तीसरी बार मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे स्वजन भड़के

मारपीट में घायल युवक को लेकर एमएलसी कराने पहुंची थी पुलिस

स्वजन ने कहा-आईसीयू से निकले मरीज का एमएलसी कराने बैकुण्ठपुर, अंबिकापुर काट रहे हैं चक्कर

अंबिकापुर। मारपीट के मामले में घायल युवक का सोनोग्राफी जांच कराने के लिए पुलिस व स्वजन बैकुंठपुर व अंबिकापुर अस्पताल का चक्कर काट रहे थे। सोमवार को मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर पहुंचने के बाद चिकित्सक ने सोनोग्राफी करने से जब इन्कार किया, तो इनके सब्र का पैमाना टूट गया। ऑन ड्यूटी मौजूद महिला चिकित्सक के व्यवहार को देखकर वे आवेशित हो गए। इनका कहना था कि वे तीसरी बार एमएलसी कराने के लिए कोरिया जिला के चरचा से दो दिन पहले आइसीयू से बाहर आए युवक को लेकर मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर पहुंचे हैं। इसकी सूचना अस्पताल अधीक्षक को मोबाइल फोन पर दी गई, इसके बाद दोपहर दो बजे सोनोग्राफी के लिए विभाग की एचओडी ने आश्वस्त किया।

मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सोनोग्राफी के लिए लगी भीड़ के बीच सोमवार को उहापोह की स्थिति उस समय बन गई, जब पुलिस व स्वजन सोनोग्राफी कराने के लिए कोरिया जिले के चरचा से अंबिकापुर पहुंचे थे। सोनोग्राफी जांच के लिए मरीजों की लम्बी कतार लगी थी। इस बीच मारपीट में घायल चरचा निवासी विपिन कुमार का सोनोग्राफी कराने के लिए पुलिस व स्वजन पहुंचे। आरोप है कि यहां मौजूद रेडियोलॉजिस्ट डॉ. आकांक्षा ने पीड़ित युवक का सोनोग्राफी करने से इन्कार कर दिया। जब उन्होंने सोनोग्राफी नहीं करने का कारण जानने का प्रयास किया, तो ऑन ड्यूटी मौजूद महिला चिकित्सक ने मेरी मर्जी… नहीं करूंगी, कहते हुए उपेक्षापूर्ण व्यवहार किया। पीड़ित के साथ पहुंचे स्वजन अधिवक्ता वंदना सिंह ने बताया कि विपिन को मारपीट में गंभीर चोट आई है। उन्होंने घायल अवस्था में उसे अंबिकापुर के ही एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां उसे आइसीयू में रखा गया था। पांच दिनों तक चले उपचार के बाद वे उसे लेकर बैकुंठपुर जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, तो उन्होंने यह कहते हुए उसे अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल जाने कहा कि यहां जांच सुविधा उपलब्ध नहीं है। 12 मई को मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर पहुंचे और सीटी स्कैन जांच कराया, लेकिन सोनोग्राफी जांच नहीं किया गया। 14 मई को पुन: मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सोनोग्राफी जांच के लिए पहुंचे तो उस दिन भी जांच नहीं किया गया। सोमवार, 20 मई को पुन: मेडिकल कॉलेज अस्पताल में यही स्थिति बन रही है। चिकित्सक का व्यवहार कहने लायक नहीं है। इसके बाद उन्होंने चिकित्सक पर भड़ास निकालना शुरू कर दिया। अधिवक्ता वंदना सिंह ने अपनी ओर से काफी प्रयास किया कि सोनोग्राफी जांच हो जाए, लेकिन चिकित्सक का व्यवहार देखकर वे बाहर निकल आईं। अस्पताल के एक चिकित्सा अधिकारी भी ऑन ड्यूटी मौजूद डॉ. आकांक्षा कुजूर के इस व्यवहार को लेकर खफा दिखे। बताया जा रहा है कि उक्त चिकित्सक पूर्व से ही अपनी मनमानी के लिए सुर्खियों में रही हैं।

नियम का हवाला देकर दी ऐसी दलील
डॉ. आकांक्षा से स्वजन के द्वारा लगाए जा रहे आरोप का हवाला देकर एमएलसी नहीं करने का कारण जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने दलील दी कि मरीज निजी अस्पताल में भर्ती था, ऐसे में उसका जांच यहां नहीं किया जा सकता है। मैंने उन्हें डॉ. सरिता सिंह से सोनोग्राफी कराने कहा है। बता दें पुलिस केस जैसे मामलों में एमएलसी की जरूरत हो, तो शासकीय चिकित्सालय का ही जांच रिपोर्ट मान्य होता है। ऐसे में निजी अस्पताल में भर्ती युवक का एमएलसी कराने के लिए स्वजन व पुलिस बैकुंठपुर जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर का चक्कर काट रहे थे।


अधीक्षक ने सोनोग्राफी करने दिए निर्देश
पुलिस केस में सोनोग्राफी के लिए चक्कर काट रहे पीड़ित व स्वजन की जानकारी जब अस्पताल अधीक्षक डॉ. आरसी आर्या को दी गई, तो उन्होंने कहा एचओडी को उन्होंने सोनोग्राफी करने के लिए निर्देशित किया है। ऑन ड्यूटी चिकित्सक के व्यवहार को लेकर उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए इसकी जानकारी लेकर कार्रवाई करने की बात कही।  

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