*अम्बिकापुर* सरगुजा संभाग में तेंदूपत्ता खरीदी बंद होने से संग्राहकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है उपर से मौसम की मार ने संग्राहकों की आजीविका पर घोर संकट पैदा कर दिया है कोरोना महामारी की आपदा ने ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति को तहस नहस कर डाला है दैनिक मजदूरी कर भरण पोषण करने वाले मजदूर केवल सरकारी चावल के भरोसे आधा पेट भरने को मजबूर हैं !

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अनुराग सिंह देव ने कहा कि ऐसी स्थिति में छत्तीसगढ़ प्रदेश की तेंदूपत्ता खरीदी की गोलमाल नीति ने ग्रामीणों की आजीविका को ही मंझधार में डाल दिया है !वन विभाग में जो सरकारी भ्रष्टाचार इस कदर हावी है कि वनोपज की खरीदी का भी पुरा जिम्मा तेंदूपत्ता ठेकेदारों पर सरकार ने डाल दिया है ठेकेदार एवं अधिकारियों की मनमर्जी के कारण संग्राहक एक मई से ही तेंदूपत्ता बेचने गड्डियां बनाकर अपने घर में संग्रहित कर रखते रहे हैं किन्तु सिर्फ दो से तीन दिन ही खरीदी कर खरीददारी को रोक दिया गया ! जबकि मई का अंतिम सप्ताह चल रहा है एवं मानसून की भी निकट भविष्य में आने की संभावना है सरकार की इस नीति के कारण वन क्षेत्रों में निवासरत आदिवासी एवं अन्य परिवारों को जिनकी तेंदूपत्ता से साल भर का खर्चा चलता था उनकी आजीविका संकट में आ गई है ! उन्होंने पुरे संभाग में तेंदूपत्ता खरीदी की खराब हालत बताते हुये कहा कि चाहे सरगुजा जिले की डांड़गांव,कुद्दरबसवार,केदमा सुरजपुर जिले की ओड़गी, बिहारपुर,लांजित,कुद्दरगढ़ बलरामपुर जिले की बासेन,राजपुर,परसागुड़ी समिति हो कुल 26 दिनों में कहीं पर एक दिन कहीं पर दो दिन तो कहीं पर तीन से चार दिन ही खरीदी कर खरीददारी बन्द कर दी गई है !

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