ग्रामीणों ने कहा-जमीन पर कब्जा करने पहुंचे लोगों ने विरोध पर डंडा चलाया

कलेक्टर-एसपी के संज्ञान में मामला आने के बाद जांच होने तक कब्जे पर लगी रोक

अंबिकापुर। सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विकासखंड के ग्रामों से आए लगभग 40-45 भुइयां अनुसूचित जनजाति परिवारों का प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को पूर्व विधायक एवं पूर्व अध्यक्ष, अनुसूचित जनजाति आयोग छत्तीसगढ़ राज्य भानु प्रताप सिंह से मुलाकात करके न्याय की गुहार लगाया। पीड़ित परिवारों ने बताया कि उनके पास प्रतापपुर क्षेत्र में लगभग 2.50 एकड़ पुश्तैनी कृषि भूमि है, जिस पर वे पिछले कई दशकों से खेती-किसानी कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। आरोप है कि वर्ष 2011-12 में भूमि बंटवारे और सरकारी योजना का झांसा देकर कुछ लोगों ने धोखे से उनकी जमीन के दस्तावेजों पर अंगूठा लगवा लिया था और बाद में रजिस्ट्री किसी अन्य व्यक्ति के नाम करा ली गई।

करीब 14-15 वर्ष बाद संबंधित लोग अचानक भारी संख्या में जेसीबी मशीन लेकर जमीन पर कब्जा करने पहुंचे, तब ग्रामीणों ने विरोध किया। पीड़ितों का आरोप है कि इस दौरान महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया गया, जातिसूचक गाली-गलौज की गई और विरोध करने पर लाठी-डंडों से मारपीट भी की गई। सबसे दर्दनाक मंजर तब सामने आया, जब मूसलाधार बारिश के बीच जेसीबी चलाकर पीड़ित परिवारों के कच्चे मकान, रसोई सहित पूरे सामानों को तहस-नहस कर दिया गया। वर्तमान में छोटे-छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और बुजुर्ग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। लगातार बारिश के कारण भोजन बनाना, बच्चों की पढ़ाई और बीमारों का इलाज तक मुश्किल हो गया है। पीड़ित परिवारों ने कहा कि उनके पास न तो सिर छिपाने की जगह है और न ही खाने के लिए अनाज।

कलेक्टर-एसपी के संज्ञान में लाया मामले को

पीड़ितों की व्यथा सुनने के बाद भानु प्रताप सिंह ने मामले को बेहद गंभीर बताते हुए तत्काल कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक सूरजपुर से दूरभाष पर चर्चा की। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि उनके कार्यालय से संबंधित भूमि पर कब्जा दिलाने का कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। उन्होंने तहसीलदार और थाना प्रभारी को संयुक्त रूप से जांच कर 7 दिवस के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने और जांच पूर्ण होने तक यथास्थिति बनाए रखने एवं किसी भी प्रकार के कब्जे पर रोक लगाने के निर्देश दिए।

एसपी ने जांच के बाद कड़ी कार्रवाई करने कहा

पुलिस अधीक्षक ने कहा कि प्रारंभिक जांच में यदि अनुसूचित जाति, जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध बनता है तो आरोपियों के विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने पीड़ित परिवारों को सुरक्षा उपलब्ध कराने का भी आश्वासन दिया।

कमजोर वर्गों पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं

पूर्व विधायक भानु प्रताप सिंह ने कहा कि संविधान ने आदिवासियों को जल, जंगल और जमीन के साथ विशेष संवैधानिक सुरक्षा दी है। उनकी पुश्तैनी जमीन हड़पना, उन्हें अपमानित करना और बेघर करना सीधे-सीधे संविधान पर हमला है। बरसात के मौसम में जेसीबी चलाकर गरीब आदिवासी परिवारों को बेघर कर देना यह दर्शाता है कि कुछ लोग कानून को हाथ में लेकर कमजोर वर्गों पर अत्याचार करना चाहते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि, आदिवासियों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों पर कठोर कार्रवाई के साथ पीड़ित परिवारों को तत्काल तिरपाल, राशन, पेयजल, चिकित्सा सुविधा और अस्थायी आवास उपलब्ध कराया जाए।

समाज के लोगों में न्याय की उम्मीद बढ़ी

भुइयां समाज के बुजुर्गों ने पूर्व विधायक भानु प्रताप सिंह के द्वारा ली गई गरीबों की सुध को सराहा, और विश्वास व्यक्त किया है कि अब उन्हें न्याय मिलेगा और जमीन वापस मिलेगी। ग्रामीणों की बात सुनने के बाद पूर्व विधायक ने मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच, दोषियों पर एससी, एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई करने, पीड़ित परिवारों का तत्काल पुनर्वास और राहत प्रदान करने, पुश्तैनी भूमि पर पीड़ितों का कब्जा सुरक्षित करने की मांग की है।

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