आईजी ने की 578 दोषमुक्ति प्रकरणों की रेंज स्तरीय समीक्षा

अंबिकापुर। पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज दीपक कुमार झा के नेतृत्व में गुरूवार को पुलिस कोऑर्डिनेशन सेंटर, सरगुजा भवन अंबिकापुर में रेंज स्तरीय दोषमुक्ति प्रकरणों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में मई एवं जून माह के सेशन न्यायालय के 174 एवं लेबर न्यायालय के 404 कुल 578 दोषमुक्ति प्रकरणों की बिन्दुवार समीक्षा की गई।

आईजी ने निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में हर माह के मंगलवार को होने वाली बैठक में लंबित प्रकरणों की समीक्षा अनिवार्य रूप से की जाए। दोषमुक्ति के कारणों और विवेचना की त्रुटियों को चिन्हित कर साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय में मजबूती से पक्ष रखा जाए, ताकि दोषसिद्धि के आंकड़ों में वृद्धि हो। उन्होंने कहा कि ई-अभियोग पक्ष के तहत जिला अभियोजन अधिकारी को अभियोग पत्र न्यायालय में पेश करने के पर्याप्त समय पूर्व भेजा जाए। इससे पत्र में रह गई कमियों को समय रहते दूर किया जा सके और आरोपी को उसका लाभ न मिले। बैठक में उमनि/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सरगुजा राजेश अग्रवाल, जशपुर लाल उमेद सिंह, कोरिया हरिश राठौर, बलरामपुर वैभव बैंकर, एमसीबी रत्ना सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक योगेश देवांगन सहित संभाग के लोक अभियोजन अधिकारी एवं कार्यालयीन स्टाफ उपस्थित रहे।

62 प्रकरणों में दोषसिद्धि पर सराहना  

न्यायालय द्वारा मई-जून में सेशन कोर्ट के 62 प्रकरणों में दोषसिद्धि हुई है। इसमें हत्या के 18, हत्या के प्रयास के 12, बलात्कार के 08, एससी/एसटी एक्ट के 11, पॉक्सो एक्ट के 04, एनडीपीएस एक्ट के 07 एवं भ्रष्टाचार/ठगी के 02 प्रकरण शामिल हैं। आईजी ने दोषसिद्धि में वृद्धि पर संबंधित जिला अधिकारियों की सराहना की और कहा कि विवेचना के प्रारंभ से ही साक्ष्यों को सूक्ष्मता से संकलित कर केश डायरी में भौतिक साक्ष्य एवं गवाहों के कथन न्यायालय में प्रस्तुत किए जाएं।

पक्षद्रोही होने पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश  

बलात्कार एवं पॉक्सो एक्ट के मामलों में लोक अभियोजक द्वारा पीड़िता का धारा-164 जाफौ/धारा 183 बीएनएसएस का न्यायालयीन कथन विचारण के दौरान ई-प्रदर्शन कराना अनिवार्य किया, ताकि पीड़िता विचारण में पक्षद्रोही हो तो उसके विरुद्ध धारा-344 दप्रसं/धारा-383 बीएनएसएस के तहत कार्रवाई की जा सके। इसी तरह झूठी रिपोर्ट करने वाले के विरुद्ध खारिजी स्वीकृति के बाद धारा-182, 211 भादसं/धारा 217, 248 बीएनएस के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

अन्य महत्वपूर्ण निर्देश  

आईजी ने सात वर्ष से अधिक सजा वाले प्रकरणों में एफएसएल अधिकारियों की उपस्थिति में घटनास्थल का निरीक्षण कर भौतिक एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्य संकलित करने, एनडीपीएस एक्ट के प्रकरणों में आज्ञापक प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने, विवेचकों का रिफ्रेशर कोर्स कराने कहा, ताकि विवेचना में त्रुटि न हो।

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