अंडर-14 क्रिकेट चयन ट्रायल में सीबीएसई के बच्चों को नहीं मिला मौका, वैरंग लौटेछत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ ने माध्यमिक शिक्षा मंडल के बच्चों को ही दिया मौका

भेदभाव पूर्ण रवैया अपनाने से स्कूल छोड़कर पहुंचे बच्चों को मिली निराशा

मनेंद्रगढ़ (एमसीबी) । छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ (CSCS) द्वारा एकतरफा निर्णय लेने से मनेंद्रगढ़ शहर के दर्जनभर से अधिक उभरते हुए नन्हें क्रिकेटर बच्चों के सपनों में उस समय पानी फिर गया जब उन्हें क्रिकेट चयन ट्रायल प्रक्रिया में भाग लेने से रोक दिया गया। छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ के चयन कर्त्ताओं द्वारा कहा गया कि चयन ट्रायल प्रक्रिया में सिर्फ राज्य बोर्ड के ही बच्चे भाग ले सकते हैं। मिली जानकारी के अनुसार बीते शनिवार को छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ द्वारा हाईस्कूल ग्राउंड मनेंद्रगढ़ में अंडर-14 क्रिकेट चयन ट्रायल प्रक्रिया का आयोजन किया गया। जिसमें भाग लेने सीबीएसई (CBSE) बोर्ड के छात्र पहुंचे तो उन्हें क्रिकेट चयन ट्रायल प्रक्रिया में भाग लेने से मना कर दिया गया। संघ के चयन कर्त्ताओं द्वारा कहा गया कि इस चयन ट्रायल प्रक्रिया में सिर्फ राज्य बोर्ड के बच्चे ही भाग ले सकते हैं। संघ के इस भेदभाव पूर्ण रवैया के कारण करीब 20 से अधिक सीबीएसई के प्रतिभावान बच्चे बिना गेंद छुए ही क्रिकेट मैदान से मायूस होकर वैरंग वापस लौट गए। जिससे खेल प्रेमियों और अभिभावकों में भारी आक्रोश है। बताया जा रहा था कि स्कूल छोड़कर बच्चे ​चयन प्रक्रिया में शामिल होने के लिए पिछले कई महीनों से मैदान पर पसीना बहा रहे थे और रोज कड़ा अभ्यास कर रहे थे। अपने सपने की ओर एक कदम बढ़ाने के लिए कई बच्चे स्कूल छोड़कर विशेष अनुमति लेकर क्रिकेट चयन ट्रायल प्रक्रिया में भाग लेने हाईस्कूल ग्राउंड पहुंचे थे। लेकिन मैदान पर कदम रखते ही उन्हें यह कहकर रोक दिया गया कि यह ट्रायल केवल राज्य बोर्ड के बच्चों के लिए है। संघ के फैसले से निराश बच्चों ने कहा कि
हम रोज सुबह-शाम प्रैक्टिस कर रहे हैं ताकि जिला और राज्य स्तर पर खेल सकें। अगर हमें बोर्ड के नाम पर छांटना था, तो इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं दी गई? हमारा पूरा दिन और मेहनत दोनों बर्बाद हो गए।

संघ के फैसले पर उठ रहे हैं गंभीर सवाल

संघ के फैसले पर सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या खेल में भी होगा बोर्ड का बंटवारा ? ​क्रिकेट जैसे लोकप्रिय खेल में इस तरह का भेदभाव कई गंभीर सवाल खड़े करता है । ​क्या किसी खिलाड़ी की प्रतिभा का आकलन उसके खेल से होगा या उसके स्कूल के एजुकेशन बोर्ड से? ​क्या सीबीएसई में पढ़ने वाले बच्चे छत्तीसगढ़ के मूल निवासी नहीं हैं, जिन्हें राज्य की टीम में जगह मिलने का हक न हो? ​अगर नियम सिर्फ राज्य बोर्ड के बच्चों के लिए था, तो इसकी स्पष्ट सूचना पहले से क्यों सार्वजनिक नहीं की गई ताकि बच्चे निराश होने से बचते? ​इस पूरे घटनाक्रम के बाद मैदान पर काफी देर तक गहमा-गहमी का माहौल रहा। बच्चों के माता-पिता का कहना है कि वे इस भेदभावपूर्ण रवैये के खिलाफ छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ के उच्च अधिकारियों से शिकायत करेंगे और न्याय की मांग करेंगे। अब देखना यह होगा कि क्या संघ अपनी इस गलती को सुधारते हुए इन वंचित बच्चों के लिए दोबारा ट्रायल का मौका देता है, या फिर इन नन्हें सितारों का भविष्य ऐसे ही प्रशासनिक नीतियों की भेंट चढ़ जाएगा।

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