एक महिला पति और भाई को खोई, बेटे के मौत की खबर से माता-पिता की तबियत बिगड़ी

गिरिजा कुमार ठाकुर
अंबिकापुर। सरगुजा जिले के जनपद पंचायत बतौली अंतर्गत ग्राम सिलसिला स्थित मां कुदरगढ़ी एलुमिना हाइड्रेट प्लांट में रविवार की सुबह 11 बजे बॉयलर का कोयला बंकर अचानक टूटकर गिरने से महज 05 घंटे के अंतराल में 04 युवकों की दर्दनाक मौत के बाद शासन-प्रशासन और कांग्रेस ने जांच दल का गठन किया है। शहर के अस्पताल में एक युवक का इलाज चल रहा है, जिसे रांची ले जाने की तैयारी में स्वजन हैं। बड़ी बात यह है कि बड़े और गंभीर हादसे में चार लोगों की मौत के बाद भी प्लांट के जीएम सहित अन्य जिम्मेदारों ने अस्पताल आकर इनका सुध लेना उचित नहीं समझा। प्लांट इंचार्ज जो कुछ पूछने पर ऐंठन भरी जुबां बोलने में लगा था, वह मृतकों के स्वजनों को इधर-उधर नचाते रहा। बाद में शव ले जाने के लिए एंबुलेंस की सुविधा, अंतिम संस्कार के लिए 15-15 हजार रुपये और खाने-पीने का खर्च तहसीलदार वाईके यादव की मौजूदगी में देकर बला टालने का काम प्लांट प्रबंधन ने किया। इधर हादसे में मृत करण, मनोज सहित अन्य के मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया हटने का मलाल स्वजनों को रहा।
हादसे की खबर के बाद अंबिकापुर पहुंचे मृतक के स्वजन कंपनी की ओर से बरती गई घोर लापरवाही से मर्माहत हैं। इनका कहना है कि यहां आने के बाद उनकी सुध लेने प्लांट का कोई जिम्मेदार नहीं पहुंचा। आलम यह रहा कि उनके संबंधी जिंदा हैं या मौत हो गई, शव दिखाने, मिलवाने वाला कोई नहीं था। कुछ दलाल किस्म के लोग उन्हें गुमराह कर रहे थे। उनकी रात अनजान शहर में कैसे बीती, इसे वे शब्दों में बयां नहीं कर सकते हैं। बड़ी बात यह है कि जिन मजदूरों की मौत हुई है उन्हें ठेका कंपनी की ओर से भेजे माह भर भी नहीं हुए हैं। इन्हें जिस ठेकेदार के द्वारा कंपनी में काम करने के लिए लाया गया था, उसके द्वारा कंपनी के हवाले करने के पहले किसी प्रकार का अनुबंध पत्र या कागजात उपलब्ध कराया गया हो, श्रम कानून का पालन किया गया हो, ऐसा सामने नहीं आया है। घटना के बाद यह भी सामने आया कि स्थानीय मजदूरों को कामचोर, निकम्मा बताकर बाहरी लोगों को प्रश्रय देने का काम कंपनी कर रही है। इस घटना में एक महिला ने अपने जवान भाई और पति दोनों को खो दिया है। पति (मनोज सिंह राजपूत पिता मुलु सिंह 30 वर्ष, निवासी सिंगपुर थाना देवरी, जिला सागर मध्य प्रदेश) के मौत की खबर पर गुजरात में काम कर रही महिला अपने 11 वर्षीय बेटे के साथ बदहवास निकली है, जिसे स्वजनों ने अंबिकापुर आने से रोका। वहीं भाई प्रिंस सिंह पिता धनराज 32 वर्ष निवासी बिछिया जिला मंडला मध्य प्रदेश की भी घटना में मौत हो गई है। प्रिंस का शव लेने उसके चाचा मेघराज राजपूत अंबिकापुर पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि प्रिंस के माता-पिता को जैसे ही बेटे की मौत की खबर मिली वे इस सदमा को बर्दाश्त नहीं कर पाए और उनकी स्थिति इतनी बिगड़ गई कि वे अपने बेटे का शव लेने के लिए अंबिकापुर आ पाने की स्थिति में नहीं हैं, उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाने के बाद वे अंबिकापुर आए हैं। यहां आने के बाद उन्हें जिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, इस वेदना को बताते हुए वे रो पड़े। उन्होंने कहा न जाने जवान बेटे का चीरफाड़ के बाद शव देखकर भाई साहब की क्या हालत होगी। यहां आने पर कुछ लोगों ने कहा शव ले जाने की व्यवस्था कंपनी कर देगी। जवान बेटे की मौत हो गई, जो अपने माता-पिता का सहारा बनने काम कर रहा था। जवान बच्चे का जीवन समाप्त हो गया। मृतकों के स्वजन मेघराज और सुशील ने कहा कि नवयुवकों को मौत के मुहाने में असुरक्षित तरीके से काम करने के लिए भेजने वाले और कंपनी के जीएम सहित अन्य जिम्मेदारों पर अपराध पंजीबद्ध होना चाहिए। मृतकों के स्वजन को कम से कम दो करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाना चाहिए।
आगाह कराने के बाद भी कोयला भरते रहे

