तानाशाही के विरोध में लगाए नारे, आंदोलनरत रहने और आत्मदाह की चेतावनी
अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कर्मचारियों की हड़ताल जारी है। सरकार ने इनकी पांच मांगों के प्रति सहानुभूति दिखाई, इसके बाद भी काम पर वापसी नहीं होने से खफा सरकार के तंत्र ने काम पर वापसी का अल्टीमेटम देने के साथ डेट लाइन तय कर दिया था। निर्धारित की गई तिथि की समाप्ति के बाद छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य सचिव ने बुधवार को देर रात सभी जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को संदेश भेजकर तल्ख लहजे में निर्देश दिए हैं कि जो भी कर्मचारी हड़ताल से काम पर नहीं लौटे हैं, उन्हें व्यक्तिगत कानूनी आदेश जारी करके सेवा से बर्खास्त किया जाए। स्वास्थ्य सचिव के कड़े निर्देश के बाद प्रदेशभर के लगभग 16 हजार कर्मचारी गुरूवार को जेल भरो आंदोलन की राह पर अग्रसर रहे। इनकी काफी संख्या में हर जिले में मौजूदगी को देखते हुए पूर्व से ही प्रशासन और पुलिस अलर्ट रही। स्वास्थ्य सचिव का संदेश मिलने के बाद स्वास्थ्य प्रशासन नई भर्ती से संबंधित प्रक्रियाओं को अमलीजामा पहनाना भी शुरू कर दिया है।
बता दें कि छत्तीसगढ़ में एनएचएम के कर्मचारियों की हड़ताल बीते 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं, जिसका स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ रहा है। जिले के ऐसे स्वास्थ्य केन्द्रों में दवा देने तक के लिए कर्मचारियों की अनुपलब्धता जैसी बातें सामने आ रही हैं, जहां पूरा भार एनएचएम के कर्मचारियों पर था। इन सबके बीच सरकार ने हड़ताल खत्म करने को लेकर आदेश जारी किया लेकिन एनएचएम के कर्मचारी काम पर नहीं लौटे। इसके बाद 3 सितंबर को सरकार की तरफ से 25 एनएचएम के कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया। इसका असर अन्य कर्मचारियों पर नहीं पड़ा और सरकार के द्वारा पांच मांगों को मानने के बाद भी इनकी काम पर वापसी नहीं हुई। इसके बाद बुधवार, 17 अगस्त को देर रात छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने प्रदेश के सभी सीएमएचओ को सख्त निर्देश जारी किया है कि जो भी कर्मचारी हड़ताल से काम पर नहीं लौटे हैं, उन्हें सेवा से मुक्त करने की कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही सभी जिलों को खाली हुए पदों की सूची तैयार करने और तत्काल भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य सचिव ने साफ कहा है कि भर्ती का कैलेंडर सख्ती से तय होगा, किसी भी हालत में सेवाएं प्रभावित नहीं होने दी जाएंगी। सरकार के इस आदेश से हड़ताली कर्मचारियों में खलबली मचनी थी, लेकिन इनके द्वारा वृहद रैली निकालकर गुरूवार को गिरफ्तारी दी गई, और सरकार विरोधी जमकर नारे लगाए। एनएचएम के कर्मचारियों ने सरकार के सख्त रवैये से निपटने की ठान ली है। एनएचएम से संबद्ध कर्मचारी संगठन का कहना है कि जब तक नियमितीकरण, वेतनमान और सेवा सुरक्षा जैसी प्रमुख मांगें पूरी नहीं होती है, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
अंतिम चेतावनी की डेड लाइन पार, नई भर्ती प्रक्रिया शुरू
