लक्ष्य की ओर अग्रसर है सुपोषण को लेकर चलाया जा रहा जिला प्रशासन का अभियान….

0 अप्रैल तक जिला हो सकेगा कुपोषण मुक्त…..

चंचलेश श्रीवास्तव

सूरजपुर जिले के गंभीर व मध्यम कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने के लिए सीमा निर्धारण के साथ जिला प्रशासन के द्वारा चलाया जा रहा व्यवहार परिवर्तन से सुपोषण की ओर अभियान सफलता के साथ अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर है। अगले माह अप्रेल तक जिले के उन तमाम बच्चो को कुपोषण से मुक्ति मिल सकेगी जिनका चिन्हांकन महिला बाल विकास विभाग के द्वारा सुपोषित करने के लिए किया गया है। इसी प्रयास को सार्थक करने के लिए जिला प्रशासन व महिला बाल विकास की पूरी टीम पूरे तन्मयता के साथ जिले भर में अभियान को न केवल गति दिए हुए है बल्कि संचालित अभियान का कलेक्टर डॉ गौरव सिंह व जिला कार्यक्रम अधिकारी चंद्रवेश सिंह सिसौदिया खुद से मॉनिटरिंग कर तय समय सीमा में लक्ष्य प्राप्ति हेतु प्रयासरत है। ताकि प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान का लाभ जिले के उन तमाम बच्चों को मिले जो कुपोषण का दंश झेल रहे है। जिले में करीब 10 हजार मध्यम तथा 4.5 हजार गंभीर कुपोषित बच्चों का चिन्हांकन किया गया है।

जिले के लिए वरदान बना चिरंजीवी सूरजपुर अभियान….

सूरजपुर प्रदेश का ऐसा इकलौता जिला है। जहां पर गंभीर कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने के लिए जिला प्रशासन के द्वारा चिरंजीवी सूरजपुर अभियान चलाया गया। जिला मुख्यालय के मंगलभवन में करीब दो माह तक चले इस विशेष अभियान के तहत गंभीर रूप से कुपोषित जिले के लगभग 233 बच्चो को पूर्ण पौष्टिक आहार, स्वास्थ् मनोरंजन व खेल की विशेष सुविधाओ के साथ नियमित रूप से स्वास्थ्य परीक्षण की सुविधाएं बच्चो के साथ इनकी माताओ को भी उपलब्ध कराई गई। जिससे यहां आने वाले बच्चे जहां पूरी तरह सुपोषित हुए। वहीं इनकी माताएं एक कुशल प्रशिक्षक के रूप में प्रशिक्षित होकर अपने अपने क्षेत्र की अन्य माताओ को भी कुपोषण से मुक्ति के लिए प्रोत्साहित करने का बीड़ा उठाया है। उन्होंने अन्य माताओ को घर मे स्वछता के साथ उपलब्ध पोषणतत्व जो बच्चो व उनके सुपोषण हेतु आवश्यक पोषण तत्व है कि जानकारी देकर पूर्ण पोषण आहार लेने के लिए जागरूक और प्रेरित कर रही है। चिरंजीवी सूरजपुर अभियान में ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओ को भी विशेष रूप से प्रशिक्षित किया गया जो जिले के किये संजीवनी के रूप में कार्य कर रहीं है। जिले के लिए वरदान बना चिरंजीवी सूरजपुर अभियान कलेक्टर डॉ गौरव सिंह की सुपोषण हेतु दूरगामी सोच का परिणाम रहा जिसको अमलीजामा पहनाने का कार्य जिला कार्यक्रम अधिकारी चंद्रवेश सिंह सिसौदिया ने किया। यह अभियान और भी विशेष इसलिए हुआ कि जिला प्रशासन के द्वारा चलाये गए इस अभियान के संचालन हेतु आर्थिक सहयोग में कई हाथ आगे बढे और सब के सहयोग से यह अभियान सोच के अनुरूप सफल रहा। इस अभियान के निरीक्षण में प्रभारी मंत्री शिव डहरिया, प्रभारी सचिव पी दयानन्द, संसदीय सचिव पारसनाथ राजवाड़े सहित कई जनप्रतिनिधि, समाजसेवी व अधिकारी पहुंचे थे। जिन्होंने भी इस अभियान के लिए जिला प्रशासन की जमकर तरीफ करते हुए व्यवस्था हेतु सहयोग भी दिया था।

