अंबिकापुर। कोरोना संदिग्ध युवक की आत्महत्या करने के तीसरे दिन उसके शव का अंतिम संस्कार किया गया। परिजन ने कोरोना के डर से उसके शव को अपने गांव ले जाने से मना कर दिया। परिजन की उपस्थिति में अंबिकापुर शंकर घाट में पुलिस की मौजूदगी में शव का अंतिम संस्कार कराया गया। वहीं डेथ बॉडी से लिए गए सैंपल की जांच रिपोर्ट निगेटिव आया। मंगलवार की रात रिपोर्ट आने के बाद बुधवार की सुबह चिकित्सकों ने शव का पीएम किया। इससे पूर्व चिकित्सकों ने कोरोना के डर से पीएम करने से भी इंकार कर दिया था। जानकारी के अनुसार लुंड्रा थाना क्षेत्र के झेराडीह निवासी करमचंद पिता सहादुन 25 वर्ष कुछ दिन पूर्व मध्यप्रदेश से लौटा था। लौटने के बाद उसे लुंड्रा के क्वारंटाइन सेंटर में रखा गया था। सर्दी-खांसी की शिकायत होने पर उसका रैपिड टेस्ट किया गया, इसमें रिपोर्ट निगेटिव आई। इसके बाद एहतियातन उसे 23 मई को कोविड-19 अस्पताल के आईसोलेशन वार्ड में रखा गया था। उसका सैंपल लेकर अस्पताल प्रबंधन द्वारा आरटी-पीसीआर जांच हेतु रायपुर भेजा गया था। इसी बीच सोमवार की की शाम को अस्पवताल के आइसोलेशन वार्ड में गमछे के सहारे फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
रिपोर्ट निगेटिव आने पर किया गया पीएम
आत्महत्या के दूसरे दिन मंगलवार की सुबह परिजन मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे। इसके बाद परिजन ने ही उसके शव को फंदे से उतरा। इस दौरान पीएम करने वाले चिकित्सकों ने शव का पोस्टमार्टम करने से इंकार कर दिया। वहीं परिजन ने भी शव घर ले जाने से मना कर दिया था। इस दौरान अस्पताल प्रशासन के निर्देश पर मृतक के शरीर से कोरोना जांच के लिए सैंपल लिया गया और जांच के लिए रायगढ़ मेडिकल कॉलेज भेजा गया। वहां से रात ८ बजे रिपोर्ट आने पर पता चला कि युवक निगेटिव था।
शंकर घाट मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार
परिजन ने बताया कि ग्राम झेराडीह के वार्ड पंच रामचंद्र व ग्रामीणों ने शव गांव में लाने से मना कर दिया था। इस कारण हम लोग शव नहीं ले जाना चाहते हैं। इस दौरान अस्पताल पुलिस चौकी के आरक्षक राजेश पैकरा की मदद से व परिजन की उपस्थिति में शहर के शंकर घाट स्थित मुक्ति धाम में अंतिम संस्कार कराया गया। मुखाग्नि मृतक के मौसेरे भाई ने दी। इस दौरान पत्नी, बच्चे व अन्य लोग उपस्थित थे।

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