स्वास्थ्य मंत्री ने कहा-सिंहदेव को जनता के सामने पूरी सच्चाई रखनी चाहिए

एमसीबी। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री और मनेंद्रगढ़ विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्याम बिहारी जायसवाल ने सरगुजा में पेड़ों की कटाई और अडानी ग्रुप को लेकर चल रहे विवाद पर बड़ा बयान दिया है। चिरमिरी पहुंचे मंत्री जायसवाल ने मीडिया से बातचीत के दौरान पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, सरगुजा संभाग के वरिष्ठ नेता होने के नाते सिंहदेव को जनता के सामने पूरी सच्चाई रखनी चाहिए।

‘भूपेश सरकार के कार्यकाल में दी गई एनओसी

मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि, सरगुजा क्षेत्र में लगभग 7 लाख पेड़ काटे जाने को लेकर जो सवाल उठाए जा रहे हैं, उस मामले में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि अडानी ग्रुप को एनओसी तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में दी गई थी। उन्होंने कहा कि उस समय टीएस सिंहदेव खुद सरकार में मंत्री थे और यदि उन्हें इस परियोजना से आपत्ति थी तो उसी समय विरोध दर्ज कराना चाहिए था।

सरकार में रहकर पेड़ कटाई का विरोध नहीं

मंत्री जायसवाल ने कहा कि आज जनता के बीच जाकर केवल बयानबाजी करना उचित नहीं है। अगर उस समय सरकार के भीतर रहकर इसका विरोध किया जाता तो शायद आज ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने कांग्रेस नेताओं पर राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दों को हवा देने का आरोप भी लगाया।

कांग्रेस जनता को भ्रमित कर रही

श्याम बिहारी ने आगे कहा कि भारतीय जनता पार्टी हमेशा विकास और पर्यावरण के संतुलन की बात करती है। सरकार जनता के हितों और पर्यावरण संरक्षण दोनों को ध्यान में रखकर कार्य कर रही है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि, कांग्रेस अपने कार्यकाल के फैसलों की जिम्मेदारी लेने से बच रही है और अब जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है।

टीएस सिंहदेव ने एक्स में किया पोस्ट

छत्तीसगढ़ के पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव ने 8 मई को एक्स पर एक पोस्ट किया, इस पोस्ट के जरिए उन्होंने कहा कि 8 मई को केंद्रीय वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की वन सलाहकार समिति (एफएसी) की बैठक में राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को आवंटित और अदानी के एमडीओ वाली केते एक्सटेंसन कोल ब्लॉक की वन स्वीकृति देने पर विचार होगा। विष्णुदेव साय सरकार पूर्व में ही वन स्वीकृति की अनुशंसा केंद्र को भेज चुकी है। इस नए खदान में लगभग 7 लाख पेड़ काटे जाएंगे, जिससे न सि$र्फ समृद्ध जंगल-जमीन, जैव विविधता, हसदेव नदी और बांगो जलाशय का विनाश होगा बल्कि छत्तीसगढ़ रेगिस्तान में तब्दील होगा।

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