बैठक में अपराध के हर पहलुओं पर दिए निर्देश, भाजपा ने कहा-ताश की पत्ती जैसा फेंटकर पोस्टिंग होगी तो क्या होगा

गिरजा ठाकुर
अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ में कानून व्यवस्था मजाक बनकर रह गई है। पहले लोगों में वर्दी का खौफ स्पष्ट नजर आता था, वर्तमान में हालात ऐसे हैं कि थाने में घुसकर राह चलते पुलिस कर्मियों से बदसलूकी, मारपीट जैसी घटनाएं आम हो गई हैं। अपराधी बेखौफ होकर कहीं भी सामान्य लोगों को धमकाते-चमकाते देखने को मिल जाएंगे। ऐसे वाक्यातों के सामने आने के बाद शासन के गृह विभाग की होती किरकिरी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कान खड़े कर दिए हैं और वे प्रदेश भर के कलेक्टरों व पुलिस अधीक्षकों की बैठक लेकर ऐसी वारदातों में रोक लगे, इसके लिए प्रशासनिक व्यवस्था को दुरूस्त करने के प्रयास में लगे हैं। इधर भाजपा के प्रवक्ता केदार गुप्ता ने मुख्यमंत्री द्वारा पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों की मीटिंग को लेकर कहा है कि मीटिंग से कुछ नहीं होगा। जमीन पर उतरकर काम करना होगा। एनएसयूआई का नेता सामूहिक बलात्कार में शामिल है। ताश की पत्ती जैसा फेंटकर पोस्टिंग होगी तो क्या होगा।
प्रदेश की स्थिति पर नजर डालें तो राजधानी व न्यायधानी में बड़ी-बड़ी घटनाएं हो रही हैं। इधर अंबिकापुर में कांग्रेस सरकार के आने के बाद कभी थाना परिसर में तो कभी सार्वजनिक स्थल पर पुलिस की पिटाई करने में असामाजिक तत्व लगे हैं। ऐसे में कानून व्यवस्था को लेकर निरंतर सवाल उठ रहे हैं। प्रदेश में कानून व्यवस्था नाम की चीज नहीं रह गई है, जो सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। जनप्रतिनिधियों के भी क्या कहने हैं। हाल में कोरिया जिले में दुर्गा पूजा के मौके पर भक्ति कार्यक्रम के बजाए फूहड़ता परोसने का मामला सामने आया। नचनियों पर खूब नोट बरसे, जनता के प्रतिनिधि अपनी मर्यादा भूल गए। मामला सुर्खियों में आया तो भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अनुराग सिंहदेव ने अपने बयान में इनकी अच्छी-खासी खिंचाई की। शक्ति स्वरूपा जिस मातारानी की नौ दिनों तक आराधना की गई, वहीं ऐसे कार्यक्रम को सार्वजनिक परोसा गया, जिससे पूरे प्रदेश में नवगठित जिले के नेताओं की थू-थू होने लगी। कोरिया जिले में ही युवक कांग्रेस के नेता व साथियों के द्वारा नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया। ऐसे में समझा जा सकता है नारी सम्मान का कितना ख्याल क्षेत्र के जनप्रतिनिधि रख रहे हैं। सरगुजा जिले में पुलिस निशाने पर रही है। जब देखो तब ड्यूटी में तैनात पुलिस कर्मी को कोई न कोई आक्रोश का शिकार बना रहा है। दहशतगर्दों की तूती बोल रही है। ऐसे हालातों के सामने आने और सरकार को विपक्ष के द्वारा निशाने में लेने के बाद सूबे के मुखिया भूपेश बघेल को पुलिस कप्तानों और कलेक्टरों की खिंचाई करने मजबूर होना पड़ा। उन्होंने पुलिस अधीक्षकों को हिदायत दी है कि वे स्वयं रात्रि गश्त में निकलें। उन्होंने अपराधिक वारदातों पर रोक लगाने नशे की जड़ तक पहुंचने कहा है ताकि नशे की सामग्री की उपलब्धता कहीं न रहे। अवैध शराब के धरपकड़ के नाम पर होने वाली छोटी कार्रवाइयों को लेकर मुख्यमंत्री ने गंभीरता दिखाई है और अवैध शराब तस्करी की घटनाओं पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है केवल छोटे स्तर पर कार्रवाई न करें। उन्होंने ठोस कार्ययोजना बनाकर काम करने कहा है, सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी से अब काम नहीं चलने वाला है।

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