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी सरगुजा, डॉ. पी.एस. मार्को ने बताया कि सरगुजा जिले के 543 एनएचएम के कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इन्हें 16 सितम्बर को शाम 5 बजे तक काम पर वापस होने का अंतिम अवसर दिया गया था, लेकिन इनकी वापसी नहीं हुई है। इस पर उन्होंने अग्रिम कार्रवाई के लिए फाइल कलेक्टर को प्रेषित किया था। इसके पहले इन्हें दो बार नोटिस भी जारी किया गया है, इसके बाद भी यथास्थिति बनी रही, जबकि इन्हें अंतिम चेतावनी शासन स्तर से दी गई थी कि वे काम पर वापस लौट जाएं नहीं तो उन्हें टर्मिनेट कर दिया जाएगा। इधर बुधवार को देर शाम स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया की ओर से मिले सख्त निर्देश के पालन में अग्रिम नई भर्ती प्रक्रिया के लिए तैयारी शुरू हो गई है। सीएमएचओ ने बताया कि नई भर्ती प्रक्रिया का लाभ पूर्व में चली भर्ती के दौरान वेटिंग में रहे अभ्यर्थियों को लीगली फिट रहने की स्थिति में मिल सकता है। स्वास्थ्य सचिव से मिले निर्देश के पालन में उनके द्वारा एनएचएम के कर्मचारियों की बर्खास्तगी के बाद रिक्त पदों की जानकारी शासन को प्रेषित कर दी है।
सीनियरिटी पर पड़ेगा प्रभाव, भर्ती आसान नहीं
सीएमएचओ डॉ. पी.एस. मार्को ने बताया कि नई भर्ती प्रक्रिया में पुराने कर्मचारी शामिल हो सकते हैं, लेकिन इनकी सीनियरिटी पर प्रभाव पड़ेगा। इन्हें हर वर्ष 5 प्रतिशत इंक्रीमेन्ट का लाभ मिलता था, इससे भी वे वंचित रहेंगे। कई कर्मचारियों की आयु सीमा पार होने की स्थिति बनेगी, जिससे वे भर्ती प्रक्रिया के मापदंडों को पूरा नहीं कर पाएंगे। बहरहाल देखना यह है कि एनएचएम के कर्मचारियों को मिली काम में वापसी की नियत सीमा के पार होने के बाद अब कैसे हालात बनेंगे। एनएचएम के कर्मचारी अभी भी संघर्ष की राह पर अग्रसर हैं। इनके द्वारा सरकार के रवैये को तानाशाही की संज्ञा देते हुए आत्मदाह जैसा कदम उठाने की चेतावनी दी जा रही है।
अंबिकापुर में निकली भव्य रैली, कलाकेंद्र मैदान बना अस्थायी जेल
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सरगुजा संभाग के एनएचएम कर्मचारियों ने गुरूवार को शहर में वृहद रैली निकाली और जेल भरो आंदोलन किया। नारेबाजी करते बड़ी संख्या में एनएचएम के कर्मचारियों के सड़क पर निकलने से सरकार के प्रति असंतोष की लहर देखने को मिली। बड़ी संख्या में एनएचएम के कर्मचारियों के द्वारा दी जाने वाली गिरफ्तारी को देखते हुए शहर के कलाकेंद्र मैदान को अस्थायी जेल का रूप दिया गया था। पुलिस वाहन के साथ काफी संख्या में पुलिस अधिकारी व कर्मचारी यहां तैनात रहे, जिन्होंने इन्हें जद्दोजहद के बीच गिरफ्तार किया।
एनएचएम की सरगुजा जिला अध्यक्ष शिल्पी राय व जिला अध्यक्ष सूरजपुर का कहना है कि वैश्विक महामारी, कोरोनाकाल में जान को जोखिम में डालकर वे अपनी सेवाएं दिए, इसके बावजूद उनकी मांगों को अनसुना किया जा रहा है। कई लोगों को राज्य शासन ने बर्खास्त कर दिया, इसके बावजूद एचएमएम के कर्मचारी हड़ताल पर अडिग हैं। मांग पूरी नहीं होने तक उग्र आंदोलन का सिलसिला जारी रहेगा। बात नहीं बनी तो वे आत्मदाह के राह पर अग्रसर होंगे। बहरहाल जेल भरो आंदोलन का आगाज सरकार के मूड को कितना बदल पाएगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा। देखना यह है कि एक माह का एडवांस भुगतान करके इन कर्मचारियों की विदाई सुनिश्चित होती है, या शासन स्तर पर पुनर्विचार जैसा कोई रास्ता निकलता है। हालांकि स्वास्थ्य सचिव ने जिस प्रकार का सख्त निर्देश प्रदेशभर के सीएमएचओ को भेजा है, उससे एनएचएम के कर्मचारियों की काम पर वापसी अब स्थानीय स्तर पर हो पाना असंभव ही प्रतीत हो रहा है। सरकार के द्वारा एनएचएम के कर्मचारियों की मांगों में पांच मांगों को पूरा करने सहमति जताने के बाद भी काम पर वापसी नहीं होने के कारण शासन स्तर पर कठोर निर्णय लिया जा रहा है।

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