बिना शासन की अनुमति के रखा विश्वविद्यालय इंजीनियरिंग कॉलेज नाम

अंबिकापुर। केबिनेट मंत्री रामविचार नेताम ने नोटसीट के माध्यम से मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री, तकनीकी मंत्री को विश्वविद्यालय इंजीनियङ्क्षरग कॉलेज को पूर्व नाम शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज अंबिकापुर करते हुए सीआईटी बनाने का प्रस्ताव भेजा है। शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज अंबिकापुर की स्थापना वर्ष 2010 में की गई थी। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद से मान्यता नहीं होने के कारण इसे वर्ष 2010 में अस्थायी रुप से संचालन हेतु सरगुजा विश्वविद्यालय को हस्तांतरित किया गया, क्योंकि किसी भी विश्वविद्यालय को बिना एआइसीटीई मान्यता के कॉलेज संचालित करने की अनुमति एआइसीटीई द्वारा दी जाती है। इसके बाद तत्कालीन विश्वविद्यालय द्वारा बगैर शासन की अनुमति कॉलेज का नाम विश्वविद्यालय इंजीनियरिंग कॉलेज अंबिकापुर कर दिया। वर्ष 2019 में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा उच्च शिक्षा विभाग तथा तकनीकी शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय समिति गठित की गई, जिसने इस महाविद्यालय को शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज अंबिकापुर करने का निर्णय लिया था, इसके बावजूद आज दिनांक तक यह समस्या लंबित है। समस्या विद्यमान रहने से अध्ययनरत छात्राओं को शिक्षण शुल्क का लाभ नहीं मिल पा रहा है। अंबिकापुर में शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के छात्रों के कल्याण हेतु एलईडब्ल्यू जोन अंतर्गत की गई है। वर्तमान में कॉलेज में पांच संकाय में बीटेक और एमटेक की कक्षाएं संचालित की जा रही हंै।

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