बिलासपुर। ‘बिलासपुर नसबंदी कांड’ में करीब 11 साल बाद अदालत ने फैसला देते हुए ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर आर.के. गुप्ता को गैर इरादतन हत्या का दोषी पाते हुए उन्हें दो साल के कारावास की सजा सुनाई है, साथ ही प्रत्येक महिला की मौत को लेकर उन पर 25-25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। यानी करीब तीन लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। इसके अलावा डॉ. गुप्ता को अन्य आरोपों में भी सजा सुनाई गई है, जिसमें एक धारा के तहत छह महीने की सजा और 500 रुपए का जुर्माना, और दूसरी धारा के तहत एक महीने की सजा और 100 रुपए का जुर्माना शामिल है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।

यह मामला बिलासपुर जिले के तखतपुर ब्लॉक में सकरी गांव के पास पेंडारी में स्थित एक अस्पताल में आयोजित नसबंदी कैंप से जुड़ा है। जहां पर 8 नवंबर, 2014 को आयोजित कैंप में आसपास के ग्रामीण इलाकों से कुल 83 महिलाओं ने नसबंदी करवाई थी और सर्जरी के बाद उन्हें उसी शाम घर भेज दिया गया था। लेकिन घर जाने पर उनमें से 50 से ज्यादा महिलाओं की तबीयत बिगड़ गई थी और वे गंभीर रूप से बीमार पड़ गईं थीं। बाद में इनमें से 12 ने दम तोड़ दिया था।

देवेंद्र सोमवार ने दी फैसले की जानकारी
फैसले की जानकारी देते हुए अतिरिक्त लोक अभियोजक देवेंद्र राव सोमवार ने बुधवार को बताया कि ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर आर.के. गुप्ता को मंगलवार को प्रथम जिला और अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शैलेश कुमार केतारप ने ‘गैर-इरादतन हत्या’ का दोषी ठहराते हुए दो साल की सजा सुनाई। साथ ही अदालत ने डॉक्टर पर 12 मौतों में से प्रत्येक महिला की मौत के लिए 25-25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

सर्जरी के दौरान कथित लापरवाही से हुई थी मौत
अभियोजन पक्ष के अनुसार, डॉ. गुप्ता पर एक बंद पड़े निजी अस्पताल में दो सहायकों की मदद से छह घंटे के भीतर 80 से ज्यादा महिलाओं की ट्यूबेक्टॉमी (नसबंदी) करने का आरोप था। इस मामले की जांच करने वाले एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने इन मौतों का कारण घोर चिकित्सकीय लापरवाही, घटिया और जहरीली दवाओं का इस्तेमाल, और निर्धारित दिशानिर्देशों का उल्लंघन बताया था। अभियोजन पक्ष ने कहा कि ये मौतें सर्जरी के दौरान कथित लापरवाही के कारण हुए सेप्टीसीमिया (रक्त संक्रमण) और सर्जरी के बाद दी गई दूषित दवाओं से जुड़ी थीं। अभियोजन पक्ष के अनुसार उस समय जिला अस्पताल में वरिष्ठ सर्जन रहे डॉ. गुप्ता ने कुछ ही घंटों में सभी सर्जरी कर दी थीं।

सबूतों के अभाव के कारण दवा कंपनियों के लोग हुए बरी
इस मामले में पुलिस ने दो दवा आपूर्ति कंपनियों से जुड़े पांच अन्य लोगों के खिलाफ भी आरोप पत्र दायर किया था, हालांकि, अदालत ने इन पांच लोगों को बरी कर दिया है। इनमें महावर फार्मा के रमेश और सुमित महावर और कविता फार्मास्यूटिकल्स के राकेश, राजेश और मनीष खरे शामिल हैं। अदालत ने इन दवा कंपनियों के प्रतिनिधियों के खिलाफ सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए उन्हें बरी किया। अभियोजन पक्ष ने कहा कि चूंकि गुप्ता को सुनाई गई सजा तीन साल से कम है, इसलिए अदालत ने कानूनी प्रावधानों के तहत उन्हें जमानत दे दी।

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