अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने स्वास्थ्य विभाग में निजीकरण, आउटसोर्सिंग और ठेका प्रथा के विरोध में आंदोलन का ऐलान कर दिया है। संघ ने सरकार से लंबित वेतनमान और संविदा कर्मचारियों को समान वेतन देने की मांग भी की है। प्रांताध्यक्ष अनिल पाण्डेय की अध्यक्षता और संरक्षक ओ.पी. शर्मा के मार्गदर्शन में शनिवार को प्रदेश स्तरीय महासमिति की बैठक हुई। बैठक में सर्वसम्मति से चरणबद्ध आंदोलन करने का निर्णय लिया गया।

संघ ने अपनी मांगों की ओर ध्यानाकर्षण कराते हुये कहा है कि, पैथोलॉजी और फार्मेसी सेवाएं एचएलएल कंपनी को सौंपेने के बाद निजीकरण की संभावना बढ़ गई है। इससे कर्मचारियों का भविष्य खतरे में पड़ेगा। स्वास्थ्य सेक्टर में दूसरे प्रदेशों के डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल कोर्स के लिए पंजीयन की अनिवार्यता समाप्त करने से प्रदेश के युवाओं के रोजगार के अवसर कम होंगे। फर्जी डिग्रीधारियों के प्रवेश की आशंका बढ़ेगी, जिससे इलाज की गुणवत्ता पर सवाल उठेगा। संघ ने शासन स्तर पर लंबित स्वास्थ्य कर्मचारियों के पुनरीक्षित वेतनमान को तत्काल लागू करने, रिक्त पदों पर नियमित भर्ती करने की मांग की है। संघ ने संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को समान कार्य-समान वेतन देने, जीवन दीप कर्मचारियों के शोषण को रोकने के लिए स्पष्ट नीति बनाने की मांग की है। इस दौरान प्रदेश में स्वास्थ्य आयोग के गठन की भी मांग रखी गई। बैठक में कर्मचारी-अधिकारी महासंघ के संयोजक अनिल शुक्ला भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अलग-अलग विभागों में निजीकरण शुरू किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग का निजीकरण कर्मचारियों के साथ-साथ आम जनता के हित में भी नहीं है। महासंघ स्वास्थ्य कर्मचारियों की सभी मांगों का पूर्ण समर्थन करता है। प्रांताध्यक्ष अनिल पाण्डेय ने सभी पदाधिकारियों और नियमित, संविदा, दैनिक वेतनभोगी, जीवन दीप कर्मचारियों से एकजुट होकर आंदोलन में साथ देने की अपील की है।

पहले चरण में इनके द्वारा 22 जुलाई को प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में नारेबाजी कर जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। यदि मांगें नहीं मानी गईं तो अनिश्चितकालीन आंदोलन किया जाएगा। बैठक में प्रदेश भर के प्रांतीय पदाधिकारी, संभागीय अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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