नवापारा खदान बंद करने के आदेश का विरोध, एचएमएस व कर्मचारियों ने सौंपा ज्ञापन

भटगांव। भटगांव क्षेत्र अंतर्गत नवापारा यूजी खदान को आगामी 31 दिसंबर से बंद करने के प्रबंधन के आदेश के विरोध में बुधवार को एचएमएस संगठन के नेतृत्व में कर्मियों ने जमकर हंगामा किया। एसईसीएल भटगांव क्षेत्र अंतर्गत आने वाले नवापारा भूमिगत खदान को 31 दिसंबर को बंद करने की तैयारी एसईसीएल प्रबंधन कर रहा है, इसके विरोध में एचएमएस संगठन ने महाप्रबंधक कार्यालय का घेराव करके ज्ञापन सौंपा है।

बता दें कि एसईसीएल भटगांव क्षेत्र की कई खदानें बंद होने के कगार पर हैं। वन विभाग एवं पर्यावरण विभाग सहित सीटीओ की स्वीकृति नहीं मिलने के कारण इन खदानों को बंद किया जा सकता है। इसकी शुरुआत 31 दिसंबर को नवापारा खदान से हो सकती है। खदान के बंद होने की स्थिति में क्षेत्र से लोगों का विस्थापन भी होगा, जिससे भटगांव व जरही क्षेत्र की आबादी कम हो जाएगी। वहीं खदान के बंद होने से एसईसीएल कर्मचारियों को स्थानांतरण की चिंता सता रही है। इसी तारतम्य में भटगांव महाप्रबंधक कार्यालय के सामने एचएमएस संगठन के नेताओं के साथ यहां के कर्मियों ने कंपनी के नियम व खदान बंद करने के जारी आदेश को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। एचएमएस संगठन के नेताओं के साथ कर्मचारियों ने जुलूस के साथ भटगांव क्षेत्र का भ्रमण करते हुए महाप्रबंधक कार्यालय के सामने सभा की और अध्यक्ष सह प्रबंधक निदेशक एसईसीएल के नाम भटगांव एसईसीएल एपीएम को ज्ञापन सौंपा। एचएमएस के तेज बहादुर सिंह ने कहा कि प्रबंधन साजिश के तहत खदान को बंद करना चाहता है। प्रबंधन की मजदूर विरोधी नीति के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे। सवाल उठाया प्रबंधन अगर डीजीएमएस के आदेश से खदान को बंद करने का निर्णय लिया है, तो खदान डेढ़ माह पूर्व बंद क्यों नहीं किया गया। डीजीएमएस एक बहाना है, अपनी कमी को छिपाने के लिए प्रबंधन दूसरे के कंधे का सहारा ले रहा है। एचएमएस के पदाधिकारी दीपक मिश्रा ने कहा कि प्रबंधन नीति के खिलाफ कार्य कर रही है। अचानक ट्रेड मनमाने तरीके से खदान बंदी का फरमान जारी कर देना मजदूरों के साथ अन्याय है, इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रबंधन को हर हाल में खदान को चालू करना होगा। अन्य वक्ताओं ने भी कहा अगर डीजीएमएस के अनुसार खदान में कुछ मानकों में कमी है तो प्रबंधन उस कमी को दूर करने के बजाय खदानबंदी का नोटिस जारी कर रहा है। प्रबंधन को सौंपे गए प्रतिवेदन में कहा गया है कि बगैर किसी यूनियन के साथ वार्ता के एकाएक खदान में उत्पादन बंद करना नियम के विरुद्ध है।

करीब 600 कोयला श्रमिक होंगे विस्थापित
छत्तीसगढ़ राज्य की पूर्व सरकार एवं स्थानीय प्रशासन की लापरवाही के कारण आवश्यक सीटीओ समय पर प्राप्त नहीं हुआ, जिसके कारण नवापारा भूमिगत खदान के बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। उक्त खदान के बंद होने से करीब 600 कोयला श्रमिक विस्थापित होंगे। संगठन ने वर्तमान सरकार एवं जनप्रतिनिधियों से अपील की है, नवापारा खदान के संचालन हेतु आवश्यक अनुमति प्रदान करवाने में सहयोग करें ताकि नवापारा खदान अनवरत कोयला उत्पादन करते रहे और श्रमिकों का विस्थापन का खतरा टला सके।

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