छह लाख और 75 हजार के चेक का निराकृत, आपसी संबंधों में आई खटास हुई दूर

अंबिकापुर। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर के निर्देशानुसार तथा जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सरगुजा शक्ति सिंह राजपूत के मार्गदर्शन में प्रथम बार 18 जुलाई को विशेष लोक अदालत का आयोजन किया गया, जिसमें धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881, चेक अनादरण प्रकरण से संबंधित मामलों के त्वरित एवं सौहार्द्रपूर्ण निराकरण हुआ।

विशेष लोक अदालत का शुभारम्भ मुख्य न्यायाधीश, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय एवं मुख्य संरक्षक, छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा वर्चुअल माध्यम से किया गया। जिला सरगुजा में आयोजित विशेष लोक अदालत में न्यायालयों में लंबित धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम के प्रकरणों के आपसी राजीनामा के माध्यम से निराकरण हेतु विशेष खण्डपीठों का गठन किया गया था। जिला सरगुजा में आयोजित स्थल नेशनल लोक अदालत के दौरान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय अंबिकापुर एवं व्यवहार न्यायालय सीतापुर में कुल 34 प्रकरणों का निराकरण किया गया।

सरगुजा जिले में पहली बार हुआ आयोजन

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव लीनम बनसोड़े ने बताया कि उपरोक्तानुसार जिले में प्रथम बार धारा 138 परक्राम्य लिखत अधिनियम 1881 के संबंध में आयोजित किए गए लोक अदालत में पक्षकारों के मध्य आपसी सहमति के तहत राजीनामा के आधार पर प्रकरण निराकृत किये गये। बड़ी बात यह है कि इस विशेष लोक अदालत में 5 वर्षों से अधिक समय से लंबित प्रकरणों के निराकरण में भी सफलता मिली है।

75 हजार के चेक का हुआ समझौता

इस विशेष लोक अदालत में खण्डपीठ क्रमांक-02 गिरिवर सिंह राजपूत तृतीय व्यवहार न्यायाधीश वर्ग-1 अंबिकापुर के खंडपीठ के समक्ष रखे प्रकरणों में से एक प्रकरण में परिवादी ने अनावेदक को एक लाख पचास हजार रुपये का ऋण दिया था, जिसके भुगतान के लिये अनावेदक ने चेक क्रमांक 000010 राशि 75,000 रुपये भरकर परिवादी को दिया था, जो कि खाते में पर्याप्त रुपये नहीं होने के कारण अनादरित हो गया। चेक अनादरण होने पर परिवादी द्वारा प्रकरण न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। दोनों पक्षकार के मध्य घनिष्ठ संबंध था परंतु पैसे के लेनदेन को लेकर मन-मुटाव हो गया और दोनों पक्ष के रिश्ते खराब हो रहे थे।

राजीनामा के बाद संबंध हुए मधुर

दोनों पक्षों को न्यायालय द्वारा इस विशेष लोक अदालत में उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया गया था, इसके बाद परिवादी और अनावेदक इस विशेष लोक अदालत में उपस्थित हुए। उभय पक्ष को अपने मन-मुटाव समाप्त कर राजीनामा के लिए समझाइश दी गई, जिस पर दोनों पक्ष आपस में बैठकर विचार किये और आपसी सहमति से प्रकरण राजीनामा करने हेतु सहमत हुए। अनावेदक द्वारा समझौता राशि 75,000 रुपये परिवादी को प्रदान किया। इस प्रकार परिवादी और अनावेदक के मध्य राजीनामा किये जाने से उनका संबंध पुन: मधुर स्थापित हो गया और हंसी खुशी इस विशेष लोक अदालत से अपने घर वापस गये।

छह लाख का चेक हुआ निराकृत

खण्डपीठ क्रमांक 04 पूजा मण्डावी, प्रथम व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी, सीतापुर के समक्ष रखे प्रकरणों में से एक प्रकरण में परिवादी द्वारा अनावेदक को 6 लाख रुपये प्रदान किया गया था, जिसके संबंध में परिवादी द्वारा न्यायालय के समक्ष चेक अनादरण का मामला दायर किया गया था। परिवादी एवं अनावेदक को राजीनामा किये जाने के संबंध में समझाइश दी गई थी। दोनों पक्ष शनिवार को स्पेशल लोक अदालत में उपस्थित हुए एवं अनावेदक द्वारा चेक की राशि 6 लाख रुपये परिवादी को प्रदान किया गया। फलस्वरूप स्थापित लोक अदालत के तहत उक्त प्रकरण के पक्षकारों के आपसी सहमति से निराकृत किया गया।

2018 और 2020 के विवाद भी सुलझे

खण्डपीठ क्रमांक 03 प्रांजलि नेताम, प्रथम व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी, सीतापुर के खण्डपीठ में रखे प्रकरणों में से एक प्रकरण में परिवादी एवं अनावेदक के मध्य वर्ष 2018 में विवाद था, जिसमें परिवादी एवं अनावेदक के मध्य आपसी सहमति के आधार पर चेक राशि परिवादी को वापस किये जाने पर प्रकरण राजीनामा के माध्यम से समाप्त किया गया। इसी प्रकार अन्य प्रकरण में परिवादी एवं अनावेदक के मध्य वर्ष 2020 से विवाद था। उक्त प्रकरण में भी परिवादी एवं अनावेदक के मध्य आपसी सहमति से राजीनामा के आधार पर प्रकरण निराकृत किये जाने हेतु सहमति की गई और उक्त प्रकरण विशेष लोक अदालत में आपसी सहमति के आधार पर राजीनामा के माध्यम से निराकृत किया गया। खण्डपीठ के द्वारा एक अन्य प्रकरण, जो कि वर्ष 2021 में लंबित था, में भी पक्षकारों के द्वारा आपसी सहमति से समझौता करने पर विशेष लोक अदालत के तहत निराकृत किया गया।

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