छल का शिकार हुए दंपती पहुंचे थे उपभोक्ता आयोग की शरण में, मिली राहत

अंबिकापुर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग सरगुजा ने एक परिवाद में अंतिम तर्क के बाद मेसर्स अंश बिल्डर्स के प्रोपराइटर को आगामी 30 दिनों के भीतर अग्रिम के रूप में प्राप्त राशि व परिवादी द्वारा बैंक के माध्यम से प्राप्त राशि 18 लाख 40 हजार रुपये भुगतान करने व उक्त राशि पर आदेश दिनांक से 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर से ब्याज की राशि देने का आदेश पारित किया है।

उत्तर प्रदेश के केन्द्रीय विद्यालय महोबा में शिक्षक के पद पर पदस्थ श्रीमती ऋचा यादव 48 वर्ष व स्वास्थ्य विभाग में ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक के पद पर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र लटोरी में पदस्थ उनके पति आलोक कुमार यादव पिता स्व. महावीर प्रसाद यादव 48 वर्ष द्वय निवासी सी-6, रावत रेसीडेन्सी, मनेन्द्रगढ़ रोड, अंबिकापुर ने अपने अधिवक्ता प्रियेश सिंह के माध्यम से जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग सरगुजा में बिल्डर के विरूद्ध परिवाद दायर कराया था। इसमें उल्लेख किया गया था कि निर्माणाधीन बरसाना रेसिडेंसी कॉलोनी अजिरमा, थाना जयनगर, तहसील व जिला सूरजपुर में 3 बीएचके के दो मंजिला आवासीय मकान की भूमि, भवन का पंजीयन बिल्डर के द्वारा 18 लाख 40 हजार रुपये भुगतान करने के बाद भी नहीं किया जा रहा है। वहीं केनरा बैंक के शाखा प्रबंधक अंबिकापुर, द्वारा अंश बिल्डर्स को उनके बिना बगैर सहमति के एकमुश्त 13 लाख 90 हजार रुपये का भुगतान कर दिया गया। परिवादियों ने मेसर्स अंश बिल्डर्स, रेल्वे स्टेशन के पीछे ठाकुरपुर, पंकज सिंह प्रबंधक मेसर्स अंश बिल्डर्स व नेहा सिंह पति पंकज सिंह को दी गई नगद राशि चार लाख 50 हजार रुपये ब्याज सहित वापस कराने या नगद राशि एवं मय ब्याज की राशि के बराबर की आवासीय भूमि बरसाना रेसीडेंसी कॉलोनी में रजिस्ट्री कराकर देने एवं केनरा बैंक से प्राप्त गृह ऋण से उन्मुक्त करने एवं जो धनराशि ईएमआई के रूप में प्राप्त किया है, उसे मय ब्याज के साथ परिवादियों को दिलाने सहित मानसिक एवं शारीरिक कष्ट की क्षति हेतु 50-50 हजार रुपये अनावेदकों से संयुक्त व पृथक से दिलाने परिवाद दायर कराया था।

यह था मामला
मेसर्स अंश बिल्डर्स ने रेसीडेंसी कालोनी की सम्पत्ति अंतर्गत 1150 वर्गफुट 23.50 क्षेत्रफल पर एक बेडरूम, हॉल, किचन का आवासीय भवन, स्ट्रीट नंबर-बी, के प्लाट नंबर 20 के रूप में चिन्हांकित व नामांकित किया था। भवन का भू-तल 658.50 वर्गफुट तथा प्रथम तल 620.00 वर्गफुट में निर्माण होना प्रस्तावित एवं योजनाधीन था, जो ग्राम ठाकुरपुर प.ह.नं. 57. रा.नि.मं. अंबिकापुर-1, तहसील अंबिकापुर में स्थित है, भूमि विधिवत व्यपवर्तित है। इसे क्रय करने के लिए अनुबंध पत्र 01.11.2015 को निष्पादित किया गया था, जिसके अनुसार परिवादी ने बिल्डर को 14.01.2014 को एक लाख 50 हजार रुपये, 10.05.2014 को 20 हजार रुपये, 28.07.2014 को 30 हजार रुपये, इसके बाद दो लाख 50 हजार रुपये भुगतान किया, इसकी रसीद बिल्डर्स ने परिवादियों को प्रदान की थी। मकान क्रय करने हेतु एकमुश्त रुपये का अभाव होने के कारण इन्होंने गृह ऋण बावत केनरा बैंक से संपर्क किया, यहां से 18 लाख रुपये गृह ऋण की स्वीकृति प्रदान की गई थी।

जिला उपभोक्ता आयोग ने पारित किया आदेश
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग सरगुजा के अध्यक्ष राकेश पाण्डेय, सदस्य द्वय नवनी कांत दत्ता व अर्चना सिन्हा ने बिल्डर्स एवं बैंक के विरुद्ध सेवा में कमी के तथ्य प्रमाणित होने पर प्रकरण स्वीकार करने के बाद प्रश्नाधीन मकान/भवन के संबंध में अनावेदक बिल्डर व बैंक के विरुद्ध संयुक्त व पृथक-पृथक आदेश पारित किया है। इसमें उल्लेख है कि अनावेदक क्रमांक 1, 2 एवं 3 मेसर्स अंश बिल्डर्स, पंकज सिंह प्रबंधक मेसर्स अंश बिल्डर्स व नेहा सिंह पति पंकज सिंह द्वारा परिवादी क्रमांक-1 को आदेश दिनांक से तीन माह के भीतर त्रिपक्षीय समझौते में उल्लेखित प्रश्नाधीन भूमि भवन का विक्रय विलेख पंजीयन कराकर प्रदान करेगा। बिल्डर्स आदेश के पालन में असफल रहता है तो उसे आगामी 30 दिनों के भीतर अग्रिम के रूप में परिवादी व बैंक के माध्यम से प्राप्त राशि कुल 18 लाख 40 हजार रुपये परिवादी के अनावेदक बैंक में संचालित प्रश्नाधीन ऋण खाता में भुगतान करेगा, साथ ही उक्त राशि पर आदेश दिनांक से आठ प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर से ब्याज की राशि प्रदान करना होगा। बिल्डर्स द्वारा आदेश की कंडिका का पालन नहीं किए जाने की स्थिति में आदेश दिनांक से 60 दिनों के पश्चात बैंक त्रिपक्षीय समझौते के अनुसार प्रश्नाधीन भूमि/भवन के पक्ष में प्राप्त की गई समस्त अग्रिम राशि को अनावेदक क्र. 1. 2 एवं 3 (बिल्डर्स) से प्राप्त करने हेतु वैधानिक कार्रवाई कर सकता है तथा प्राप्त रकम को परिवादी के ऋण खाता में समायोजित करने के पश्चात शेष व अतिदेय राशि की वसूली, भुगतान के लिए आवश्यक कार्रवाई कर सकता है। इसके अलावा अनावेदकों बिल्डर्स व बैंक को संयुक्त व पृथक-पृथक परिवादी को पहुंची आर्थिक व मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में दस हजार रुपये प्रदाय करने व वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये प्रदान करने के लिए कहा गया है।  

Categorized in: