कांकेर। आजादी के 78 वर्ष बाद भी जिले के अंतागढ़ विधानसभा में कई गांवों के बच्चों को आज भी बरसात के दिनों में घुटनों और कमर तक पानी को पार कर शिक्षा हासिल करने जाना पड़ रहा है। बस्तर संभाग के कई जिलों में लगातार बारिश से नदी नाले उफान पर हैं। बरसाती नालों के कारण कई गांवों का संपर्क दूसरे गांवों से टूट गया है। कांकेर जिला मुख्यालय से 100 किलोमीटर दूर अंतागढ़ विकासखंड अंतर्गत केसालपारा में भी बरसाती नालों के कारण वहां के रहवासियों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। खासकर स्कूल जाने वाले बच्चों को जान जोखिम में डालकर स्कूल जाना पड़ रहा है। घुटनों और कमर तक बरसाती नाला पार कर बच्चे पढ़ने के लिए दूसरे गांव के स्कूल जा रहे हैं। एक हाथ में छाता, दूसरे हाथ में किताब और जूते चप्पल, पीठ में बस्ता लेकर बच्चे बरसाती नाला पार कर रहे हैं।

पढ़ाई करने के लिए नाला पार करना मजबूरी
दरअसल केसालपारा में प्राथमिक पाठशाला तो है लेकिन माध्यमिक शाला में पढ़ने के लिए उन्हें कानागांव आना पड़ता है। लगभग 35 से 40 बच्चे बारिश के दिनों में नाला पार कर स्कूल जाते हैं। नाला पार करने के दौरान उनके परिजन भी साथ रहते हैं। नाला जब बहुत ज्यादा उफान पर होता है तो बच्चे स्कूल नहीं जाते और पानी कम होने का इंतजार करते हैं। इस दौरान बच्चों की पढ़ाई बंद रहती है।

ग्रामीण होते हैं परेशान
जिला पंचायत सदस्य का कहना है कि आदिवासी क्षेत्रों में कोई पुल पुलिया नहीं बन पा रही है। कई स्कूल जर्जर है। ग्रामीणों को बारिश के दिनों में राशन लेने के लिए भी ऐसा ही नाला पार करना पड़ता है।

क्या कहते हैं कलेक्टर
नाला पार कर स्कूल जाने की समस्या के बारे में कलेक्टर नीलेश क्षीरसागर से पूछने पर उन्होंने ने बताया कि बारिश के दिनों में आवागमन की परेशानी को देखते हुए चिन्हांकित किया गया है। जिले में 60 ब्रिज की जरूरत है जिसके लिए लगभग 250 करोड़ लगने थे। कलेक्टर ने बताया कि जिला प्रशासन और शासन से मिले फंड का उपयोग स्कूलों में किया जाएगा। कलेक्टर ने अपील की है कि बच्चे और परिजन उफान पर आए नदी नाले पार ना करें और सुरक्षित रहें।

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