बुधवार को देर रात कोतवाली थाना अंबिकापुर में विधायक के विरूद्ध दर्ज हुआ मामला

अंबिकापुर। सरगुजा जिले में नायब तहसीलदार से सीतापुर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक व समर्थकों के द्वारा की गई मारपीट का मामला तूल पकड़ लिया है। शिकायत के बाद विधायक रामकुमार टोप्पो सहित 10-12 लोगों के खिलाफ कोतवाली थाना अंबिकापुर में शून्य में अपराध पंजीबद्ध करके सीतापुर थाना अग्रिम जांच, कार्रवाई के लिए भेजा गया है। इन पर राजापुर उप तहसील के नायब तहसीलदार तुषार मानिक के साथ मारपीट करने और उनके कपड़े फाड़ देने का आरोप है। वहीं विधायक की बहन ने नायब तहसीलदार पर बदसलूकी का आरोप लगाया है। मामले में सीतापुर थाने में नायब तहसीलदार के विरूद्ध भी प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस अग्रिम पड़ताल कर रही है।

जानकारी के मुताबिक, मैनपाट के राजापुर उप तहसील में सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो की बहन सीमा ने जमीन का शाख शोध पत्र बनवाने के लिए 14 मई को फाइल जमा किया था। आरोप है कि नायब तहसीलदार तुषार मानिक और बाबू कई दिनों से दफ्तर का चक्कर लगवा रहे थे। बुधवार, 27 मई को भी वह अपने काम के सिलसिले में उप तहसील कार्यालय पहुंचीं थी। नायब तहसीलदार तुषार मानिक से उन्होंने फाइल पर साइन करने के लिए कहा तो वे भड़क गए और कहा कि तुम होती कौन हो? हस्ताक्षर करने के लिए कहने वाली, जाकर मैनपाट में हस्ताक्षर करा लो। इसके बाद उसे तहसील से बाहर करने के लिए कहा गया। इसकी जानकारी वह अपने भाई विधायक रामकुमार टोप्पो को दी तो उनके समर्थक उप तहसील पहुंच गए। इसके बाद बनी स्थिति के बाद नायब तहसीलदार तुषार मानिक ने मारपीट और शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। नायब तहसीलदार ने अपनी शिकायत में कहा है कि विधायक रामकुमार टोप्पो, यूसुफ, नाजिम रजा, पंकज गुप्ता समेत 10-12 लोगों ने शोध क्षमता प्रमाण पत्र पर तत्काल हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाया। मना करने पर अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए मारपीट की गई और उन्हें जमीन पर गिरा दिया गया। घटना के दौरान एसडीएम सीतापुर फागेश सिन्हा भी मौजूद थे। शिकायत में कहा गया कि एसडीएम ने बीच-बचाव कर स्थिति को संभाला, अन्यथा बड़ी घटना हो सकती थी। कोतवाली पुलिस ने नायब तहसीलदार की शिकायत पर विधायक रामकुमार टोप्पो सहित अन्य के खिलाफ बीएनएस की धारा 221, 121(1), 191(2) सहित 132 के तहत मामला दर्ज किया है। इधर विधायक रामकुमार टोप्पो के बहन की शिकायत पर नायब तहसीलदार तुषार मानिक के खिलाफ बीएनएस की धारा 296 351 (2) व 79 का मामला दर्ज किया गया है। महिला ने तहसील कार्यालय में अभद्र व्यवहार करने, जातिसूचक गाली-गलौज व धक्का-मुक्की करके कार्यालय से बाहर निकालने सहित गंभीर आरोप लगाए हैं। दोनों पक्षों पर एफआइआर दर्ज होने के बाद जिले में राजनीतिक और प्रशासनिक हलके में कई प्रकार की चर्चा हो रही है। पुलिस पूरे घटनाक्रम के जांच में जुटी हुई है।

एफआइआर वापस लेने, इधर 24 घंटे में गिरफ्तारी की मांग

सीतापुर में उस समय उहापोह की स्थिति बन गई, जब तहसीलदार और विधायक समर्थक आमने-सामने हो गए। प्रदर्शनकारियों के द्वारा थाना के बाहर जमकर नारेबाजी की जा रही थी। भाजपा के ही शासन, सत्ता के बीच ये प्रशासन नहीं चलेगी तेरी गुंडागर्दी के नारे लगा रहे थे, और थाने में पहुंचे तहसीलदारों के विरूद्ध आवाज बुलंद कर रहे थे। पुलिस ने बैरीकेड लगाकर इनका रास्ता रोककर रखा था। स्थिति को नियंत्रित करने में पुलिस के हाथ-पांव फूल रहे थे। विधायक के समर्थकों द्वारा एफआइआर वापस लेने की मांग की जा रही थी। इधर कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ की ओर से 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा गया है कि, भाजपा विधायक समेत अन्य आरोपियों की 24 घंटे में गिरफ्तारी नहीं होने पर प्रदेशभर के तहसीलदार व राजस्व विभाग से जुड़े अन्य अधिकारी सामूहिक अवकाश पर रहेंगे।

इनका कहना है

”प्रशासनिक अधिकारी से सिटिंग विधायक के द्वारा की गई मारपीट के मामले पर कांग्रेस ने तीखा प्रहार किया है। पीसीसी के अध्यक्ष दीपक बैज ने इसे भाजपाइयों की गुंडागर्दी करार दिया है। उन्होंने कहा है कि सरकार के पास आम जनता तक पहुंचाने की कोई योजना ही नहीं है। इसलिए सुशासन तिहार में अधिकारियों को धमका रहे और अब अधिकारियों की पिटाई कर रहे हैं। मुख्यमंत्री को जवाब देना चाहिए कि वे अपने विधायक को जेल भेजेंगे कि नहीं।

 

”पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा है कि, एफआइआर दर्ज हुई है तो कोई न कोई घटना घटित हुई होगी। उन्होंने कहा है कि जिन माध्यम से आपको जनता ने जिम्मेदारी दी है, वहां आप मनमानी करने की अपेक्षा रखोगे तो वहां प्रजातंत्र नहीं रह जाता। आप आप चुने हुए प्रतिनिधि हैं।

”पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने कहा है कि ये तो सरासर अन्याय है। विष्णुदेव का सुशासन चल रहा है और अधिकारी पिटा रहे हैं। मारपीट में सबसे आपत्तिजनक बात विधायक का नाम आना है। विधायक और उनके साथियों द्वारा मारपीट की बात नायब तहसीलदार ने अपने बयान में बताया है। कोई भी जनप्रतिनिधि बनता है तो हमेशा नियम, प्रक्रिया, प्रशासनिक मर्यादा का ज्ञान होना चाहिए। अगर अधिकारी-कर्मचारी काम नहीं कर रहे हैं तो प्रक्रिया है, उन्हें ट्रांसफर करिए, सस्पेंड करिए। आप जनप्रतिनिधि हो गए हैं तो इसका मतलब यह थोड़ी है कि सिंघम स्टाइल में किसी से मारपीट करेंगे। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को भी निष्पक्ष और तटस्थ रहने की सलाह दी।

 

”विधायक राम कुमार टोप्पो ने कहा कि, बहन के साथ तहसीलदार ने दुर्व्यवहार किया, इसके बाद समर्थकों ने आक्रोश जाहिर किया, उन्होंने मारपीट नहीं की हैं।

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