प्लांट में काम करने के लिए आए कुछ मजदूरों ने बताया कि जब वे सिलसिला में स्थित एल्युमिना प्लांट में काम करने के लिए आए थे तो बंकर में भूसा की जगह ओवरलोड कोयला भरने पर हादसे की संभावना व्यक्त की थी, लेकिन उनकी बातों को अनसुना कर दिया गया। उन्होंने बताया कि प्लांट में बराबर सपोर्ट नहीं लगा था, एंगल भी मजबूत नहीं था। अगर इस ओर पहले ध्यान दिया गया होता, तो ऐसी गंभीर परिस्थिति नहीं बनती। इसके पहले एक मजदूर के करंट से झुलसने की बात भी इनके द्वारा सामने लाई गई।
डब्ल्यूसी पॉलिसी के तहत करेंगे 16 लाख भुगतान

प्लांट इंचार्ज राकेश कुमार चंद्रवंशी ने बताया कि जो मजदूर काम करने के लिए अंबिकापुर प्लांट में आए हैं, वे वर्षों से ठेके पर काम कर रहे हैं। उसने बताया कि प्लांट का संचालन दो शिफ्ट में सुबह 7 बजे से 2 बजे तक और अपरान्ह में 3 बजे से किया जाता है। जिन मजूदरों की मौत हुई है, वे 22 मजदूरों के साथ टेक डी कंपनी के प्रमुख विपिन मिश्रा के मार्फत सरगुजा के सिलसिला प्लांट में पहुंचे थे। राकेश ने बताया कि बीते 26 अगस्त से प्लांट का काम शुरू हुआ है। उसका कहना है कि मृत मजदूरों के स्वजनों को डब्ल्यूसी पॉलिसी के तहत लगभग 16 लाख रुपये का बीमा धन प्राप्त होगा। इसकी प्रक्रिया मृतकों का मृत्यु प्रमाण पत्र मिलने के बाद शुरू होगी। इस संबंध में तहसीलदार को लिखित में मां कुदरगढ़ी एलुमिना हाइड्रेट प्लांट प्रबंधन की ओर से दिया गया है।
तीन एंबुलेस में मृतकों का शव लेकर निकले स्वजन

अंबिकापुर पहुंचे मृतक के स्वजन पहले तो शव को उचित मुआवजा नहीं मिलने तक ले जाने के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन मान-मनौव्वल करने में कंपनी के काफी कर्ताधर्ता लगे थे। आनन-फानन में शव को गृहग्राम तक भेजने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था भी की गई। लंबी दूरी होने के कारण एयरकंडीशन युक्त एंबुलेंस से शव को भेजा गया। करणवीर मांझी पिता कारू मांझी 35 वर्ष व रामेश्वर माझी पिता जनक माझी 45 वर्ष निवासी फतेहपुर के शव को एक एंबुलेंस में रवाना किया गया। वहीं प्रिंस सिंह 32 वर्ष निवासी बिछिया जिला मंडला मध्य प्रदेश व मनोज सिंह राजपूत 30 वर्ष निवासी सिंगपुर जिला सागर मध्य प्रदेश के शवों को दो अलग-अलग एंबुलेंस से रवाना किया गया। पुलिस की ओर से शव सुपुर्दगी के बाद अनापत्ति प्रमाण पत्र व दाह संस्कार के लिए दिए गए 15-15 हजार रुपये व रास्ते में खर्च के लिए दिए गए दो हजार रुपये की रसीद उपलब्ध कराई गई, ताकि रास्ते में किसी प्रकार की बाधा न हो। अन्य शोक कार्यक्रम के लिए कंपनी की ओर से पृथक से राशि देने की बात कही गई है।

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