अंबिकापुर। सरगुजा में जीएसटी के नाम पर की जा रही मनमाना कार्रवाई को लेकर व्यापारी वर्ग मर्माहत है। हाल में इनकी कार्रवाई के विरोध में हल्ला बोलने की स्थिति बन चुकी है। नगर बंद करके विरोध प्रदर्शन भी किया गया। ऐसा क्यों हो रहा है, इसे लेकर सवालिया निशान भी लग रहे हैं। इस मामले में छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव का कहना है कि सरकार अपने आय के स्रोत का सृजन करने के बजाय व्यापारियों से जीएसटी वसूली के लिए दबाव बना रही है। इसे लेकर कई प्रकार की शिकायतें सामने आ रही हैं।
सिंहदेव ने कहा है कि वर्तमान सरकार को तर्कसंगत तरीके से सोच-समझकर ठंडे दिमाग से ऐसे आय के स्रोतों का सृजन करना होगा, जिससे देश, प्रदेश के नागरिक, अर्थव्यवस्था के बुनियादी हिस्से व्यवसायी पर विपरीत प्रभाव न पड़े। व्यापारी वर्ग का धंधा कम होगा तो पूरी अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ेगा। सरकार की सोच गलत है। हाथ मरोड़ करके सरकारी टैक्स नहीं ले सकते। देश आजाद हुआ अंग्रजों से, इसके पीछे एक बड़ा कारण था कि अंग्रेजों ने हाथ मरोड़कर टैक्स लेने की कोशिश की। आज वही स्थिति आजाद भारत में उत्पन्न की जा रही है। आमदनी का जरिया, राजस्व नहीं बढ़ रहा है, इसलिए सरकार ने जो नए खर्चे ले लिए हैं, उसके बाद होने वाले खर्च की पूर्ति के लिए अब 40 से 45 हजार शिक्षकों को बैठाने की सोच बना ली है, जो बिल्कुल गलत है। उन्होंने कहा पर्याप्त आय के साधन के बीच बजट की भी सीमाएं रहती हैं। विपक्ष में रहकर बहुत आसान रहता है आलोचना करना, जब सरकार में आते हैं तो वास्तविकताएं सामने आती है कि पैसा तो उतना ही है, जितना बजट है। किसी भी सरकार का बजट देखें, जितना खर्च बताया जाता है, उतना राजस्व नहीं आता। इसका यह विकल्प नहीं है कि जरूरत की चीजों को प्रभावित किया जाए। वर्तमान सरकार आज टीचर को बैठा रही है, कल नर्स को बैठाएंगे, फिर डॉक्टर को बैठाएंगे, यह इसका हल नहीं है।
स्वास्थ्य विभाग को दे दिया उद्योग का दर्जा
टीएस सिंहदेव ने कहा कि वर्तमान सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को उद्योग का दर्जा दे दिया है। पैसे की कमी है बजट में और प्रायवेट डॉक्टर को कह रहे हैं कि आओ अपना अस्पताल खोलो, ये क्या सोच है। सरकार के हाथ बंधे हैं, आमदनी का जरिया कम है और प्राइवेट पार्टी को बुलाकर कह रहे हैं, आप आओ हम पैसा देंगे। अपने अस्पताल और स्कूल में यह धनराशि क्यों नहीं लगा सकते।

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