इसके बाद खुशनुमा माहौल में नवदंपत्ती को बधाई, शुभकामना देते हुए इनके सफल जीवन की कामना करते हुए इन्हें विदा किया। इस दौरान वर और वधु पक्ष से परिवार के सभी सदस्यों की उपस्थिति रही।  

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