चिकित्सक ने कहा-रेबीज सौ प्रतिशत घातक बीमारी, लेकिन इस मामले में कोई खतरा नहीं

अंबिकापुर। शहर से लगे ग्राम सरगवां में निकासी पूजा के दौरान कथित रूप से रेबीज संक्रमित कुत्ते द्वारा काटे गए बकरे की बली देने और उसका मांस ग्रामीणों को प्रसाद के रूप में खिलाने का मामला सामने के बाद गुरूवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। ग्रामीणों से बातचीत के दौरान कई बातें सामने आईं, ग्रामीण दहशत में रहे। हालांकि स्वास्थ्य अमला पूरे केस की स्टडी करने के बाद इस नतीजे पर पहुंचा है, कि प्रसाद ग्रहण करने वाले ग्रामीण खतरे में नहीं हैं।
बता दें कि शहर से सटे ग्राम सरगंवा में 28 दिसंबर को पारंपरिक पूजा के दौरान बलि चढ़ाए गए बकरों में से एक को करीब चार महीने पहले पागल कुत्ते के काटने की हवा फैली, और ग्रामीण दहशत में आ गए थे। बकरे के मांस का भक्षण प्रसाद के रूप में गांव के लगभग 400 ग्रामीणों ने किया था। ग्रामीणों ने सरपंच नारायण प्रसाद और उपसरपंच कृष्णा सिंह पर आरोप लगाया कि उन्हें कुत्ते के काटने की बात पता थी, इसके बाद भी वे संक्रमित बकरे की बलि चढ़वा दिए। इसके बाद बकरे का मांस खाए लोगों ने अंदर ही अंदर रेबीज संक्रमण का डर सताने लगा। स्वास्थ्य विभाग ने गांव में स्वास्थ्य शिविर लगाया। डॉ. शैलेंद्र गुप्ता ने ग्रामीणों की जांच की और उन्हें आवश्यक परामर्श दिया। डॉ. गुप्ता ने स्पष्ट किया कि रेबीज सौ प्रतिशत घातक बीमारी है, लेकिन इस मामले में कोई खतरा नहीं है। कुत्ते के काटने के चार महीने बाद भी बकरे में रेबीज का कोई लक्षण नहीं दिखा। रेबीज के लक्षण आमतौर पर जानवरों में 1 से 3 महीने में प्रकट हो जाता है। बकरा पूरी तरह से स्वस्थ और सामान्य था, इसलिए उसे संक्रमित नहीं माना जा सकता है। ग्रामीणों में रेबीज को लेकर कई भ्रांतियां थीं, जिसे डॉ. शैलेंद्र गुप्ता और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दूर करने का प्रयास किया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बकरे का मांस ग्रहण किए सभी ग्रामीणों की जांच करके उन्हें आवश्यक परामर्श दिया है।

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