अंबिकापुर। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा के निर्देशन में 20 वरिष्ठ आरक्षकों, महिला आरक्षकों को अपराधों की विवेचना में दक्ष करने सहायक जिला अभियोजन अधिकारी ने गुर सिखाए। अब पीड़ितों को न्याय दिलाने में वरिष्ठ आरक्षक भी अपनी भूमिका का निर्वहन करेंगे। शासन के निर्देशानुसार वरिष्ठ आरक्षक भारतीय न्याय संहिता के निर्धारित अध्याय के अंतर्गत आने वाले अपराधों की विवेचना करने के लिए स्वतंत्र होंगे।
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार ऐसे वरिष्ठ आरक्षक जिन्हें क्रमोन्नत वेतनमान मैट्रिक्स-06 प्रदान किया गया है, उन्हें भारतीय न्याय संहिता 2023 के विभिन्न अध्यायों के अंतर्गत उल्लिखित अपराधों का अन्वेषण करने का उत्तरदायित्व सौंपा गया है। इस अधिसूचना में भारतीय न्याय संहिता के अध्याय 5, 6, 11, 12, 13, 14, 15 और 17 के अंतर्गत आने वाले अपराध शामिल हैं। अधिसूचना के अनुपालन में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश कुमार अग्रवाल के दिशा-निर्देशन में जिले के क्रमोन्नत वेतनमान मैट्रिक्स-06 प्राप्त वरिष्ठ आरक्षकों को अन्वेषण का महत्वपूर्ण दायित्व प्रदान करने के क्रम में जिले के वरिष्ठ आरक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण कार्यशाला वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित की गई, प्रथम चरण में 20 वरिष्ठ आरक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य वरिष्ठ आरक्षकों को अपराधों के अन्वेषण हेतु आवश्यक ज्ञान और कौशल प्रदान करना था। प्रशिक्षण कार्यशाला में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने जिले के वरिष्ठ आरक्षकों को अपराध विवेचना के सम्बन्ध में बारीक तथ्यों की जानकारी देते हुए कहा कि शासन के निर्देशानुसार उन्हें अपराध विवेचना का कार्य सौंपा गया है। वरिष्ठ आरक्षक पूर्व से थाना, चौकी स्तर पर विवेचना में सहयोगी की भूमिका का निर्वहन करते आ रहे हैं, अब वरिष्ठ आरक्षकों को चिन्हांकित अपराधों का विवेचना स्वयं करना होगा। उन्होंने कहा अपराध विवेचना का बारिकी से ज्ञान होना आवश्यक है, आप सभी कार्यशाला में विवेचना के बारीकी तथ्यों को सीखें और आगामी दिनों में इसका विवेचना में पालन करना सुनिश्चित करें। सहायक जिला अभियोजन अधिकारी राजेश सिंह द्वारा वरिष्ठ आरक्षकों को अपराध विवेचना हेतु अध्याय 5 महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराध, अध्याय 6 मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाले अपराध, अध्याय 11 लोक प्रशांति के विरुद्ध अपराध, अध्याय 12 लोक सेवकों द्वारा या उनसे संबंधित अपराध, अध्याय 13 लोक सेवकों के विधिपूर्ण प्राधिकार के अवमान अपराध, अध्याय 14 मिथ्या साक्ष्य और लोक न्याय के विरुद्ध अपराध, अध्याय 15 लोक स्वास्थ्य, क्षेम, सुविधा, शिष्टता और सदाचार पर प्रभाव डालने वाले अपराध एवं अध्याय 17 संपत्ति के विरुद्ध अपराधों की जानकारी दी। प्रशिक्षण का उद्देश्य वरिष्ठ आरक्षकों को इन अपराधों की जटिलताओं को समझने और विवेचना के दौरान प्रभावी निर्णय लेने के लिए तैयार करना था। प्रशिक्षण कार्यशाला में रीडर सहायक उप निरीक्षक अमित पाण्डेय, शहरी थाना, चौकियों में पदस्थ वरिष्ठ आरक्षक, महिला आरक्षक शामिल रहे।

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