अंबिकापुर। रघुनाथपुर पुलिस चौकी अंतर्गत ग्राम सिलसिला में स्थित मठ की भूमि को छलपूर्वक हड़पने की नीयत से फर्जी पावर ऑफ अटार्नी की कूटरचना करके अपना आधिपत्य जताने और बलपूर्वक खेती करने का मामला प्रकाश में आया है। इसकी जानकारी पुलिस चौकी में बौरीपारा अंबिकापुर निवासी अरूण सिंह पिता एचएन सिंह ने दी है। शिकायत की जांच के बाद सहायक उपनिरीक्षक चन्द्र प्रताप सिंह ने तीन नामजद सहित अन्य आरोपियों के विरूद्ध केस दर्ज कर लिया है।
जानकारी के मुताबिक ग्राम सिलसिला में गोस्वामी गंगा शरण गिरी के चेला स्व. महंत सतानन्द गिरी पुजारी बोधगया मठ बिहार के नाम पर मठ भण्डार का कुल 14 प्लाट है, जिसका रकबा 14.9220 हेक्टेयर है, जमीन का खाता क्रमांक 177 है। खाता क्रमांक 178 के भूमि स्वामी गोस्वामी त्रिवेणी गिरी चेला महंत स्व. धनसुख गिरी पुजारी बोधगया मठ हैं, इनके नाम पर कुल 33 प्लाट हैं, इसका कुल रकबा 17.9830 हेक्टेयर है। खाता क्रमांक 179 के भूमि स्वामी गोस्वामी हरवंशी गिरी चेला स्व. महंत सतानन्द गिरी पुजारी बोधगया मठ बिहार के नाम पर कुल 19 प्लाट हैं, इसका रकबा 09.64 हेक्टेयर है। खाता क्रमांक 370 महंत सुर्दशन गिरी चेला जगदीशानन्द गिरी मुख्य महंत बोधगया मठ बिहार के नाम पर 11 प्लाट है, रकबा 10.2390 हेक्टेयर है। वर्तमान में इन जमीनों के व्यवस्थापक के रूप में कलेक्टर सरगुजा का नाम अंकित है। सभी भूमि त्रिवेणी गिरी चेला महंत धनसुख गिरी निवासी बोधगया मठ बिहार के देखरेख में है, वहीं भूमि के देखरेख का अधिकार पत्र 02 अगस्त 2024 को अंबिकापुर निवासी अरूण सिंह को लिखित में दिया गया है। इधर स्व. महंत सदानन्द गिरी के चेला रमेश गिरी द्वारा छलपूर्वक मठ की भूमि को 10-10 रुपये के 10 भारतीय गैर न्यायिक स्टांप पेपर में बिजू कुजूर पिता बन्ठू कुजूर के नाम मुख्तारनामा आम उप रजिस्ट्रार सदर वाराणसी से फर्जी तरीके से लिखकर उसे देखरेख में दिया गया है, जबकि जमीन का स्वामित्व रमेश गिरी के पास नहीं हैं और न ही उक्त जमीन के संबंध में उसके नाम पर कोई दस्तावेज है। फर्जी दस्तावेज के आधार पर बिजू कुजूर उक्त जमीन का अधिकार पत्र अपने पास रहना बताकर ग्राम सिलसिला के अन्य ग्रामीणों के साथ मिलकर सिलसिला मठ की जमीन पर काबिज होकर खेती करने में लगा है। अधिकार पत्र होने के बाद भी अरूण सिंह को इस भूमि में काबिज नहीं होने दिया जा रहा है। शिकायत पर पुलिस ने धारा 318(4), 3(5) बीएनएस का मामला दर्ज कर जांच में लिया है।
खेती करने वाले ग्रामीणों को मिलता है फसल का हिस्सा
सिलसिला मठ की भूमि स्थानीय ग्रामीणों को प्रत्येक साल प्रति एकड़ की दर से खेती हेतु दी जाती है। इसके एवज में ग्रामीणों को नकदी फसल के रूप में दिया जाता है। 05 अगस्त को जब अरूण सिंह उक्त भूमि में खेती कराने गए तो ग्राम सिलसिला के बिजू कुजुर पिता बन्ठू कुजूर अपने आप को रमेश गिरी का कथित प्रतिनिधि बताकर वर्तमान सरपंच पति राजा राम, अगस्तु करकेट्टा, बैजनाथ, निर्मल, मुगुल सेवानिवृत शिक्षक, शिवनन्दन, सियाराम खेस बलपूर्वक खेती करने में व्यवधान उत्पन्न करने लगे। आरोप है कि इन्होंने कच्चे मकान के लकड़ियों को चोरी कर मठ को ध्वस्त कर दिया है और बगीचा में लगे कच्चे पेड़ भी काट दिए हैं।
रमेश गिरी के विरूद्ध बिहार, उत्तर प्रदेश में है मामला दर्ज
बिजू कुजुर के मुख्तारनामा के आधार पर किए जा रहे दावे के परिप्रेक्ष्य में अरूण सिंह ने बताया है कि रमेश गिरी चेला सतानन्द गिरी व उसके सहयोगी रविशंकर के द्वारा जालसाजी कर त्रिवेणी गिरी एवं अन्य महात्माओं के स्वामित्व की भूमि का अवैध पावर ऑफ अटार्नी निष्पादन किया गया है। रमेश गिरी के नाम जिला गया बिहार अंतर्गत थाना मगध विश्वविद्यालय में जमीन बेचने संबंधी मुकदमा दर्ज है, जिसमें जिला पदाधिकारी गया के द्वारा उसके विरूद्ध जांच प्रतिवेदन समर्पित किया गया है। साथ ही उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित चौक थाना में भी इसी प्रकार के फर्जी दस्तावेज निष्पादन पर धारा 406, 420, 467, 468 के तहत मुकदमा दर्ज है। लखनऊ पुलिस ने रमेश गिरी को अपराधी मानते हुए अंतिम जांच प्रतिवेदन भी समर्पित किया है। रमेश गिरी पर फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने आरोप में उच्च न्यायालय पटना ने 5,000 रुपये जुर्माना भी लगाया है।

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