शहरी क्षेत्र में प्रतिमाह बिजली खपत का आंकड़ा ढाई करोड़ यूनिट पार कर रहा

GIRIJA THAKUR 

अंबिकापुर। बिजली उपभोक्ताओं की संख्या में शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार वृद्धि हो रही है। शहर में पूर्व की अपेक्षा बड़ी कॉलोनियों, शासकीय कार्यालयों, भवनों का निर्माण हो रहा है, वहीं मॉल, प्राइवेट अस्पताल खुल रहे हैं, जहां बिजली की खपत अधिक होती है। सरगुजा जिले में दो लाख से अधिक बिजली उपभोक्ता हैं, जिनके द्वारा प्रतिमाह साढ़े पांच से छह करोड़ यूनिट से अधिक बिजली का उपयोग किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि बिजली का सर्वाधिक उपयोग फरवरी से अगस्त माह तक होता है। ठंड के समय गीजर, हीटर का प्रयोग बिजली उपभोक्ता करते हैं, वहीं गर्मी के मौसम में एसी, कूलर पंखे का अत्यधिक उपयोग करने के कारण बिजली की खपत तेजी से होती है।

छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि प्रतिवर्ष सरगुजा जिले के शहरी इलाके में बिजली की खपत औसतन 10 से 15 प्रतिशत व ग्रामीण क्षेत्र में 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ रही है। जनवरी माह में ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वाधिक बिजली की खपत हुई, जो अब तक के उच्चतम बिजली खपत का रिकार्ड है। बिजली उपभोक्ताओं की संख्या पर नजर डालें तो शहरी क्षेत्र में करीब 59 हजार उपभोक्ता हैं, इनमें 6500 कामर्शियल बिजली का उपयोग करने वाले हैं। इनके बीच बिजली की खपत का आंकड़ा सामान्यत: प्रतिमाह दो करोड़ यूनिट को छू जाता था। शहरी क्षेत्र में वर्तमान में प्रतिमाह बिजली खपत का आंकड़ा ढाई करोड़ यूनिट को पार कर रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों की बात करें तो जिले में एक लाख 38 हजार 500 उपभोक्ता हैं। पूर्व में ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली खपत का रेसियो 80 से 85 लाख यूनिट रहता था। वर्तमान में तीन करोड़ 74 लाख यूनिट बिजली की खपत हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की खपत अधिक होने के पीछे एक कारण ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई का काम पूरी तरह से बिजली पर निर्भर रहना है। किसान अपने खेतों में सिंचाई के लिए दो से तीन बोर खनन कराते हैं। हर माह फसलों की सिंचाई का कार्य चलता है, जिसमें बिजली की खपत होती है।

सोलर लाइट के भरोसे 22 पारा-टोला
कार्यपालन अभियंता आर. नागवंशी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ पारा-टोला पहुंचविहीन होने के कारण यहां बिजली नहीं पहुंच पाई है। रास्ते पहुंचविहीन होने के कारण यहां तक बिजली विस्तार कार्य के लिए खंभा, ट्रांसफार्मर सहित अन्य संसाधन ला पाना मुश्किल है। विभागीय रिकार्ड के अनुसार जिले में 22 पारा-टोले ऐसे हैं, जहां सोलर लाइट से गांव रोशन हो रहा है।

* शहरी इलाके में अस्पताल, मॉल, बड़ी कॉलोनियों, स्कूल, हॉस्टल का निर्माण तेजी से हो रहा है, यहां बिजली की खपत ज्यादा होती है। ठंड में मौसम में अधिकांश घरों में हीटर, गीजर का उपयोग होता है, वहीं गर्मी के मौसम में एसी, पंखे व कूलर की उपयोग बढ़ जाता है।

एसपी कुमार, कार्यपालन अभियंता (शहर)
* ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की खपत कृषि कार्य में अधिकतर होती है। किसान फसलों की सिंचाई प्रभावित न हो, इसके लिए एक से अधिक बोर कराते हैं। सिंचाई का कार्य पूरी तरह से बिजली पर निर्भर रहता है।
आर. नागवंशी, कार्यपालन अभियंता (ग्रामीण)

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