साइबर अपराध की कड़ी खंगालने में सामने आया नवयुवकों का चेहरा

अंबिकापुर। पैसों के लालच में अपने बैंक का खाता किसी को देना सजा से कम नहीं है। इसके बाद भी शहर के नवयुवक कुछ पैसों के लालच से साइबर अपराध में शामिल हो रहे हैं, यह चिंतनीय पहलू है। सरगुजा पुलिस ने आम नागरिकों से स्वयं के बैंक खाता एवं सिम कार्ड का दुरुपयोग होने से बचाने की अपील की है।

जानकारी के मुताबिक, प्रार्थी सुजीत मंडल पिता सुकुमार मंडल ग्राम पंचायत सकालो की रिपोर्ट पर थाना गांधीनगर में धारा 318(4) बीएनएस पंजीबद्ध करके विवेचना में लिया गया। विवेचना दौरान 18.11.25 को आरोपी अनीश गिरी, सद्दाम आलम, वर्षा सिंह पोर्ते को गिरफ्तार करके न्यायिक रिमांड पर भेजा गया था। प्रकरण के अन्य आरोपियों की पतासाजी दौरान विधि से संघर्षरत बालक से पूछताछ के दौरान पता चला कि अंबिकापुर के नवयुवक भी गेमिंग व फ्रॉड से संबधित रुपये उनके तथा अन्य लोगों के खाता में प्राप्त करके एटीएएम के माध्यम से आहरण कर अन्य बैंक खातों में सीडीएम मशीन के माध्यम से डिपॉजिट किया करते थे, जिससे उन्हें कमीशन मिलता था। सूचना पर पुलिस टीम द्वारा 10 आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ किया गया तो सभी ने जुर्म स्वीकार किया। आरोपियों के बैंक खाते की जांच दौरान पता चला कि अन्य राज्यों में भी इनके बैंक खातों के विरुद्ध रिपोर्ट पंजीबद्ध है। आरोपियों के कब्जे से 10 नग मोबाइल जप्त कर विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है। आरोपियों द्वारा कुछ पैसों के लालच में खुद के खाते को मिल आउट की तरह प्रयोग में लाने के लिए दिया तथा साथ में सहभागिता करते हुए स्वयं से एटीएम से पैसे निकालकर दूसरे खातों में पैसे का स्थानांतरण किया। सरगुजा पुलिस ने सभी अभिभावकों और शिक्षकों से आग्रह किया है कि, सभी बच्चों को इस प्रकार के लालच से दूर रहने के बारे में समझाइस दें तथा कभी भी अपना खाता या सिम कार्ड को किसी अन्य को ना दें। इनका थोड़ा सा लालच बड़ी सजा का कारक बन सकता है। साइबर अपराधियों के लिए म्यूल नहीं बनने का भी आग्रह किया गया है। कार्रवाई में थाना प्रभारी गांधीनगर निरीक्षक प्रवीण द्विवेदी, प्रधान आरक्षक सुधीर सिंह, आरक्षक अमृत सिंह, अरविंद उपाध्याय, ऋषभ सिंह, साइबर थाने से प्रवीण प्रताप सिंह एवं विकास तिर्की की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सरगुजा पुलिस ने सभी नागरिकों से अपील की है कि, अपने मोबाइल फोन, सिम कार्ड अथवा बैंक खाते किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग हेतु न दें और न ही बेचें। ऐसा करना गैरकानूनी है तथा आपके बैंक खाते या मोबाइल नंबर का उपयोग साइबर अपराध, ऑनलाइन ठगी एवं अन्य अवैधानिक गतिविधियों में किया जा सकता है, इसके लिए आपके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।

ऐसे रहें सावधान और सुरक्षित

किसी प्रकार के लालच, झांसे या फर्जी ऑफर में न फंसें। कम समय में अधिक मुनाफा, घर बैठे पैसे कमाएं, आसान ऑनलाइन इनकम जैसे प्रलोभन अक्सर साइबर ठगी के तरीके होते हैं। अपने बैंक खाते, ओटीपी, एटीएम पिन, यूपीआई पिन, पासवर्ड एवं व्यक्तिगत जानकारी किसी के साथ साझा न करें। अनजान लिंक, कॉल एवं मैसेज से सतर्क रहें। साइबर फ्रॉड से बचें, जागरूक बनें और दूसरों को भी जागरूक करें। न स्वयं साइबर अपराध का हिस्सा बनें और न ही किसी अन्य को बनने दें।

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