गांव से आने वाली महिलायें और छोटे सब्जी विक्रेता सड़क के किनारे बैठने मजबूर

अंबिकापुर। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी पौनी पसारी योजना अंबिकापुर में मजाक बनकर रह गई है। आकाशवाणी चौक स्थित पौनी पसारी परिसर की तस्वीर देखकर कोई नहीं कह सकता कि यह बाजार ग्रामीण महिलाओं और छोटे सब्जी विक्रेताओं के लिए है, लेकिन अंदर कुछ सब्जी विक्रेताओं का बड़ा कब्जा देखने को मिल जायेगा।

सरकार ने लाखों रुपये खर्च करके पक्के शेड बनवाए ताकि गांव से आने वाले किसान और महिला विक्रेता धूप-बारिश से बचकर सम्मान से सब्जी-भाजी बेच सकें। हकीकत इसके विपरीत है। शेड के आसपास दर्जनों बाइक की पार्किंग और दुकान लगाने के लिये बनाये गये चबूतरे में तिरपाल से ढंककर रखे सामानों का नजारा देखने को मिल जायेगा। गांव से सब्जी लेकर आने वाले पौनी पसारी परिसर के बाहर मुख्य मार्ग के किनारे फुटपाथ और सड़क के किनारे बैठकर सब्जी बेच रहे हैं, जिन पर निगम का कहर समय-समय पर टूटते रहता है। दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि शेड के अंदर बैठने जैसे हालात नहीं हैं, ऊपर से वहां कोई आता-जाता नहीं है। गरीब सड़क पर बैठें तो सामान जब्ती का डर, अंदर बैठें तो बिक्री नहीं, ऐसे में जाएं तो जाएं कहां? शेड में कुछ लोगों का कब्जा भी देखने को मिल जायेगा। यह स्थल वाहन पार्किंग स्थल से कमतर नजर नहीं आता है, जिससे ग्राहकों को आने-जाने में दिक्कत होना लाजिमी है। बारिश में पानी के भराव की समस्या भी बनती है। इस अव्यवस्था से एक तरफ ग्रामीण सब्जी विक्रेताओं को नुकसान हो रहा है, वहीं सड़क पर दुकानें लगने से आकाशवाणी चौक पर जाम की स्थिति बन रही है। इस मार्ग से आने-जाने वालों को कई बार जाम जैसी स्थिति का सामना करना पड़ता है। पूर्व में इस चौक में कई बड़े हादसे भी हो चुके हैं।

असामाजिक हरकतों का भी है केंद्र
पौनी पसारी के आसपास ठेले-गुमटियों में दुकानों का संचालन करने वाले लोगों का कहना है कि अगर यहां सब्जी बाजार व्यवस्थित तरीके से लगने लगे, तो उनकी भी ग्राहकी बढ़ेगी, लेकिन यहां तो न जाने कहां-कहां के लोगों ने चबूतरे को घेरकर कब्जा कर लिया है। असामाजिक हरकतों को भी बल मिल रहा है, तरह-तरह के लोगों का आना-जाना यहां लगे रहता है। लाखों का शेड जिस उद्देश्य को लेकर बनाया गया था, इसे साकार करने की जरूरत भी जिम्मेदार महसूस नहीं कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले सब्जी विक्रेता धूल-धूप झेलते हैं और शेड के आसपास अघोषित पार्किंग का नजारा देखने को मिलता है।

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