शिक्षा न्याय आंदोलन के तहत पूर्व उपमुख्यमंत्री के नेतृत्व में निकली विशाल जिला स्तरीय रैली
अंबिकापुर। युक्तियुक्तकरण की नई नीति के विरोध में कांग्रेस के प्रदेशव्यापी चरणबद्ध आन्दोलन ‘शिक्षा-न्याय आंदोलन के तहत शुक्रवार को जिला कांग्रेस कमेटी ने जिला स्तरीय रैली निकालकर जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय का घेराव किया। राजीव भवन से पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के नेतृत्व में कांग्रेस की विशाल जिला स्तरीय रैली रवाना हुई। रैली में पूर्व केबिनेट मंत्री अमरजीत भगत भी शामिल हुए। भारी बारिश के बावजूद कांग्रेस ने इस जिला स्तरीय रैली-और घेराव के लिए जिले के सभी सांगठनिक विकासखंडों से पदाधिकारी और कार्यकर्ता जुटे। कांग्रेस की विशाल रैली को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में काफी संख्या में पुलिस बल तैनात किए गए थे। मुख्य प्रवेश द्वार को बंद करके पुलिस इनके आने का इंतजार कर रही थी। इसके बाद भी कांग्रेसजन पुलिस से संघर्ष करते गेट के अंदर प्रवेश करने में सफल हो गए और जिला शिक्षा को प्रदेश के राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा।
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने टीएस सिंहदेव ने कहा कि सरकार समाजिक दायित्व निर्वहन करने के बजाय पैसे बचाने में लगी है। इसी उद्देश्य से युक्तियुक्तकरण की नई नीति को लाया गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा में कुल बजट का 6 प्रतिशत और स्वास्थ्य में 3 प्रतिशत खर्च करना चाहिए। इस बजट में सरकार ने इससे कम राशि शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में रखा है। अब सरकार वो पैसे उपलब्ध कराने की स्थिति में नहीं है तो इस बजट में भी कटौती की जा रही है। विधानसभा में तत्कालीन शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने प्रदेश में 33 हजार शिक्षकों के भर्ती की बात कही थी, लेकिन अब सरकार अपनी नई नीति के आड़ में 45 हजार शिक्षकों के पद समाप्त करने जा रही है जो बेहद निराशाजनक है। उन्होंने कहा नई नीति में अब प्राइमरी स्कूल में 1 से 5 तक की कक्षा को पढ़ाने के लिए एक प्रधान पाठक और 1 शिक्षक का पद दिया गया है। प्रधानपाठक पढ़ाने के साथ ही स्कूल का प्रशासनिक कार्य भी करते हैं। ऐसे में कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को, जिन्हें 18 विषय पढ़ाए जाते हैं, उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता का क्या होगा। इस दौरान अजय अग्रवाल, डॉ. अजय तिर्की, शफी अहमद, डॉ. जेपी श्रीवास्तव, द्वितेन्द्र मिश्रा, राकेश गुप्ता, विक्रमादित्य सिंहदेव, हेमंत सिन्हा, विनय शर्मा, तिलक बेहरा, प्रदीप गुप्ता, बलराम यादव, वायुश्री सिंह, मधु सिंह, अनीमा केरकेट्टा, सीमा सोनी, अमित सिंहदेव, सिद्धार्थ सिंहदेव, राजनाथ सिंह, ओम प्रकाश सिंह, रणविजय सिंह, विकल झा, आशीष जायसवाल, शुभम जायसवाल सहित सैकड़ों की संख्या जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी, कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
आबादी के एक तराजू में तौलते हुए नया सेटअप लाना अनुचित-भगत
नई नीति को औचित्यहीन और दोषपूर्ण बताते हुए पूर्ण केबिनेट मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि, ग्रामीण अंचलों में स्कूल खोल, शिक्षकों की भर्ती कर इतने लंबे अर्से में किए गए शिक्षा के प्रचार-प्रसार पर इस कदम से पानी फिर जाएगा। सरकार अपने घोषणापत्र में शिक्षा के गुणवत्ता की बात करती है और यथार्थ में स्कूलों को बंद कर रही है, शिक्षकों के पद समाप्त कर रही है, जिसे समाज स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि शहरी और ग्रामीण आबादी में जमीन आसमान का अंतर है। इन क्षेत्रों में इसी अंतर को ध्यान रख स्कूल खोले गए और शिक्षकों का सेटअप तैयार किया गया। कई स्कूल सूदूर और वनांचल में स्थित हैं। वहां का सेटअप इस बात को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया, लेकिन आज सरकार एक अव्यवहारिक निर्णय लेकर सभी क्षेत्रों के स्कूलों को आबादी के एक तराजू में तौलते हुए नया सेटअप ला रही है जो अनुचित है।
डबल इंजन के बाद भी आर्थिक स्रोत का प्रबंध नहीं-पाठक
जिला कांग्रेस अध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार आर्थिक स्त्रोतों का प्रबंध नहीं कर पा रही है, जबकि उसने डबल इंजन के नाम पर वोट मांगा था। इसका खामियाजा प्रदेश के शासकीय स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब परिवारों के बच्चों को भुगतना पड रहा है। युक्तियुक्तकरण के नाम पर स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों का विसंगतिपूर्ण एवं अव्यवहारिक तबादला किया जा रहा है। महिला शिक्षकों का दूसरे जिलों में तबादले की खबर है जो कि बेहद गंभीर है।
राज्यपाल के नाम 5 सूत्रीय मांग का ज्ञापन सौंपा
कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ के महामहिम राज्यपाल रमेन डेका के नाम पर 5 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा, जिसमें युक्तियुक्तकरण की नई नीति को वापस लेने का अनुरोध किया गया है। अतिशेष के नाम पर शिक्षकों के अव्यवहारिक एवं विसंगतिपूर्ण तबादलों को समाप्त करने की मांग की गई है। नई नीति के नाम पर बंद एवं समायोजित स्कूलों को पुन: प्रारंभ करने का अनुरोध किया गया है। 2008 के नीति को आधार बनाते हुए सरकार के वायदे के अनुरुप 57 हजार शिक्षकों के भर्ती की मांग की गई है, साथ ही घोषणापत्र के वायदे के अनुरुप शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की मांग की गई है।
जनता और बेरोजगारों के साथ वादाखिलाफी
प्रदेश सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन के कारण शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में पहले से ही मानक स्तर से कम बजट आबंटित किया गया है। अब उसमें और कटौती के उद्देश्य से सरकार नई युक्तियुक्तकरण नीति लेकर आई है, जिसके कारण प्रदेश के शासकीय स्कूलों में शिक्षकों के 45 हजार पद समाप्त होने के साथ ही साथ 10643 स्कूल बंद हो जाएंंगे। इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। कांग्रेस का दावा है कि नई नीति के वजह से नया सत्र प्रारंभ होने के साथ ही शिक्षण कार्य प्रभावित होना प्रारंभ हो गया है। भाजपा ने जहां अपने घोषणापत्र में राज्य में 57 हजार शिक्षकों की भर्ती के साथ ही नए स्कूलों को खोलने की बात कही थी, वहीं युक्तियुक्तकरण की नई नीति लाकर प्रदेश की गरीब जनता के साथ ही बेरोजगारों के साथ वादाखिलाफी करने का काम सरकार कर रही है।

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