पहली बार सरगुजा जिला अध्यक्ष बने और भाजपा को तीनों विधानसभा सीटें दी
अपने ही घर में सेंध लगाने वाले असंतुष्टों को संतुष्ट करने का तोड़ भी निकाला

 

अंबिकापुर। सरगुजा जिले की तीनों विधानसभा सीटों से चुनाव में भाजपा की जीत के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि किसी भी पार्टी में संगठन का प्रतिनिधित्व करने वाला दमदार होना चाहिए। ऐसी ही दमदारी दिखाई पहली बार भाजपा के जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी निर्वहन कर रहे ललन प्रताप सिंह ने। इनके नेतृत्व में न सिर्फ कार्यकर्ता एकजुट रहे बल्कि उन्होंने समय-समय पर पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को उनके दायित्व का बोध भी कराया। पार्टी के वरिष्ठजनों को यथोचित सम्मान और स्थान मिले, इसके लिए भी वे लगे रहे। पार्टी के अभिन्न अंग भारतीय जनता युवा मोर्चा के कई वृहद आयोजनों में भाजपा के जिला अध्यक्ष ललन प्रताप सिंह के साथ अन्य पदाधिकारियों और वरिष्ठजनों की मौजूदगी सामने आई है। 15 साल सत्ता में रहने के बाद भाजपा बैक फुट में क्यों आई, पांच वर्ष का ऐतिहासिक मौका कांग्रेस को क्यों मिला, इस पर बारीकी से मंथन करने का परिणाम रहा कि सरगुजा जिले की तीनों सीटें भाजपा अपने कब्जे में कर ली। आशा के विपरीत ऐसी सीटों पर कमल खिलाया, जिसकी किसी ने शायद ही कल्पना की हो। सरगुजा जिले के अंबिकापुर, सीतापुर व लुण्ड्रा विधानसभा में वर्ष 2023 के चुनाव बाद बनी परिस्थिति पर गौर करें तो एक तरह से भाजपा ने कांग्रेस के गढ़ को भेद डाला है। इसका श्रेय कहीं न कहीं भाजपा जिला अध्यक्ष ललन प्रताप सिंह को जाता है। 2020 मेें सरगुजा में भाजपा जिला अध्यक्ष का कमान जब उन्होंने संभाला, तो प्रदेश मेें डेढ़ दशक तक सत्ता में रही भाजपा विपक्ष में प्रवेश कर गई थी। इस दौर में सरगुजा जिले में भाजपा जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी ऐसे शख्सियत को देने की कवायद चल रही थी जो संगठन को साथ लेकर चल सके, कार्यकर्ताओं का उत्साह बनाकर रखे। जनहित के मुद्दों को उठाने के साथ संगठन को मजबूत करने की दिशा में कार्य करने वाले तेजतर्रार नेता की तलाश थी। इस दौर में भाजपा जिला अध्यक्ष का कमान संभाले ललन प्रताप तीन वर्ष का अध्यक्षीय कार्यकाल बिता चुके हैं। इन्होंने इस विधानसभा चुनाव में ऐन चुनाव के मौके पर प्रत्याशी चयन के बाद अपनों के द्वारा बनाई जाने वाली नाटकीय परिस्थितियों का भी सामना किया लेकिन किसी प्रकार की जल्दबाजी न करते हुए असंतुष्टों को संतुष्ट करने का तोड़ निकाला। परिणाम भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में आया।
छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद की स्थिति
छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद वर्ष 2003 से हुए चुनाव पर गौर करें तो इस चुनाव में अविभाजित सरगुजा की आठ सीटों में सात सीटें भाजपा को मिली थी। अंबिकापुर विधानसभा से कमलभान सिंह, सीतापुर से कांग्रेस के अमरजीत भगत और लुण्ड्रा से भाजपा के विजयनाथ सिंह विधायक बने थे। इसके बाद से यह सीट कांग्रेस के कब्जे में रही। 2008 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस को आठ सीटों में 4-4 सीटें मिली। इस बार भाजपा ने अंबिकापुर, सीतापुर और लुण्ड्रा तीनों विधानसभा को गवां दिया था। 2013 में सरगुजा जिले की तीनों विधानसभा क्षेत्र की सीटें भी कांग्रेस के पक्ष में गईं।
इसके बाद नहीं खिला था कमल
लुण्ड्रा विधानसभा में 2003 के बाद कोई भाजपा का विधायक नहीं बना। सीतापुर विधानसभा क्षेत्र जहां आजादी के बाद से कमल नहीं खिला, वहां 2003 से ही दो दशक तक यहां अमरजीत भगत का एकछत्र राज चला। वहीं अंबिकापुर विधानसभा में वर्ष 2008 से 2018 के बीच संपन्न हुए चुनाव में टीएस सिंहदेव विधायक रहे। कांग्रेस की सरकार आने पर इन्हें डिप्टी सीएम के ओहदे से अंतिम समय में नवाजा गया था। वर्ष 2023 के चुनाव में सरगुजा जिले की तीनों विधानसभा सीटों सहित संभाग में कांग्रेस का नामोनिशान नहीं है।

 

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