आरक्षण को लेकर भाजपा-कांग्रेस ईमानदार नहीं, टीएस सिंहदेव का धन्यवाद ज्ञापित किया


कहा-पूरे प्रदेश में 15 नवंबर को होगी आर्थिक नाकेबंदी, विधानसभा सत्र घेराव में बन सकती है अप्रिय स्थिति

अंबिकापुर। आरक्षण व पेशा कानून के मुद्दे पर शनिवार को स्थानीय विश्रामगृह में पत्रकारों से चर्चा के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री व सर्व आदिवासी समाज के संरक्षक अरविंद नेताम ने कहा कि जब तक प्रदेश का मुख्यमंत्री आदिवासी नहीं होगा, आदिवासियों की समस्याओं का निदान संभव नहीं है। उन्होंने कहा दोनों राष्ट्रीय राजनैतिक पार्टियां अब तक बंधुआ मजदूरों को टिकट देते आई हैं। सत्ता में आने के बाद इनकी नीयत खराब हो जाती है। गरीब आदिवासी की मजबूरी का फायदा ये उठा कानून, संविधान का उल्लंघन कर रहे हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के मंत्री टीएस सिंहदेव का धन्यवाद ज्ञापित किया और कहा उन्होंने विभाग छोड़ आगाह कराया कि आगे क्या होने वाला है। वर्तमान में सरकार के पास अधिकांश पढ़े-लिखे विधायक व मंत्री हैं। इससे अच्छा मध्य प्रदेश के शासन में अंगूठा छाप विधायक थे, जो कम से कम समाज के लिए समर्पित रहते थे। उन्होंने आरोप लगाया आदिवासियों के आरक्षण को लेकर भाजपा और कांग्रेस पार्टी की सरकारें ईमानदारी नहीं बरती, जिससे आदिवासी समाज के लोगों का गुस्सा चरम पर है। आगामी 15 नवंबर को पूरे प्रदेश में आर्थिक नाकेबंदी की जाएगी, बात नहीं बनने पर विधानसभा सत्र का घेराव करेंगे। इस दौरान अप्रिय स्थिति निर्मित होने की संभावना है।


सर्व आदिवासी समाज के संरक्षक अरविंद नेताम ने आगे कहा कि पिछला सितंबर माह छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज के लिए सबसे मनहूस माह रहा। इस महीने में दो ऐसी प्रमुख घटनाएं हुई जो आजादी के 75 साल में कभी नहीं हुई। पेशा कानून में जल-जंगल व जमीन का अधिकार मिला था और जो ताकत थी उसे राज्य सरकार ने जान-बूझकर कमजोर कर दिया। दूसरा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का आरक्षण को लेकर फैसला है। नया राज्य बनने के बाद वर्ष 2005 में भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिफिकेशन भेजा था, जिसमें आंकड़ों के हिसाब से आदिवासी दलित एवं पिछड़ा वर्ग का कितने प्रतिशत आरक्षण होगा, इसकी जानकारी मांगी गई थी। भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने वर्ष 2011 तक उसे जस के तस रखा। इसके लिए आदिवासी समाज के द्वारा आंदोलन भी किया, जेल गए, तब वर्ष 2012 में भारत सरकार के जो निर्देश थे उस नोटिफिकेशन करके लागू किया। नोटिफिकेशन के बाद उसके खिलाफ में दलित समाज, पिछड़ा वर्ग व सामान्य वर्ग के काफी लोगों ने हाईकोर्ट में रीट दायर किया। इसके बाद छह साल भाजपा की सरकार पावर में रही, वर्तमान में लगभग 4 साल से कांग्रेस की सरकार है। दोनों सरकारें आदिवासियों से संबंधित आंकड़े और कागजात प्रस्तुत नहीं कर पाए। आरोप लगाया दोनों सरकार आदिवासियों के इस गंभीर मुद्दे पर ईमानदारी नहीं दिखाई, जिस कारण अंतिम बहस के बाद हाईकोर्ट का फैसला सामने आया। श्री नेताम ने कहा कि आज आदिवासी समाज के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। उनका जल, जंगल, जमीन से अधिकार चला गया, रोजगार पर आरक्षण खत्म हो गया। प्रदेश में 32 प्रतिशत आबादी आदिवासियों की है उनके पास अब कुछ नहीं बचा है। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि दो-दो बड़ी घटनाओं के बाद भी एक भी टिप्पणी किसी विधायक मंत्री ने नहीं की। समाज इस पर चिंतन कर रहा है। आने वाले चुनाव में समाज की तरफ से कोई भी बड़ी कार्रवाई हो सकती है। इस दौरान काफी संख्या में सर्व आदिवासी समाज के लोग उपस्थित थे।


जिनके भरोसे आदिवासी समाज आगे बढ़ा, वहीं रौंद रहे
सर्व आदिवासी समाज के पदाधिकारी बीएस रावटे ने कहा कि आजादी के बाद से जिन पार्टियों के भरोसे आदिवासी समाज आगे बढ़ा, उन्होंने ही आदिवासियों को रौंदने का काम किया है। पृथक छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद जितनी खुशी थी, अब उसका उतना ही मलाल है। आदिवासी समाज को 32 प्रतिशत आरक्षण उस दौरान मिला था, जब गोडवाना भवन से एकजुट होकर समाज के लोग विधानसभा घेरने निकले थे, इसके लिए लाठी तक खाना पड़ा, जेल गए, तब कहीं जाकर 32 प्रतिशत आरक्षण का फैसला सामने आया था, जिसे लेकर दोनों सरकारें गंभीर होती और वर्गवार समाज से संबंधित डाटा पेश किया गया होता तो आज हालात कुछ और होता।


नाकेबंदी ऐसी कि चूहा तक नहीं निकल पाएगा  
बीएस रावटे ने कहा बीते अक्टूबर माह में छत्तीसगढ़ सरकार के रवैये से क्षुब्ध होकर 10 से 18 अक्टूबर तक धरना-प्रदर्शन और राज्योत्सव का बहिष्कार किया गया। अब आर्थिक नाकाबंदी की तैयारी है। गांव से शहर तक ऐसी नाकाबंदी की जाएगी कि चूहा क्या चींटी तक नहीं निकल पाएगा। स्कूल-कॉलेज बंद कराने की भी योजना है। सिर्फ एंबुलेंस का कहीं भी आना-जाना हो सकेगा। हक की लड़ाई के लिए वे सड़क से विधानसभा और संसद तक जाएंगे।

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