वन अमले के द्वारा देर रात तक की जा रही खोजबीन का वीडियो वायरल हुआ

अंबिकापुर। नगर के संजय वन वाटिका में कुत्तों के हमले में 15 हिरणों की मौत मामला सुर्खियों में आने के बाद भी वन अमले की लापरवाही का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को पुन: वन वाटिका के बाड़े से एक हिरण के भाग जाने की खबर सामने आ रही है। देर रात तक वन विभाग के कर्मचारी रात के अंधेरे में टार्च की रोशनी के बीच हिरण को जंगल, झाड़ में खोजते नजर आए, इसका वीडियो भी सामने आया है। वन अमले की चौकसी में रहने वाले संजय वन वाटिका से ऐसी खबरों के सामने आने के बाद विभागीय अधिकारियों का गोलमोल जवाब भी इनकी कार्यप्रणाली को संदेह के घेरे में ला रहा है।

अभी तक जिस प्रकार की विभागीय कार्यप्रणाली सामने आई है, उससे यही स्पष्ट हुआ है कि हिरणों की मौत के बाद उच्च अधिकारियों ने वन सुरक्षा समिति पर जिम्मेदारी का ठीकरा फोड़ने का काम किया है। घटना के दिन पार्क के बड़े हिस्से में समिति के एक कर्मचारी का तैनात रहना और विभागीय कर्मचारियों के द्वारा चैन की नींद लेने के प्रति विभाग की गंभीरता सामने नहीं आई है। वन विभाग के अमले का काम मात्र वन वाटिका में आने वाले लोगों का टिकट काटकर वसूली करना मात्र रह गया था। संजय वन वाटिका में रहने वाले पशुओं का पूरा दारोमदार एक हिसाब से वन सुरक्षा समिति के कर्ताधर्ता संभाल रहे थे। समिति के भंग होने के बाद जहां एक ओर यहां लम्बे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों के जीवकोपार्जन की नौबत बनी है, वहीं हिरणों के बाड़े से एक और हिरण का कुलांचे मारकर भाग जाने की चैंकाने वाली खबर का सामने इनकी बड़ी लापरवाही को उजागर कर रहा है। इधर वन विभाग के अधिकारियों की ओर से भी अभी तक किसी प्रकार का नोट तत्संबंध में जारी नहीं किया गया है, जिससे यह स्पष्ट हो सके, कि वन वाटिका से भागे हिरण की स्थिति क्या है, और विभाग की नजरों में इस घटनाक्रम की वास्तविकता क्या है?

मंगलवार को उल्टे पांव वापस लौटे लोग

मंगलवार को संजय वन वाटिका का संचालन बंद रहने से यहां घूमने के लिए आने वाले लोगों को निराश होना पड़ा। ग्रामीण और शहरी क्षेत्र से अकसर यहां परिवार व परिचितों के साथ समय बिताने के लिए लोग पहुंचते हैं। युगल जोड़ों का भी वाटिका में आना होता है, और ये हरी वादियों के बीच समय गुजारते हैं। बच्चों की अटखेलियों के बीच वन वाटिका गुलजार रहता है। मंगलवार को वन वाटिका का प्रवेश द्वार अंदर से बंद रहने के कारण यहां घूमने के लिए आने वालों को उल्टे पांव वापस लौटना पड़ा। वाटिका के अंदर कुछ दोपहिया वाहनें खड़ी नजर आ रही थीं, लेकिन आवाज लगाने और दरवाजे को खटखटाने के बाद भी कोई वन वाटिका के बंद रहने की सूचना देने या आगंतुकों की जिज्ञासा को शांत करने के नहीं पहुंचा। बाहर भी कोई ऐसा नोटिस चस्पा नहीं किया गया था, जिससे यह पता चले कि संजय वन वाटिका कितने दिनों के लिए बंद है।

 

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