जिला पंचायत उपाध्यक्ष आदित्येश्वर शरण सिंह देव ने कलेक्टर सरगुजा को पत्र लिख कर कहा है जिला प्रशासन द्वारा सरगुजा जिले के उदयपुर जनपद में स्थित पीईकेबी-2 कोयला खदान क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की कार्रवाई की जानकारी उन्हें वेब पोर्टल व अन्य समाचार माध्यमों से मिली है। यह भी खबर आई है कुछ लोगों को पुलिस की निगरानी एवं हिरासत में रखा जा रहा है। आदित्येश्वर शरण सिंह देव ने पत्र में कलेक्टर सरगुजा से कहा है कि क्षेत्र में परसा कोल ब्लॉक (पीकेबी), जो कि पीईकेबी-2 के साथ लगी हुई है, को लेकर आंदोलन की स्थिति उत्पन्न हुई थी। इसके उपरांत 2022 में छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्रस्ताव भी पारित किया गया था। वर्तमान में जिला प्रशासन द्वारा की कार्रवाई से क्षेत्र में असमंजस की स्थिति उत्पन्न है। उन्होंने पांच बिंदुओं को संज्ञान में लेेने का आग्रह करते हुए उक्त कार्रवाई को लेकर क्षेत्र में स्थिति स्पष्ट करने की बात कही है।

इन बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह
*परसा कोल ब्लॉक (पीकेबी) एवं पीईकेबी-2 की परिसीमा का सीमांकन किया जाए, ताकि प्रभावित क्षेत्र के निवासियों को स्पष्ट हो कि जिला प्रशासन द्वारा किस वन क्षेत्र में कार्रवाई की जा रही है। इससे असमंजस की स्थिति कम होगी।

* प्रभावित क्षेत्र के निवासियों से संवाद स्थापित कर उन्हें विश्वास में लेकर जिला प्रशासन द्वारा कार्रवाई करना उचित होगा। साथ ही प्रभावित क्षेत्र के निवासियों को पुलिस की निगरानी या हिरासत में ना रखा जाए, ताकि स्थानीय लोगों को यह महसूस ना हो कि जिला प्रशासन द्वारा दबाव बनाकर कार्रवाई की जा रही है। यह लोकतांत्रिक भावनाओं के अनुरूप होगा।

* विस्थापित ग्रामीणों को पुनर्वास के कारण कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, इसके निराकरण के साथ ही पुर्नवास क्षेत्र के मुलभूत सुविधाओं पर भी जिला प्रशासन द्वारा ध्यान दिया जाए।

* पीईकेबी-2 खदान से उत्पन्न होने वाले रोजगार में प्रभावित क्षेत्र एवं स्थानीय निवासियों को ही रोजगार दिया जाए। साथ ही पहले से काम करने वालों को जल्द वापस रोजगार उपलब्ध कराया जाए।

* यह पूरा क्षेत्र हसदेव अरण्य क्षेत्र अंतर्गत आता है, जिसे छत्तीसगढ़ राज्य के फेफड़े के रूप में संबोधित किया जाता है। इसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए न सिर्फ स्थानीय निवासी बल्कि राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों के लोग भी आवाज उठाते रहते हैं। ऐसी स्थिति में इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि केवल उतनी ही कार्रवाई उस क्षेत्र में की जाए, जितनी आवश्यकता हो, ताकि भविष्य को देखते हुए पर्यावरण सुरक्षित रहे।

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