कई कलेक्टर आए और चले गए, न्याय की उम्मीद लिए भटक रहा ग्रामीण

अंबिकापुर। सरगुजा जिला के सीतापुर तहसील क्षेत्र अंतर्गत का एक ग्रामीण अपने पूर्वजों की भूमि प्राप्त करने के लिए चक्कर काट रहा है। उसे इस जमीन से मोह इसलिए है क्योंकि उसका बचपन और युवावस्था इसी जमीन की मिट्टी की सौंधी महक के बीच बीता है। जब वह सोचने-समझने लायक हुआ तो उक्त जमीन पर खेती किया, अचानक पैतृक भूमि के 9 दावेदार रिकार्ड में शामिल हो गए, और उक्त जमीन इनके नाम दर्ज हो गया। कई कलेक्टर आए और चले गए, लेकिन वह पैतृक भूमि में होने वाली खेती और इससे मिलने वाले लाभ से वंचित है, जबकि सरगुजा संभागायुक्त ने पैतृक सेटेलमेंट की भूमि को वास्तविक भूमि स्वामी के राजस्व रिकार्ड में दर्ज करने का आदेश 31 दिसम्बर 2024 को दिया है। कलेक्टर के जनदर्शन में आवेदन देते प्रौढ़ अवस्था पार कर रहा ग्रामीण प्रशासन उसका हक वापस दिलाएगा, इस आस में पुन: सोमवार को कलेक्टोरेट में चक्कर काटते नजर आया। ग्रामीण का कहना है कि सीतापुर पुलिस भी धन-बल से संपन्न लोगों के आगे नत है, और उसे भगा दिया जाता है।

सीतापुर तहसील अंतर्गत आने वाले ग्राम हरदीसांड़ के दूबराज घासी 53 वर्ष ने बताया कि गांव में उसका पैतृक सेटेलमेंट की भूमि कुल 12 खसरा नम्बर में रकबा 4.655 हेक्टेयर है, जिस पर वह बचपन से काबिज होकर खेती-किसानी करते आ रहा था। इसे पालूराम पिता रामेश्वर 45 वर्ष, श्याम प्रसाद पिता रामेश्वर 35 वर्ष, शशि कुमार पिता रामेश्वर 30 वर्ष, शंभू पिता रामेश्वर 25 वर्ष, भुनेश्वर पिता जगमोहन 40 वर्ष, भुनउ पिता जगमोहन 35 वर्ष, सर्वेश्वर पिता जगमोहन 35 वर्ष, सुभाष पिता जगमोहन 32 वर्ष, चंदरदेव पिता जगमोहन 30 वर्ष सभी निवासी ग्राम बेलगांव थाना व तहसील सीतापुर वर्तमान में अपना नाम चढ़वा लिए हैं। इसका रिकार्ड दुरूस्त कराने के लिए वह आयुक्त सरगुजा संभाग के यहां अपील किया था, जिसमें उसके पक्ष में रिकार्ड दुरूस्त करने के लिए तहसीलदार सीतापुर को आदेशित किया गया है। इसके बाद भी तहसील कार्यालय के द्वारा रिकार्ड दुरूस्त करने की कार्रवाई नहीं की गई है। आरोप है उपरोक्त भूमि पर अनावेदकों के द्वारा हल्का पटवारी से मिलीभगत करके पिछले कई वर्षों से किसान क्रेडिट कार्ड बनवाकर खाद, बीज का लाभ लिया जा रहा है और आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित ग्राम पेटला, तहसील सीतापुर में धान बेचा जा रहा है, उसकी जानकारी में उक्त भूमि पर इनका कभी कब्जा नहीं रहा है। ऐसे में ये अनाधिकृत रूप से समर्थन मूल्य में धान बिक्री करने में लगे हैं। दूबराज ने किसान क्रेडिट कार्ड व धान बिक्री का पंजीयन निरस्त करने और धोखाधड़ी करके शासन से राशि प्राप्त करने वालों के विरूद्ध कार्रवाई की मांग की है।

संभागायुक्त ने तहसीलदार को दिया ये आदेश
कार्यालय आयुक्त, सरगुजा संभाग ने तहसीलदार सीतापुर को इस मामले में 31 दिसम्बर 2024 को आदेशित किया है कि अनावेदकों को कुल खसरा नंबर 12, रकबा 4.665 हेक्टेयर भूमि किस माध्यम से प्राप्त है, इसका नामांतरण पंजी 1962 का अवलोकन करने पर कहीं इन्द्राज नहीं पाया गया है। उक्त वाद भूमि में दूबराज पिता भूखा का कब्जा है एवं पूर्व से उनके पूर्वजों का रहा है। अनावेदकगणों का कभी भी उक्त भू-खण्डों पर कब्जा नहीं रहा है। आपको आदेशित किया जाता है कि आपके जांच प्रतिवेदन के आधार पर न्यायालय में प्रकरण दर्ज कर आवेदक के नाम से अभिलेख अद्यतन करने की कार्रवाई करना सुनिश्चित करें। आदेश देने के 11 माह बाद भी ग्रामीण के नाम पर न तो भूमि हो पाई है और न ही वह इसमें खेती करके समर्थन मूल्य पर धान बिक्री का लाभ ले पा रहा है।

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