चौतरफा पुलिस बल की मौजूदगी से ग्रामीणों का आना-जाना हुआ दूभर
आंदोलन करने वाले कुछ ग्रामीणों को घर से उठाकर अपने साथ ले गई पुलिस

गिरिजा ठाकुर

अंबिकापुर/उदयपुर। विकास अपने साथ विनाश लेकर आकर आता है, इस कहावत को आज चरितार्थ होते उदयपुर वन परिक्षेत्र के लोगों ने अपनी आंखों से देखा। स्थिति ऐसी रही कि जंगल बचाने के लिए सालों से संघर्ष कर रहे लोगों की स्थिति बंधक जैसी बन गई। आंदोलन करने वाले ग्रामीणों को घर से उठाकर पुलिस ले गई। यह सब आनन-फानन में ऐसे हुआ कि किसी को कुछ भी समझ में नहीं आया। सरकार बदलने के बाद ऐसा कहर टूट पड़ेगा, इसकी कल्पना शायद ही इन्होंने की हो। पुलिस का पहरा इतना सख्त था कि परिंदा भी पर न मारने पाए। यहां कोल परियोजना को साकार करने के लिए 91 हेक्टेयर में लगे 15 हजार 307 पेड़ों की बलि दी जानी है।


बता दें कि राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को आबंटित और अदानी कंपनी द्वारा संचालित कोल परसा ईस्ट एवं केते बासेन कोल परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई का काम जोर-शोर से चल रहा है। गुरूवार को सुबह से ही हरिहरपुर, साल्ही, घाटबर्रा, फत्तेपुर, बासेन और परसा में पुलिस बल, वन अमले व राजस्व अमले की चहलकदमी प्रारंभ हो गई थी। खदान की ओर जाने वाले हर रास्ते पर पुलिस बल तैनात कर दिए गए थे। साल्ही मोड़ व बासेन से परसा की ओर जाने वाले रास्ते में चेक पोस्ट बनाकर हर आने-जाने वाले लोगों से पूछताछ किया जाने लगा। कौन शख्स जंगल की ओर जा सकता है, इसकी तहकीकात आने-जाने वाले लोगों से चल रही थी। पूरी तरह आश्वस्त होने के बाद ही कियह सख्श जंगल की ओर नहीं जाएगा, उसे आगे जाने दिया गया। शेष लोगों को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही थी।

जंगल क्षेत्र की विनाशलीला सुबह 10 बजे हुई शुरू
गुरूवार की सुबह करीब 10 बजे सैकड़ों की संख्या में वन, राजस्व व पुलिस के अमले की मौजूदगी में पेड़ों की कटाई के लिए लोग अंदर घुसे और प्रकृूति की विनाशलीला का क्रम शुरू हुआ। पेड़ों की कटाई का भनक लगते ही आंदोलनकारी व प्रभावित ग्राम के ग्रामीण धरना स्थल हरिहरपुर व पेड़ कटाई स्थल घाटबर्रा, पेंड्रामार के जंगल जाने लगे। पुलिस बल की लाख कोशिशों के बावजूद ग्रामीण कटाई स्थल तक पहुंच कर पेड़ों की कटाई रोकने की कोशिश किए परंतु उन्हें नाकामी ही हाथ लगी।

बातचीत के नाम पर इन्हें उठाकर ले गई पुलिस
कुछ आंदोलनकारियों रामलाल, जयनंदन सरपंच घाटबर्रा, ठाकुर राम व अन्य को पुलिस उनके घर से बातचीत के नाम पर उठाकर ले गई। आंदोलनकारियों के लीडरों को पुलिस द्वारा उठाकर ले जाने का वीडियो बनाकर ग्रामीणों ने सोशल मीडिया पर वायरल किया है, जिसमें साफ नजर आ रहा है कि उन्हें बलपूर्वक, जबरन ले जाया गया है। धरना स्थल हरिहरपुर में आंदोलनरत ग्रामीणों ने पेड़ों की कटाई व आंदोलनकारियों की गिरफ्तारी का जमकर विरोध करते हुए इनके तत्काल रिहाई की मांग की है।

चार कक्षों से काटे गए पेड़ों की हो रही गिनती-लकड़ा
उत्पादन के रेंजर लाल चंद लकड़ा ने बताया कि कक्ष क्रमांक 2003, 2004, 2005 एवं 2006 में चार अलग-अलग टीमों के द्वारा पेड़ कटाई की जा चुकी है। काटे गए पेड़ों की गिनती का कार्य चल रहा है।

 

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