संसद भवन में सरगुजा सांसद ने रेल परियोजनाओं को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से पूछे थे सवाल, रामानुजगंज-गढ़वा सहायक लाइन को भी दी गई मंजूरी

अंबिकापुर। सरगुजा रेलवे संघर्ष समिति द्वारा अंबिकापुर-रेणुकूट रेलमार्ग की स्वीकृति को लेकर हल्ला बोल किया गया था। समिति द्वारा रेलवे के सर्वे के अनुसार अंबिकापुर-रेणुकूट रेलमार्ग को फायदे तथा अंबिकापुर-बरवाडीह रेलमार्ग को घाटे का सौदा बताया गया था। इधर सांसद चिंतामणि महाराज द्वारा संसद में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से सरगुजा क्षेत्र में रेल परियोजनाओं के संबंध में सवाल पूछे गए, इसके जवाब में रेल मंत्री ने कहा अंबिकापुर-रामानुजगंज-बरवाडीह तथा रामानुजगंज-गढ़वा रेलमार्ग को मंजूरी दे दी गई है। इससे सरगुजा वासियों के उस उम्मीद को झटका लगा, जिसमें अंबिकापुर-रेणुकूट रेलमार्ग की मांग की गई थी।

संसद के पटल पर सांसद चिंतामणि महाराज द्वारा पूछे गए सवाल पर रेलमंत्री ने कहा कि अंबिकापुर क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मजबूत करने के उद्देश्य से दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर मंडल में कई महत्वपूर्ण सर्वेक्षण एवं परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। रेलमंत्री ने बताया कि बौरीडांड़-अंबिकापुर-सुरजपुर दोहरीकरण परियोजना 80 किलोमीटर पर कार्य आरंभ किया जा चुका है। अंबिकापुर-रामानुजगंज-बरवाडीह नई रेल लाइन तथा रामानुजगंज-गढ़वा रोड सहायक लाइन 262 किलोमीटर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है। इसी प्रकार सरडेगा-पत्थलगांव-अंबिकापुर नई रेल लाइन 218 किलोमीटर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट भी पूर्ण कर ली गई है।

छत्तीसगढ़ के लिए रेल बजट में हुई वृद्धि
रेल मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ के लिए रेल बजट आवंटन में काफी वृद्धि हुई है। वर्ष 2009-14 के दौरान जहां औसत वार्षिक आवंटन 311 करोड़ रुपये था, वहीं वर्ष 2025-26 में यह बढक़र 6 हजार 925 करोड़ रुपये हो गया है, यह वृद्धि 22 गुना से अधिक है। उन्होंने यह भी कहा कि नए रेल लाइनों का कमीशनिंग भी महत्वपूर्ण रूप से बढ़ा है। वर्ष 2009-14 के दौरान केवल 32 किलोमीटर (औसत 6.4 किलोमीटर प्रति वर्ष) रेल लाइनें कमीशन की गई थीं, जबकि वर्ष 2024-25 के दौरान 1 हजार 189 किलोमीटर (औसत 108.1 किलोमीटर प्रति वर्ष) रेल लाइनें कमीशन की गई, यह 15 गुना से अधिक की वृद्धि है।

ये काम हुए हैं स्वीकृत
रेल मंत्री ने बताया कि 1 अप्रैल 2025 की स्थिति में छत्तीसगढ़ राज्य में आंशिक या पूर्ण रूप से स्थित कुल 26 रेल परियोजनाएं (6 नई लाइनें और 20 दोहरीकरण व मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएं), 1 हजार 931 किलोमीटर लंबाई एवं 31 हजार 619 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से स्वीकृत की गई हैं। इनमें से 1 हजार 23 किलोमीटर लंबाई का कमीशनिंग पूर्ण किया जा चुका है तथा मार्च 2025 तक 16 हजार 325 करोड़ रुपये का व्यय किया गया है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में अंबिकापुर क्षेत्र सहित पिछले 3 वर्षों तथा चालू वित्त वर्ष (2022-23, 2023-24, 2024-25 एवं 2025-26) में कुल 26 सर्वेक्षणों को कुल 3 हजार 901 किलोमीटर लंबाई को कवर करते हुए स्वीकृति प्रदान की गई है।

लंबे समय से है अंबिकापुर-रेणुकूट रेलमार्ग की मांग
सरगुजा वासियों द्वारा लंबे समय से अंबिकापुर-रेणुकूट रेललाइन की मांग की जा रही है। इसकी डीपीआर अक्टूबर 2023 में रेलवे को सौंप दी गई थी। परियोजना की व्यवहारिकता और आर्थिक लाभ को देखते हुए छत्तीसगढ़ विधानसभा ने इसके लिए एक प्रस्ताव पारित किया था। अंबिकापुर-रेणुकूट रेल लाइन उत्तर छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिससे धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक लाभ होंगे। यह दिल्ली, बनारस, कोलकाता, जबलपुर जैसे प्रमुख शहरों के लिए कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगा, जिससे यात्रा का समय कम होगा। यह औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा देगा। अंबिकापुर-बरवाडीह रेल मार्ग के विपरीत, अंबिकापुर-रेणुकूट मार्ग को आर्थिक और व्यवहारिक दृष्टि से बेहतर माना जा रहा है। बरवाडीह-रेणुकूट मार्ग के लिए पहले ही एक रेलवे लाइन बन चुकी है, जिससे अंबिकापुर-रेणुकूट मार्ग को वैकल्पिक और कम दूरी का माना जा रहा है।

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