70 से अधिक पीडि़त एंटी रेबीज का टीका लगवाने रोजाना पहुंच रहे अस्पताल

अंबिकापुर। आवारा कुत्तों के काटने से पीडि़तों की संख्या दिनोंदिन बढ़ते जा रही है। शहर के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध अस्पताल में रोजाना 10 से 15 डॉग बाइट के केस शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों से सामने आ रहे हैं, वहीं 70 से 80 पीडि़त एंटी रेबीज का टीका लगवाने के लिए पहुंचते हैं। स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक मार्च और अप्रैल माह में आवारा कुत्तों के हमले में 952 जख्मी हुए हैं, वहीं अप्रैल से अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है। कुछ मामलों में मौत का कारण घरेलू उपचार की ओर ध्यान देना और स्वास्थ्य बिगडऩे पर पीडि़त को लेकर अस्पताल पहुंचना है। नियमित रेबीज का टीका लगवाने के बाद भी पीडि़त की मौत, जैसा मामला भी सामने आ रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि कुत्ता या कोई पशु काटे तो इसे गंभीरता से लें, और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाकर टीकाकरण कराएं।

बता दें कि, शहर के कुछ इलाके में आवारा और खूंखार कुत्तों के झुंड का मौजूद रहना राहगीरों और दोपहिया चालकों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। इस पर काबू पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अमल करते हुए नगर निगम ने आवारा कुत्तों को खिलाने-पिलाने के लिए निश्चित जगह तय करते हुए फीडिंग जोन बनाकर पोस्टर लगाया है, ताकि लोग उस जगह पर बचा हुआ खाना डालें। हालांकि ये फीडिंग जोन अभी तक बेकाम का ही साबित हो रहा है। शहर के कॉलोनियों, मोहल्लों और सडक़ के किनारे आवारा कुत्ते ज्यादा सक्रिय नजर आते हैं। बधियाकरण अभियान भी ठंडे बस्ते में है। ऐसे में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि कई जगह झुंड में कुत्ते दिखाई देते हैं। रात के समय में इनका खतरा दोगुना बढ़ जाता है। जैसे ही बाइक सवार निकलते हैं, अचानक कुत्ते उनके पीछे दौड़ लगाने लगते हैं। इससे बैलेंस बिगडऩे और लोगों के घायल होने का खतरा बना रहता है। वहीं चारपहिया वाहनों की चपेट में आने के बाद घायल कुत्ते और ज्यादा खूंखार हो जाते हैं। आवारा कुत्ते छोटे बच्चों को कब झपट्टा मारकर नोंच डालेंगे, इसका भी खतरा बने रहता है। पूर्व में ऐसा दर्दनाक मंजर छत्तीसगढ़ में सामने आ चुका है।

चिन्हांकित फीडिंग प्वाइंट किसी काम के नहीं

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शहर के सभी 48 वार्डों में कुत्तों के लिए फीडिंग प्वाइंट चिन्हांकित किए गए हैं। नगर निगम ने इन स्थलों पर बोर्ड भी लगाया है। नागरिकों से निगम प्रशासन ने चिन्हांकित स्थलों पर ही आवारा कुत्तों को भोजन कराने का आग्रह किया है, ताकि शहर में स्वच्छता बनी रहे और कुत्तों का समूह न भटके, लेकिन निगम के द्वारा बनाए गए फीडिंग प्वाइंट पर कुत्ते भोजन करते हों, ऐसा देखने को नहीं मिला है।

सुप्रीम कोर्ट की ये है गाइडलाइन

स्कूल और अस्पताल परिसरों को आवारा कुत्तों से मुक्त करना है, बाड़ा बनाना है। बधियाकरण अभियान चलाना है। कुत्तों को खाना खिलाने वाले लोगों, एनजीओ के लिए फीडिंग जोन हो। डॉग शेल्टर हाउस की व्यवस्था करना अनिवार्य है।

अंतिम रेबीज का इंजेक्शन लगने के बाद वृद्ध कीे मौत

आवारा कुत्ते के काटने से जख्मी सरगुजा जिला के दरिमा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम नवापारा, सुमेलापारा निवासी घूरसाय लकड़ा 63 वर्ष की इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतक के पुत्र अजीत कुमार ने बताया है कि, बीते 12 मार्च को उसके पिता पर गांव में ही आवारा कुत्ते ने हमला कर दिया था। कुत्ते के काटने से वृद्ध के दाहिने हाथ में अंगूठा के पास, बाएं हाथ में कोहनी के नीचे और पेट में जख्म उभर गया था। घायल का प्रारंभिक इलाज स्वजन ने नवानगर स्वास्थ्य केन्द्र में कराया। यहां मरहम पट्टी के बाद एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाया गया। इंजेक्शन खत्म होने पर 2 इंजेक्शन दरिमा स्वास्थ्य केंद्र में उन्होंने लगवाया था। अंतिम इंजेक्शन 13 मई को लगना था। इसके पहले वृद्ध की तबियत बिगड़ गई, और स्वजन उन्हें मेडिकल कॉलेज संबद्ध अस्पताल में 6 मई को लेकर पहुंचे, यहां जांच, उपचार के बीच चिकित्सक ने निर्धारित तिथि के पहले रेबीज निरोधक इंजेक्शन का अंतिम डोज लगवा दिया था। इलाज के दौरान 7 मई को सुबह 8.30 बजे उसकी मौत हो गई। एंटी रेबीज इंजेक्शन का पूरा डोज समय पर लगवाने के बाद भी वृद्ध की किन परिस्थितियों में तबियत बिगड़ी, इसे जानने के लिए चिकित्सक ने मृतक के शव का पोस्टमार्टम करवाया है। पुलिस ने शव को स्वजन के सुपुर्द कर दिया है।

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