जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने ब्याज के साथ रकम वापस करने दिया आदेश
अंबिकापुर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एचडीएफसी, लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के द्वारा टर्म इंश्योरेंस की पॉलिसी बंद नहीं करने और द्वितीय वार्षिक प्रीमियम राशि की कटौती करने के मामले में दायर प्रकरण में पॉलिसीधारक को राहत प्रदान करते हुए साधारण ब्याज के साथ रकम वापस करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही मानसिक और आर्थिक क्षति व वाद व्यय भी देना होगा।
अंबिकापुर के वार्ड क्रमांक 43 निवासी मुकेश कुमार श्रीवास्तव पिता राजेश कुमार श्रीवास्तव ने अपने अधिवक्ता विकास श्रीवास्तव के माध्यम से जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में शाखा प्रबंधक एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के विरूद्ध प्रकरण दर्ज कराया था कि उन्होंने कंपनी से एचडीएफसी लाइफ क्लिक टू प्रोटेक्ट लाइफ नाम से टर्म इंश्योरेंस 25 वर्ष के लिए लिया था। इसका प्रतिवर्ष 20,464 रुपये प्रीमियम देना था। उन्होंने वर्ष 2023 में पॉलिसी जारी कराया था, प्रीमियम की राशि बीमा कंपनी ने पॉलिसीधारक के सेंट्रल बैंक के खाता से प्राप्त किया था। बाद में पॉलिसी कों बंद करने का आग्रह 25 जून 2024 को उन्होंने कार्यालय जाकर किया तो पॉलिसी बंद करने का आश्वासन देकर उन्हें पावती प्रदान कर दी गई थी। इसके बाद टर्म इंश्योरेंस बंद होने को लेकर परिवादी मुकेश कुमार श्रीवास्तव आश्वस्त थे, लेकिन 26 जुलाई 2024 को पुन: टर्म इंश्योरेंस के प्रीमियम की राशि उनके बैंक खाते से काट ली गई। उन्होंने 29 जुलाई 2024 को लिखित में आवेदन देकर प्रीमियम की कटौती की गई राशि वापस करने की मांग की, लेकिन किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई। कई बार बीमा कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों से मिलने के बाद भी सकारात्मक जवाब नहीं मिला, सिर्फ रकम बैंक खाता में वापस भेज देने का आश्वासन दिया जा रहा था। ऐसे में मुकेश कुमार श्रीवास्तव ने प्रीमियम की कटौती की गई राशि 20 हजार 664 रुपये और मानसिक क्षतिपूर्ति 20 हजार रुपये वाद व्यय एवं अन्य उचित सहायता दिलाने का आग्रह करते हुए परिवाद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में अपने अधिवक्ता के माध्यम से प्रस्तुत किया था, जिस पर अंतिम तर्क सुनने के बाद परिवार को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए आयोग के अध्यक्ष राकेश पाण्डेय, सदस्य नवनी कान्त दत्ता ने एचडीएफसी, लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लि. के विरूद्ध आदेश पारित किया है। इसमें अनावेदक कंपनी को आदेश दिनांक से 45 दिवस के भीतर परिवादी को 20 हजार 664 रुपये 6 प्रतिशत वार्षिक की दर से साधारण ब्याज के साथ भुगतान करने कहा गया है। इसके अलावा बीमा कंपनी को आदेश दिनांक से 45 दिवस के भीतर परिवादी को मानसिक एवं आर्थिक क्षति के रूप में 5 हजार रुपये और वाद व्यय 3 हजार रुपये देने का आदेश दिया गया है।

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