मुंबई से साइकिल यात्रा में निकले रूस के नागरिक के घोर हाथी प्रभावित जंगल में तंबू तान देने से प्रशासन सकते में आ गया।

अंबिकापुर। मुंबई से साइकिल यात्रा में निकले रूस के नागरिक के घोर हाथी प्रभावित जंगल में तंबू तानकर रूकने से प्रशासन सकते में आ गया। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिला अंतर्गत फरसाबहार जंगल में बिना किसी पूर्व सूचना के तंबू में आराम फरमा रहे विदेशी नागरिक की सूचना पर पुलिस अधिकारी सकते में आ गए। क्षेत्रीय लोगों की सूचना पर जंगल पहुंचे अधिकारियों ने विदेशी नागरिक से बातचीत करने का प्रयास किया लेकिन भाषाई दिक्कत का सामना उन्हें करना पड़ा। बाद में एक व्यक्ति ने अंग्रेजी में रूसी नागरिक से बात की तो पता चला कि वह योग गुरु आनंद महाराज से मिलने महाराष्ट्र के मुंबई से साइकिल यात्रा में निकला है। हाथियों से जंगल क्षेत्र में बनी खतरे की स्थिति से जब उसे आगाह कराया गया तो वह अपना तंबू समेट कर विश्राम गृह जाने के लिए राजी हुआ।


तपकरा के थाना प्रभारी एलआर चौहान ने बताया कि सोमवार की शाम कुछ लोगों से सूचना मिली कि एक विदेशी नागरिक थाना क्षेत्र के बारो जंगल में तंबू लगा कर रुका है। इस जंगल में वर्तमान में लगभग डेढ़ दर्जन हाथियों का दल हाथी डेरा जमाए हुए है। विदेशी नागरिक को देखने काफी लोग पहुंच रहे थे। वहीं रूसी नागरिक हाथियों के खतरे से अनजान था। किसी प्रकार की अनहोनी न हो, इसे देखते हुए पुलिस और वन विभाग के अधिकारी बारो जंगल सीमा पर पहुंचे और विदेशी नागरिक से चर्चा की। साइकिल यात्री की पहचान रुसी नागरिक एजनी सेलिन के रूप में की गई। उसने पुलिस अधिकारियों को बताया कि रूस से वह योग गुरु आनंद महाराज से मिलने आया है। साइकिल से बिहार होते हुए नेपाल जाने के लिए वह मुंबई से रवाना हुआ है। एजनी के पासपोर्ट और वीजा की जांच में पता चला कि वह रूस से सात अगस्त को मुंबई एयरपोर्ट पहुंचा था। यहीं से साइकिल से नेपाल के लिए रवाना हुआ है। इसके बाद एसपी डी.रविशंकर के निर्देश पर थाना प्रभारी एलआर चौहान ने एजनी से जंगल छोड़कर रेस्ट हाउस चलने कहा, लेनिक वह कहीं जाने के लिए तैयार नहीं था। वह स्वयं को योग साधक बताते हुए जंगल में ही रात गुजारने की बात पर अड़ा रहा। काफी मनौव्वल के बाद उसे फरसाबहार के रेस्ट हाउस में रुकने के लिए राजी किया गया। इसके बाद एजनी को कुनकुरी लाया गया। यही नहीं पुलिस ने विदेशी मेहमान के लिए खाने की व्यवस्था के साथ सुरक्षा के लिए आवश्यक प्रबंध किए। इसके बाद झारखंड की सीमा तक पहुंचाने की व्यवस्था करते हुए उसे आवश्यक समझाइश भी दी।
भीड़ देखकर विदेशी मेहमान रहा परेशान
विदेशी नागरिक के जंगल में डेरा जमाने की खबर फैलते ही बारो के जंगल और आसपास के रहवासी तंबू के आसपास जमा होने लगे। लोगों में विदेशी मेहमान और उसके टेंट के साथ सेल्फी लेने की होड़ मच गई थी। साइकिल यात्रा करने से थके एजनी को एकांत में भी व्यवधान जैसी स्थिति झेलनी पड़ी। इससे वह नाराजगी जाहिर कर रहा था लेकिन वह स्थानीय भाषा को समझने में भी असमर्थ था।
भाषाई दिक्कत का सामना किए अधिकारी
घोर हाथी प्रभावित बारो के जंगल में डेरा जमाएं एजनी को जंगल से निकालने के लिए राजी करने अधिकारियों को भी भाषाई दिक्कत का सामना करते हुए काफी मेहनत करनी पड़ी। एजनी अंग्रेजी भाषा समझते थे लेकिन बारो के जंगल में उनसे चर्चा के लिए कोई अंग्रेजी का जानकार नहीं मिल पा रहा था। कुछ देर में एक स्थानीय रहवासी ने अंग्रेजी में चर्चा कर जंगल में हाथी के खतरे से एजनी को अवगत कराया और उन्हें विश्राम गृह में रहने की समझाइश दी।

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