हत्याकांड की गुत्थी सुलझाकर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा

जरही। हत्या के मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ने बातचीत नहीं करने से क्षुब्ध होकर हत्या की स्वीकारोक्ति की है। हत्या के बाद आरोपी कुल्हाड़ी को जमीन में गाड़कर रखा था, जिसे उसकी निशानदेही पर बरामद कर लिया गया है। पुलिस ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
जानकारी के मुताबिक उमाशंकर राजवाड़े पिता मानसाय राजवाडे 34 वर्ष निवासी सोनगरा सारसताल पारा ने पुलिस थाना भटगांव में रिपोर्ट दर्ज कराया कि 16 नवंबर की रात वह खाना खाकर अपने घर में सो गया था। 17 नवंबर को अलसुबह करीब 04.30 बजे वह अलग रहने वाले छोटे भाई रामेश्वर राजवाड़े के घर रोने एवं शोरगुल की आवाज सुनकर अपनी पत्नी के साथ गया तो उसके भाई रामेश्वर की अज्ञात व्यक्ति सोते समय खाट पर ही धारदार हथियार से सिर, चेहरे में प्रहार कर हत्या कर दिया था। रिपोर्ट पर पुलिस ने धारा 302 का अपराध पंजीबद्ध किया था और आरोपी के तलाश में लगी था। पुलिस अधीक्षक सूरजपुर व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक  सूरजपुर के दिशानिर्देश एवं पुलिस अनुविभागीय अधिकारी अनुभाग प्रतापपुर के मार्गदर्शन में निरीक्षक फर्दीनन्द कुजूर एवं थाना टीम ने कई संदेहियों से बारीकी से पूछताछ की और मुख्य आरोपी आलम साय पिता स्व. बिहारीसाय राजवाड़े निवासी सोनगरा सारसताल पारा तक पहुंची। पूछताछ में संदेही ने अपराध कबूल किया। आरोपी ने पुलिस को बताया कि मृतक रामेश्वर से उसका अच्छा संबंध था। दोनों का एक-दूसरे के घर आना-जाना था। कुछ दिनों से रामेश्वर उससे बातचीत नहीं कर रहा था। कई बार बातचीत करने का प्रयास किया किंतु वह उससे बातचीत नहीं कर रहा था। इसके बाद से ही वह उसे मारने की फिराक में था। 16 नवंबर की रात वह मृतक के घर के पीछे के दरवाजा से घर आंगन में घुसा और मृतक के कमरे में जाकर सो रहे रामेश्वर पर टांगी से सिर में तीन-चार बार मारा और बाहर निकलकर टंगिया को कुछ दूर ले जाकर जमीन में गाड़ दिया था। टंगिया को पुलिस ने जमीन से खोदकर निकाला। कार्रवाई में निरीक्षक फर्दीनन्द कुजूर, उप निरीक्षक अश्विनी पांडेय, सउनि जीपी यादव, लालचंद कुजूर, प्रधान आरक्षक सुन्दर लाल, पूरनचंद राजवाड़े, करन सिंह नेताम, आरक्षक मनोज जायसवाल, विनोद प्रताप सिंह, संतोष जायसवाल, भोलाशंकर राजवाड़े, मोहम्मद नौशाद, प्रभाकर सिंह, महिला प्रधान आरक्षक सरिता कुजूर, महिला आरक्षक आशा लकड़ा, प्रीति, हेमा, सुनिला सक्रिय रहे।

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