रायपुर। मंगलवार को प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में संगठन को गांव और बूथ स्तर तक मजबूत करने पर चर्चा हुई। आने वाले समय में बैठकों की रूपरेखा पर भी विचार हुआ। बैठक में राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव, प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। भाजपा कोर कमेटी की बैठक में कई नए सदस्यों को शामिल किया गया है, जबकि कुछ पुराने सदस्यों को हटाए जाने की अटकलें तेज हैं। भाजपा प्रदेश महामंत्री यशवंत जैन ने कोर ग्रुप के पुनर्गठन की पुष्टि की है।

सत्ता और संगठन दोनों में बदलाव के संकेत
छत्तीसगढ़ भाजपा में सत्ता और संगठन दोनों स्तर पर बदलाव की चर्चा है। सरकार को ढाई साल पूरे होने जा रहे हैं, वहीं संगठन में प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल का कार्यकाल समाप्ति की ओर है। नए चेहरों को जिम्मेदारी देने और कई नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर एडजस्ट करने की संभावनाएं हैं। भाजपा सूत्रों के अनुसार पार्टी नेतृत्व ने सत्ता और संगठन को लेकर फीडबैक और सर्वे कराया है।

डिप्टी सीएम को राष्ट्रीय जिम्मेदारी की चर्चा
सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि किसी एक उपमुख्यमंत्री को संगठन में राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी मिल सकती है। डिप्टी सीएम विजय शर्मा का नाम सबसे आगे है, हालांकि अरुण साव का नाम भी सामने आ रहा है। कहा जा रहा है कि भाजपा ऐसे चेहरों को आगे लाना चाहती है जो चुनावी मैनेजमेंट और संगठन विस्तार में प्रभावी रहे हों। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन अपनी नई टीम तैयार कर सकते हैं। वे लंबे समय तक छत्तीसगढ़ प्रभारी रहे हैं, ऐसे में यहां के कुछ नेताओं को राष्ट्रीय टीम में जगह मिल सकती है।

महिला डिप्टी सीएम का फार्मूला
अगर डिप्टी सीएम स्तर पर बदलाव होता है तो भाजपा महिला चेहरे को आगे कर सकती है। लता उसेंडी और रेणुका सिंह के नाम चर्चा में हैं। पार्टी किसी महिला आदिवासी या ओबीसी चेहरे को डिप्टी सीएम बनाकर सामाजिक समीकरण साध सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा अब 2028 विधानसभा चुनाव की रणनीति पर काम कर रही है।

सरगुजा क्षेत्र से महिला को मिल सकता है मौका
चर्चा है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व पर केंद्रीय नेतृत्व को भरोसा है और फिलहाल सीएम बदलने की स्थिति नहीं है। लेकिन मंत्रिमंडल में 2-4 चेहरों के फेरबदल की चर्चा तेज है। इस बार पुराने विधायकों की तुलना में नए चेहरों को प्राथमिकता मिल सकती है। संभावित फेरबदल में एक और महिला चेहरे को शामिल किया जा सकता है। भावना बोहरा, पुरंदर मिश्रा, सुशांत शुक्ला और सरगुजा क्षेत्र की किसी आदिवासी महिला विधायक का नाम प्रमुख है। भाजपा अब चुनाव से ठीक पहले बदलाव के बजाय समय रहते परफॉर्मेंस ट्यूनिंग के मॉडल पर काम कर रही है। पार्टी सत्ता में आने के बाद दूसरे चरण की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।

 

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