कई एकड़ भूमि को प्लाटिंग करके बेचने की तैयारी पूर्व बदला पहुंच मार्ग का स्वरूप  

girija thakur

अंबिकापुर। शहर में भू-माफियाओं का मकड़जाल किस हद तक सिर चढ़कर बोल रहा है, यह कहीं पहाड़ काटकर तो कहीं जमीन का भाव बढ़ाने पंचायत में स्थित जमीन को शहर से मिलाने के गोरखधंधे के रूप में सामने आ रहा है। जमीन बेचकर करोड़ों कमाने की नीयत रखे ऐसे लोग शासकीय भूमि पर स्वयं के खर्च से सड़क और पुल तक निर्माण कराने में पीछे नहीं हैं।

शहर सीमा पर संत गहिला गुरू वार्ड के परसापाली में सीजीएमएससी के दवा गोदाम के पीछे ऐसा कारनामा कुछ लोगों ने कर दिखाया है। निगम का राजस्व अमला गिद्ध नजर लिए शहर के ऐसे कई हिस्से में मंडराते नजर आ जाएगा, जहां कोई अपने खून-पसीने की कमाई से नवनिर्माण कर रहा हो, पर नगर निगम व ग्राम पंचायत की सरहद पर प्रवाहित हो रहे नाला के ऊपर किए गए विशाल पक्के पुलिया निर्माण पर इनकी नजर नहीं पड़ी। पुल निर्माण करने के पहले सीजीएमएससी कार्यालय के पीछे से शासकीय जमीन के बड़े हिस्से को समतल किया गया। यहां आसपास रहने वाले सोचते रह गए कि नगर निगम पुल का निर्माण करा रहा होगा। इनका सोचना गलत भी नहीं था क्योंकि लाखों रुपये व्यय करके इस पुल का कोई व्यक्तिगत निर्माण क्यों करेगा। प्रश्न यह भी उठ रहा था कि पुल निर्माण कराने से फायदा क्या होगा, क्योंकि आगे पंचायत की सीमा शुरू होती है। पुल निर्माण होने के बाद जब मुश्किल से दस मीटर के फासले पर स्थिति कई एकड़ जमीन को जेसीबी लगाकर समतलीकरण कर वृहद प्लाट का रूप दिया जाने लगा, तो इनकी आंखें फटी रह गईं। इन्हें समझ में आ गया कि जमीन बेचकर अधिक मुनाफा कमाने के उद्देश्य से इतना तामझाम किया जा रहा है। शासकीय नजुल भूमि पर किए गए पुल निर्माण की खबर प्रशासन तक भी पहुंची है और मौके का परीक्षण भी कराया गया है। जांच में पहुंचे आरआई इस बात को मान रहे हैं कि नजुल जमीन पर पुल का अवैध निर्माण कराया गया है। ऐसे में क्या नहर के ऊपर किए गए अवैध पुल निर्माण को प्रशासन हटाएगा या जमीन विक्रेताओं को लाभ पहुंचाने में मददगार साबित होगा, यह यक्ष प्रश्न बनकर रह गया है।  

किसने दिया सड़क, पुल बनाने की अनुमति
निगम क्षेत्र में शासकीय भूमि का टोंटा देखने को मिल रहा है। निगम की सामान्य सभा में हाल में इसे लेकर चिंता जाहिर की गई थी। निगम के वरिष्ठ पार्षद आलोक दुबे ने यहां तक संकेत दिया था कि भविष्य में आंगनबाड़ी, शौचालय निर्माण के लिए भी जगह खोजना मुश्किल होगा। इधर निगम की भूमि पर सड़क और पुल का निर्माण करने की अनुमति किसने दी, इसकी जांच होनी चाहिए। मौके को देखा जाए तो कई एकड़ की जिस भूमि के बड़े हिस्से का समतलीकरण किया गया है वह ग्राम पंचायत कंठी अंतर्गत आता है। इस भूमि को दर्शाने के लिए सीमेंट के खूंटे भी गाड़े गए हैं। कई एकड़ भूमि का समतलीकरण करने के बाद अब उसे अब बेचने करने की तैयारी की जा रही है।

आरआई ने मौके पर जाकर की जांच
शासकीय जमीन को सड़क में तब्दील करके पक्का पुल निर्माण करने का मामला अंबिकापुर एसडीएम फागेश सिन्हा के संज्ञान में लाने पर उन्होंने जांच कराने आश्वस्त किया था। इसके बाद मौके पर राजस्व अमले से राजबहादुर जांच करने पहुंचे तो पता चला कि नजूल जमीन में प्रवाहित नाले के ऊपर गलत तरीके से पुल का निर्माण हुआ है। जांच में पहुंची टीम इसकी मौखिक सूचना नगर निगम को दी है। आरआई का कहना है सोमवार को वे लिखित मेें नगर निगम आयुक्त को भी इसकी सूचना देकर प्रतिवेदन सौंपेंगे।              

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