एक वर्ष में ही सामने आने लगी बदहाली, निजी लैब का चक्कर काट रहे बीमार

अंबिकापुर। शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध जिला अस्पताल में कोरोना के बाद संक्रामक बीमारियों की जांच के लिए हाइटेक जांच लैब की स्थापना पर जोर दिया गया और ‘वायरोलॉजी लैबÓ के बाद सवा करोड़ खर्च करके ‘हमर लैबÓ की शुरूआत की गई। यहां 170 प्रकार के जांच का लाभ मरीजों को मिलने की बात कहते हुए खूब गाल बजाए गए। वाहवाही लूटने के लिए उद्घाटन के समय तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव का जांच रिपोर्ट मिनटों में उपलब्ध कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। हमर लैब का संचालन होते महज एक वर्ष हुए हैं, बीमारी की जांच रिपोर्ट मिनटों में प्राप्त करने की मंशा पर ग्रहण लग गया है। सरगुजा वासियों को उच्चस्तरीय आधुनिक लैब की सुविधा के नाम पर धक्के खाना पड़ रहा है। एक सप्ताह से अधिक हो गए हमर लैब के बॉयोकेमेस्ट्री विभाग में एलएफटी, आरएफटी, लिम्पिड प्रोफाइल, एचबीआइएसी जैसी जांच सुविधाओं से मरीज वंचित हैं। लैब में रोजाना एक सौ से अधिक मरीज जांच के लिए पहुंच रहे हैं, इन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। ऐसे में यह कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध जिला अस्पताल का हाइटेक ‘हमर लैबÓ दम तोड़ रहा है। आए दिन यहां बड़ी उम्मीद से जांच सुविधा का लाभ लेने के लिए पहुंचने वालों को निजी लैबों की दौड़ लगानी पड़ रही है। महत्वपूर्ण व महंगी जांच सेवाओं का नि:शुल्क लाभ मरीजों को अस्पताल में नहीं मिल पा रहा है। वर्तमान में हालात ऐसे हैं कि वार्ड में या ऑपरेशन के लिए भर्ती मरीजों को भी जांच के लिए स्वजन निजी लैबों में लेकर जाने मजबूर हैं। जिला अस्पताल में मरीजों को जांच के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए बनाई गई हमर लैब की व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। पूर्व में भर्ती मरीजों का किसी प्रकार का लैब टेस्ट होना हो, तो संबंधित वार्ड के ड्यूटी कक्ष में उपस्थित नर्स या कर्मचारी के द्वारा पर्ची के साथ सैंपल लैब में भेजा जाता था। अब हालात बदल गए हैं, सैंपल व पर्ची लेकर स्वयं मरीज या उनके स्वजन चक्कर काटते हैं।

प्रशासनिक आइने में व्यवस्था सुदृढ़
हमर लैब का जिस प्रकार भारी तामझाम के बीच एक वर्ष पूर्व उद्घाटन हुआ था, इसके बाद उम्मीद थी कि और भी बेहतर जांच सुविधा मरीजों को मिलेगी। इसके विपरीत सरगुजा संभाग का सबसे बड़े अस्पताल में मशीनरी संसाधनों की उपलब्धता के बीच खून की विकृतियों को बताने वाले केमिकल की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हो पाना शर्मनाक है। व्यवस्था देखने के नाम पर राउंड में निकलने वाले अधिकारियों की नजर अस्पताल में व्याप्त इन अव्यवस्थाओं पर नहीं रहती है। कई बार प्रबंधन के संज्ञान में इसे लाया गया है लेकिन प्रशासनिक आइने में व्यवस्था सुदृढ़ रहती है। अस्पताल में कुछ पीजी चिकित्सक व स्टॉफ ऐसे हैं, जो मरीजों के साथ विनम्रता से पेश आना भूल चुके हैं। कमियों को इंगित कराया जाए तो इनकी तिलमिलाहट देखते ही बनती है।

रिएजेंट, क्यूरेट लैब में नहीं, कैसे हो जांच
लैब के लिए उपयोगी केमिकल रिएजेंट, क्यूरेट की उपलब्धता समय पर नहीं होने से लंबे समय से दिक्कत की स्थिति बन रही है। बताया जा रहा है इसकी सप्लाई सीजीएमएससी से की जाती है। बाधा की स्थिति न बने, इसलिए पूर्व में जिले के सीएचसी, पीएचसी से इस केमिकल को लेकर काम चलाया जा रहा था, यहां भी केमिकल की उपलब्धता निरंक रहने से अब खून की विकृतियों की जांच प्रक्रिया एक सप्ताह से अधिक हो गए, पूरी तरह से थम गई है। हाइटेक लैब की स्थापना करने का मकसद मरीजों को अच्छी सुविधाएं उपलब्ध कराना ही नहीं बल्कि त्वरित जांच रिपोर्ट प्रदान करना था, यह जुबानी ही साबित हो रहा है। लैब का संचालन पुराने ढर्रे पर होने से नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा की जगह वाह्य जांच केंद्रों में जेब हल्की करनी पड़ रही है।

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