बलरामपुर। जिले की पुलिस मौतों से संबंधित कई सवालों से जूझ रही है। मौत की गुत्थी सुलझने की जगह और उलझती जा रही है। गुरु चंद मंडल की थाने में मौत ने फिर से नए सिरे से इन मौतों पर सवाल खड़े कर दिए, दु:खद तथ्य यह है कि यहां बस सवाल ही सवाल है जवाब नहीं।
उल्लेखनीय है कि गुरु चंद मंडल की बलरामपुर थाने में मौत हो गई थी उसकी पत्नी रीना गिरी अपने घर संतोषी नगर से लापता हो गई थी, जिसकी सूचना थाने में दी गई थी। पुलिस ने पूछताछ के लिए उसे थाने में लाया था यहां बाथरूम में रहस्यमय ढंग से उसकी लाश पाई गई थी। इधर लापता रीना गिरी की लाश गढ़वा झारखंड के नदी में संदिग्ध अवस्था में पाई गई थी, जिसके हाथ, पीठ की ओर बंधे हुए थे, रीना के मौत की जांच अब झारखंड पुलिस कर रही है, किंतु गुरु चंद मंडल की मौत पर पड़ी धूल और गहरी होती जा रही है। आखिर थाने में जहां 24 घंटे पुलिस तैनात रहती है वहां गुरु चंद मंडल कैसे मर गया और उसकी लापता पत्नी गढ़वा कैसे पहुंच गई, उसे किसने मारा। इसके अलावा पहले हुई तीन और मौतें भी सवालों के घेरे में है। लोग बलरामपुर पुलिस के अनुसंधान, कौशल क्षमता को भी सवालों के घेरे में ले रहे हैं। बजरंग दल के जिला सहसंयोजक सुजीत स्वर्णकार तथा किरण काशी की एक साथ संदिग्ध मौत के रहस्य पर से आज तक पर्दा नहीं उठा है। इसके लिए जिम्मेदारों ने एसआईटी का गठन भी किया था। कई महीने बीत जाने के बाद भी लोगों को परिणाम का इंतजार है। इसी प्रकार एक और मौत धर्मेंद्र केसरी नामक व्यापारी की हुई थी। इसका शव  सोनहारा जंगल में जले हाल में पाया गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी सामने आया, लोगों के बीच पेट में जहर के अंश पाने की चर्चा हुई, पुलिस ने इसे आत्महत्या का मामला ठहराया। इसके बाद भी सवाल अपनी जगह आज भी खड़ा है अगर उसने जहर खाया तो फिर आग लगाने की जरूरत क्यों पड़ी, और जब आग लगी थी तो जहर सेवन क्यों किया? पुलिस के पास इसका सकारात्मक जवाब नहीं है। लोगों का कहना है धर्मेंद्र की सुयोजित तरीके से हत्या की गई है, पुलिस इस मामले में अपराधियों को बचा रही है। इतने गंभीर आरोपों और हत्या के सवालों से घिरी बलरामपुर पुलिस को अपना दामन बेदाग साबित करना किसी चुनौती से कम नहीं है। जनता का कहना है कि पुलिस सार्वजनिक तौर पर इन मौतों पर अपना स्पष्टीकरण जारी करे या फिर अपनी अक्षमता स्वीकार करे। क्षेत्र में आपराधिक गतिविधियां चरम पर है। झारखंड से लगा होने के कारण यह क्षेत्र निरंतर सुरक्षा संबंधी सवालों से जूझता रहा है, किंतु यहां की पुलिस ने कभी भी इसे गंभीरता से नहीं लिया। यहां कहां से आकर लोग बसे हैं इसका भौतिक सत्यापन करने की जहमत पुलिस नहीं उठाती है। ऐसे में आम लोगों का पुलिस पर उंगली उठाना नाजायज नहीं लगता है। न जाने कितने अधिकारी आए और गए किंतु पुलिस की कार्य कुशलता में कोई बदलाव नहीं हुआ। बहरहाल गुरु चंद मंडल की थाने में मौत और रीना गिरी की लाश झारखंड में संदिग्ध हालत में मिलना पुलिस के लिए गले की फांस बनी हुई है। पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर यहां बस सवाल ही सवाल हैं, जवाब कुछ नहीं।

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