रामानुजगंज(विकाश कुमार केशरी)- जो आयरन की गोली हजारों बच्चों एवं गर्भवती महिला को बटना था वह न बट कर जिम्मेवार लोगों के द्वारा पलटन घाट में फेंक दिया गया वह भी खुले में शासकीय कार्यों में किस प्रकार से घोर लापरवाही बरती जाती है इससे समझा जा सकता है अब क्या जिम्मेवार का पता लगाकर संबंधित के विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी यह भी एक बड़ा प्रश्न है।

गौरतलब है कि सीजी एमएससी के द्वारा फेरस सल्फेट एंड फोलिक एसिड टेबलेट रामानुजगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दिया गया था जहां से इसे महिला बाल विकास विभाग एवं विकास खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय को दिया गया जहां से बच्चों एवम गर्भवती महिला को वितरित किया जाता उक्त दवा की मैन्युफैक्चरिंग डेट 10 अक्टूबर 2018 थी वही एक्सपायरी डेट 9 सितंबर 2020 था परंतु जिन्हें वितरण के लिए दिया गया था वह शायद ना बैठकर एक्सपायरी डेट का इंतजार कर रहे थे जैसे ही एक्सपायरी डेट पूरा हुआ उसके बाद इसे पलटन घाट में ले जाकर फेंक दिया गया।

खुले आसमान के नीचे फेंका गया था- एक और दो लाखों रुपए की दवाई समय पर बच्चों को वितरित नहीं की गई वही इसे डिस्पोज करने की जगह खुले आसमान के नीचे फेंक दिया गया जिससे लापरवाही समझी जा सकती है।

खून की कमी को पूर्ति करने के लिए दी जाती है यह दवा- आयरन किया दवा जो एक दी गई वह बच्चों को एवं गर्भवती महिलाओं को खून की कमी को दूर करने के लिए दी जाती है परंतु किस प्रकार से शासकीय सामग्री का दुरुपयोग किया जाता है इससे समझा जा सकता है जो हजारों बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को दिया जाना था उसे किस प्रकार फेंक दिया गया।

इस संबंध में विकासखंड स्वास्थ्य अधिकारी डॉ कैलाश ने कहा कि यह दवा बच्चों को बचने के लिए आया था जिसे महिला बाल विकास विभाग एवं शिक्षा विभाग भिजवा दिया गया था।

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