मधुमक्खी के काटने पर पहुंचे थे नामचीन जीवन ज्योति अस्पताल
पुत्र ने कहा-डॉक्टर ने डिस्चार्ज करने कहा था, पहुंचा दिया आईसीयू में
अंबिकापुर। शहर का सबसे चर्चित और महंगे अस्पताल जीवन ज्योति एक बार फिर लापरवाही के कारण सवालों के घेरे में है। सामने यह आ रहा है कि, यहां इलाज कराने आए मरीज भगवान भरोसे हैं और मैनेजमेंट मुनाफा भरोसे है। नतीजा-एक गलत इंजेक्शन और जिंदगी वेंटिलेटर पर। यह हम नहीं मरीज के संबंधी कह रहे हैं। गलत इंजेक्शन लगाने के कारण जिस महिला को डिस्चार्ज होना था, वह आईसीयू, वेंटीलेटर तक पहुंच गई। पीड़िता के पुत्र ने पीड़ित मां को गलत इंजेक्शन लगाने से हालत बिगड़ने का आरोप मीडिया के समक्ष लगाया है।
पीड़िता के पुत्र राजेश साहू का कहना है कि, उनकी मां श्रीमती साहू को 11 अगस्त को मधुमक्खी काटने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया था। डॉक्टर ने डिस्चार्ज करने कहा था और मां की हालत ठीक थी। सुबह सीमा नाम के नर्स ने इंजेक्शन लगाया, इसके तुरंत बाद वे बेहोश हो गईं। डॉक्टर ने कहा कि ब्लड प्रेशर लो हो गया है, मरीज को आईसीयू में वेंटिलेटर पर रखना पड़ेगा। जिस मरीज को डिस्चार्ज करने की बात हो रही थी, उन्हें आईसीयू और वेंटीलेटर की जरूरत बताने पर स्वजन भौचक रह गए। जानकारी लेने पर पता चला कि मरीज को गलत इंजेक्शन लगाने के बाद ऐसे हालात बने हैं। राजेश का कहना है कि नर्स ने खुद स्वीकार किया कि इंजेक्शन गलत दे दिया गया, जिस कारण ऐसा हुआ। वह इंजेक्शन आईसीयू सर्जिकल में लगाने वाला था, लेकिन नॉर्मल वार्ड में लगाने के लिए दे दिया गया। इससे व्यथित राजेश साहू ने कहा कि जहां मरीजों के जान के साथ खिलवाड़ की स्थिति बन रही हो, ऐसे हॉस्पिटल को या तो बंद कर देना चाहिए या फिर मैनेजमेंट को इसकी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेनी चाहिए। आज उनकी मां के साथ ऐसा हुआ, कल किसी और के साथ होगा।
बता दें कि, जीवन ज्योति में पहले भी इलाज में लापरवाही से मरीजों की मौत के मामले आ चुके हैं। कई बार हंगामा की स्थिति भी बनी है। भर्ती मरीज की मौत के बाद भुगतान के लिए शव को बंधक बनाने जैसा मामला भी पूर्व में आ चुका है। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन जोड़-तोड़ लगाने की कोशिश में लग जाता है, जिससे यहां मरीजों के जान से खिलवाड़ जैसी नौबत बन रही है। इस बार तो प्रबंधन ने डिस्चार्ज की जाने वाली महिला के जान की परवाह किए बगैर बड़ी साफगोई से फार्मेसी और स्टाफ पर ठीकरा फोड़ दिया। इंजेक्शन के नाम की समानता को वजह बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना कहां तक उचित है। सवाल ये है कि मरीज की जान की कीमत सिर्फ ‘नाम की गलती’ है?
अस्पताल प्रबंधन ने डॉक्टर, मैनेजमेंट की गलती को नकारा
गलत इंजेक्शन लगने से मरीज की तबियत बिगड़ने के मामले में अस्पताल प्रशासन की ओर से डॉ. आकाश सिंह के द्वारा दी गई सफाई चौंकाने वाली है। प्रबंधन की ओर से इस लापरवाही को सामान्य तरीके से लेकर स्वीकार किया गया कि, मरीज को डिस्चार्ज होना था। डिस्चार्ज से पहले डॉक्टर ने डेक्सोना इंजेक्शन लिखकर दिया था, जो स्टेरॉयड होता है। फार्मेसी में गलती से ‘डेक्सोना’ की जगह ‘डेक्सन’ दे दिया गया। नाम मिलता-जुलता होने के कारण यह चूक हुई। इसके बाद वार्ड की नर्स ने भी बिना जांचे यह इंजेक्शन मरीज को लगा दिया। उन्होंने कहा डेक्सन एक तरह की नींद का इंजेक्शन है जो आमतौर पर गंभीर मरीजों को दी जाती है। बहरहाल प्रबंधन ने बड़ी साफगोई से पल्ला झाड़ने के लिए कह दिया कि, ‘डॉक्टर, मैनेजमेंट से कोई गलती नहीं हुई है। दवा मिलता-जुलता नाम का होने के कारण गलती से फार्मासिस्ट ने दे दिया।’ लेकिन ऐसी लापरवाही के बीच किसी की जान चली गई जाए, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा, यह स्पष्ट नहीं किया।