जिले में 7 सौ पोषण की संचालित की जा रही पाठशालाएं…

लक्ष्य सुपोषण के तहत जिले के सभी सात परियोजना सूरजपुर, भैयाथान, प्रतापपुर, प्रेमनगर, ओड़गी, रामानुजनगर व सिलफिली में सौ-सौ सुपोषण की पाठशालाएं व्यवहार परिवर्तन से सुपोषण की ओर संचालित की जा रही है। यह पाठशाला उस क्षेत्र में आयोजित की जा रही है जहां ज्यादा बसाहटें व कुपोषित बच्चे है ताकि उन्हें ज्यादा से ज्यादा लाभान्वित किया जा सके। सुपोषण की पाठशाला में पोषण के पांच सूत्र जैसे पहले सुनहरे एक हजार दिन, पौष्टिक आहार, एनीमिया की रोकथाम डायरिया प्रबंधन तथा स्वच्छता एवं साफ सफाई के संबंध में जानकारी देकर माताओ को जागरूक किया जा रहा है। जिला कार्यक्रम अधिकारी चंद्रवेश सिंह सिसौदिया ने बताया कि जिस क्षेत्र में पाठशाला का संचालन हो रहा है वहां की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पाठशाला की संचालिका के रूप में कार्य कर रहीं है। वहीं अन्य कार्यकर्ताओ की जिम्मेदारी अभिभावकों व बच्चो को वहां तक लाने की होती है। अब तक पाठशाला में जिले के 1.60 लाख अभिभावक तथा 1.50 लाख बच्चो की उपस्थिति दर्ज की गई है। जागरूता के लिए महिला बाल विकास विभाग के द्वारा 5 हजार कलेंडर व पुस्तको के माध्यम से सुपोषण के पांच सूत्रों के साथ गर्भावस्था में आहार, कमजोर नवजात शिशुओं को कंगारू मदर केयर, पोषण मेरी भी जिम्मेदारी, नवजात शिशु की देखभाल, पोषण मेरी कहानी, शिशु को स्तनपान कराना, विटामिन और खनिज लवनो के कारण होने वाले रोग व विकार, महिलाओ में एनीमिया की रोकथाम सहित गर्भवती माताओ को शासन की विभिन्न योजनाओं से होने वाले लाभ की जानकारी आकर्षक छायाचित्र के माध्यम से दी गई है जिसका वितरण भी किया गया है। जिससे माताओ एवं बच्चो को ज्यादा से ज्यादा लाभान्वित किया जा सके। उन्होंने बताया कि पाठशाला संचालन हेतु प्रतिदिन वाट्सप पर विषय व उससे संबंधित वीडियो भेजी जाती है और संचालन गतिविधियों की रिपोर्ट संचालिकाओं के द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से भेजी जाती है।

बच्चो के स्वस्थ्य परीक्षण हेतु कार्यकम हेल्थ फ्राइडे….

स्थानीय स्तर पर ही बच्चो के स्वास्थ परीक्षण के लिए महिला बाल विकास विभाग के द्वारा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से हेल्थ फ्राइडे शिविर लगाया जा रहा है। जिसके माध्यम से माह के पहले एवं आखिरी शुक्रवार को हेल्थ कैम्प लगाकर बच्चो का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। पिछले वर्ष जहां 55 शिविर लगाकर 12 सौ बच्चो को लाभान्वित किया गया था। वहीं इस वर्ष 7 जनवरी से हेल्थ फ्राइडे कैम्प की शुरुआत कर मात्र दो माह में ही करीब 450 कैम्पो के माध्यम से 12 हजार 2 सौ बच्चो का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा चुका है। जिनमे मध्यम व गंभीर कुपोषित बच्चे भी शामिल है जिनके स्वस्थ की जांच कर उन्हें विटामिन की दवाएं व पोषण सामग्री प्रदाय की गई है। यह कार्यक्रम कलेक्टर डॉ गौरव सिंह व जिपं सीईओ राहुल देव के मार्गदर्शन, जिला कार्यक्रम अधिकारी चंद्रवेश सिंह सिसौदिया की परिकल्पना तथा सीएचएमओ डॉ आर एस सिंह के सहयोग से संचालित की जा रही है। जिसमे विभाग की टीम सक्रिय है। यही नहीं इन अधिकारियों के द्वारा स्वयं हेल्थ फ्राइडे शिविर का अवलोकन भी किया जा रहा है। ताकि कार्यकम का सही तरीके से क्रियान्वयन हो सके और क्षेत्र का कोई भी बच्चा इसके लाभ से वंचित ना हो।

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